Hindi Pravachan

मैं हूँ यह एहसास (The Realisation Of I Am) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 09 Oct 2014

मैं हूँ यह एहसास ( The Realisation Of I Am ) हर एक मानव के पास ‘मैं हूं’ यह एहसास रहता ही है और उसके इस एहसास के कारण ही उसके लिए दुनिया का होना मायने रखता है। यदि यह एहसास ही न हो, तब बाकी की बातें बेमतलब साबित हो जाती हैं। मनुष्य के ‘मैं हूं’ इस एहसास के बारे में परम पूज्य सद्गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने

श्रीश्वासम्, द हिलिंग कोड ऑफ द युनिव्हर्स (ShreeShwaasam, The Healing Code Of The Universe)  - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 04 Dec 2014

श्रीश्वासम्, द हिलिंग कोड ऑफ द युनिव्हर्स ( ShreeShwasam, The Healing Code Of The Universe ) श्रीश्वासम् यह द हिलिंग कोड ऑफ द युनिव्हर्स है। हर एक बीमारी को दूर करने वाला, हर एक अडचन को मिटाने वाला वैश्विक हिलिंग कोड ‘श्रीश्वासम्’ है। श्रीश्वासम् का आयोजन २०१५ के अप्रैल के अन्त में या मई की शुरुआत में किया जायेगा, यह बात परम पूज्य सद्गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने ०४

स्वार्थ (Swaarth)

झूठे अहं से मुक्ति पाने का आसान उपाय | हनुमानजी का स्मरण करना और अपने आराध्य का ध्यान करना इस प्रक्रिया से मानव झूठे अहं से अपना पाला  छुडा सकता है। झूठे अहं से मुक्त होने के सरल उपाय के बारे में परम पूज्य सद्गुरु श्री अनिरुद्ध बापू  ने अपने १८ सितंबर २०१४ के  हिंदी प्रवचन में बताया, जो आप इस व्हिडियो में देख सकते हैं l ॥ हरि ॐ

स्वार्थ (Swaarth)

शोकविनाशक हनुमानजी | ShokVinashak Hanumanji हनुमानजी जिस तरह सीताशोकविनाशक हैं, उसी तरह रामशोकविनाशक एवं भरतशोकविनाशक भी हैं। मानव को यह सोचना चाहिए कि जो सीता और श्रीराम के शोक हो दूर कर सकते हैं, वे हनुमानजी क्या मेरे शोक को दूर नहीं कर सकते? अवश्य कर सकते हैं। हनुमानजी के शोकविनाशक सामर्थ्य के बारे में परम पूज्य सद्गुरु श्री अनिरुद्ध बापू  ने अपने १८ सितंबर २०१४ के हिंदी प्रवचन में बताया,

स्वार्थ (Swaarth)

भयभंजक हनुमानजी | मानव के जीवन में रामरूपी कर्म और कर्मफलरूपी सीता के के बीच में सेतु बनाते हैं महाप्राण हनुमानजी! रावणरूपी भय मानव के कर्म से कर्मफल को दूर करता है। रामभक्ति करके मानव को चाहिए कि वह हनुमानजी को अपने जीवन में सक्रिय होने दें। हनुमानजी के भयभंजक सामर्थ्य के बारे में परम पूज्य सद्गुरु श्री अनिरुद्ध बापू  ने अपने १८ सितंबर २०१४  के हिंदी प्रवचन में बताया,

स्वार्थ (Swaarth)

मधु-कैटभ-संहार   स्तुति और निन्दा के कारण मानव अपने अंदर ‘झूठे मैं’ को पनपने देता है। स्तुति-निन्दा को मन पर हावी होने देने के कारण मधु-कैटभ इन राक्षसों का जन्म होता है। आदिमाता महाकाली का अवतार मधु और कैटभ इन दो असुरों का वध करने हेतु हुआ था। मानव को इन राक्षसों से बचने के लिए क्या करना चाहिए, इसके बारे में परम पूज्य सद्गुरु श्री अनिरुद्ध बापू  ने अपने

स्वार्थ (Swaarth)

मानवी गर्भ पर भय असर करता है | भाग – ३ Fear भय के कारण मानव के मन पर बुरे परिणाम होते हैं। गर्भवती महिला के गर्भ पर भी भय का असर होता है। गर्भवती महिला को इस बात का विशेष ध्यान रखते हुए भयकारी बातों से दूर रहना चाहिए। मानवी गर्भ पर भय किस तरह असर करता है, इसके बारे में परम पूज्य सद्गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने

स्वार्थ (Swaarth)

मानवी गर्भ पर भय असर करता है | भाग – २ भय के कारण मानव के मन पर बुरे परिणाम होते हैं। गर्भवती महिला के गर्भ पर भी भय का असर होता है। गर्भवती महिला को इस बात का विशेष ध्यान रखते हुए भयकारी बातों से दूर रहना चाहिए। मानवी गर्भ पर भय किस तरह असर करता है, इसके बारे में परम पूज्य सद्गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने १८

स्वार्थ (Swaarth)

मानवी गर्भ पर भय असर करता है| भाग – 1 भय के कारण मानव के मन पर बुरे परिणाम होते हैं। गर्भवती महिला के गर्भ पर भी भय का असर होता है। गर्भवती महिला को इस बात का विशेष ध्यान रखते हुए भयकारी बातों से दूर रहना चाहिए। मानवी गर्भ पर भय किस तरह असर करता है, इसके बारे में परम पूज्य सद्गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने १८ सितंबर

स्वार्थ (Swaarth)

स्वयं को कोसते रहने की प्रवृत्ति और झूठा मैं| मनुष्य के हाथों जो गलती हुई है, उसका एहसास रखकर, उसे भगवान के पास उसे कबूल कर, उसे सुधारने का प्रयास भक्तिशील बनकर मानव को अवश्य करना चाहिए। उस गलती के लिए स्वयं को बार बार कोसते नहीं रहना चाहिए। मनुष्य के इस तरह स्वयं को बार बार दोषी ठहराते रहने की प्रवृत्ति से ‘झूठे मैं’ को बल मिलता है, इस