Hindi Pravachan

Consciously Correct

‘कॉन्शसली करेक्ट’ और ‘अन्कॉन्शसली करेक्ट’ (Consciously Correct And Unconsciously Correct) सुधार की प्रक्रिया जीवन में घटित करने के लिए मानव को मन को अनुशासन में रखना पडता है। ‘कॉन्शसली इन्करेक्ट’(Consciously Incorrect) इस स्थिति से ‘कॉन्शसली करेक्ट’(Consciously correct) इस स्थिति तक मानव को जाना चाहिए। हर एक बात को ‘कॉन्शसली करेक्ट’ करने का अभ्यास निरंतर करते रहनेवाला मानव धीरे धीरे अपने आप ‘अन्कॉन्शसली करेक्ट’(Unconsciously correct) इस स्थिति तक पहुंच जाता है।

कॉन्शसली इन्करेक्ट (Consciously Incorrect) - Aniruddha Bapu‬ Hindi‬ Discourse 04 Dec 2014

कॉन्शसली इन्करेक्ट (Consciously Incorrect) मानव को स्वयं में सुधार करने का प्रयास करते रहना चाहिए। अभानावस्था में गलती (अनकॉन्शसली इन्करेक्ट) इस स्थिति से उभरकर मानव को चाहिए कि वह उससे क्या गलत हो रहा है यह जानकर, गलती का स्वीकार कर ‘कॉन्शसली इन्करेक्ट’ (Consciously Incorrect) इस स्थिति तक प्रगति करें। मानव के हाथों हो रही गलती का और उसमें सुधार करना आवश्यक है इस बात का मानव को एहसास होना

अभानावस्था में गलती (अनकॉन्शसली इन्करेक्ट) (Unconsciously Incorrect) - Aniruddha Bapu‬ Hindi‬ Discourse 04 Dec 2014

अभानावस्था में गलती (अनकॉन्शसली इन्करेक्ट) (Unconsciously Incorrect) मानव के जीवन में किसी भी बीमारी (disease) का, संकट का, अनुचितता का निर्माण होने की पहली स्थिति है- अभानावस्था में गलती (अनकॉन्शसली इन्करेक्ट / Unconsciously Incorrect) । मानव से जब गलती हो रही होती है और ‘वह गलती कर रहा है’ इस बात का उसे एहसास तक नहीं होता, तब उसकी उस स्थिति को कहते हैं- अभानावस्था में गलती (अनकॉन्शसली इन्करेक्ट /

Pravachan, God, vedic, prayer, Lord, devotion, faith, teachings, Bapu, Aniruddha Bapu, Sadguru, discourse, Bandra, Mumbai, Maharashtra, India, New English school, IES, Indian Education Society, भक्ती, विश्वास, Aniruddha Bapu, अनिरुद्ध बापू, Bapu, बापू, Anirudhasinh, अनिरुद्धसिंह, अनिरुद्ध जोशी, Aniruddha Joshi, Dr. aniruddha Joshi , डॉ. आनिरुद्ध जोशी, सद्‍गुरु अनिरुद्ध, संसार, अवघाचि संसार सुखाचा करीन, संवाद, प्रपंच, घर, रेल्वे, बस, क्लब, प्रश्न, मन, उत्तर, लोभ, मोह, मत्सर, व्यक्ती, मित्र, नोकर, चालक, गोष्टी, अपवाद, कपट, चुका, मालक, नातं, पती, पत्नी, मुलगा, प्रेम, अपेक्षा, friends, bhagwan, parmeshwar, thought, think, ghar, bus, train, answer, conversion, home, club, mind, person, friend, Shreeshwasam

हरि ॐ, श्रीराम, अंबज्ञ! पहले हमें अब श्रीसूक्त सुनना है। श्रीसूक्त… वेदों का यह एक अनोखा वरदान है जो इस… हमने उपनिषद् और मातृवात्सल्यविंदानम् में पढ़ा है कि लोपामुद्रा के कारण हमें प्राप्त हुआ है…महालक्ष्मी और उसकी कन्या लक्ष्मी… इस माँ-बेटी का एकसाथ रहनेवाला पूजन, अर्चन, स्तोत्र, स्तवन… सब कुछ… यानी यह ‘श्रीसूक्तम्’। तो आज पहले… स़िर्फ आज से हमें शुरुआत करनी है। ‘श्रीसूक्तम्’ का पाठ हमारे महाधर्मवर्मन् करनेवाले हैं।

Pravachan, God, vedic, prayer, Lord, devotion, faith, teachings, Bapu, Aniruddha Bapu, Sadguru, discourse, Bandra, Mumbai, Maharashtra, India, New English school, IES, Indian Education Society, भक्ती, विश्वास, Aniruddha Bapu, अनिरुद्ध बापू, Bapu, बापू, Anirudhasinh, अनिरुद्धसिंह, अनिरुद्ध जोशी, Aniruddha Joshi, Dr. aniruddha Joshi , डॉ. आनिरुद्ध जोशी, सद्‍गुरु अनिरुद्ध, jyoti, तरल ज्योती, जलाना, भूमध्यस्थितः, पश्च्चाताप, बॉस, दुध, अच्छा, पल, कृती, भगवान, क्रिया, बुझना, दीप, पानी, गलती, अकारणकारुण्य, आज्ञाचक्र, जीवन, जीवन इच्छा, बरताव, अकल, भगवान का मार्ग, deep, jeevan, kshama, akarankarunya,

अन्त:प्रकाश – भाग २ (The Inner Light – Part 2) ‘दिव्यत्व’ यह प्रकाशदायी तत्त्व है। सिर्फ बाह्य लोक में ही नहीं, बल्कि मानव के अन्दर भी यह दिव्यत्व रहता है। मानव के भीतर रहनेवाला अन्त:प्रकाश (The Inner Light) यानी विवेक यह भगवान के द्वारा मानव के अंदर प्रकाशित किया गया दिव्यत्व है, जिसके जरिये वह भगवान के साथ जुडा रह सकता है। भगवान के द्वारा जलायी गयी इस ज्योति को

Pravachan, God, vedic, prayer, Lord, devotion, faith, teachings, Bapu, Aniruddha Bapu, Sadguru, discourse, Bandra, Mumbai, Maharashtra, India, New English school, IES, Indian Education Society, भक्ती, विश्वास, Aniruddha Bapu, अनिरुद्ध बापू, Bapu, बापू, Anirudhasinh, अनिरुद्धसिंह, अनिरुद्ध जोशी, Aniruddha Joshi, Dr. aniruddha Joshi , डॉ. आनिरुद्ध जोशी, सद्‍गुरु अनिरुद्ध, प्रकाश, सदबुध्दी, देह, कृपा, आज्ञाचक्र, दिव्यत्व, शरीर, प्रवेश, जोडना, दीप, भूमध्य, भगवान, defination, deep, jyoti, उगमस्थान, connection, सूक्ष्म,

अन्त:प्रकाश – भाग १ (The Inner Light – Part 1) ‘दिव्यत्व’ यह प्रकाशदायी तत्त्व है। सिर्फ बाह्य लोक में ही नहीं, बल्कि मानव के अन्दर भी यह दिव्यत्व रहता है। मानव के भीतर रहनेवाला अन्त:प्रकाश (The Inner Light) यानी विवेक यह भगवान के द्वारा मानव के अंदर प्रकाशित किया गया दिव्यत्व है, जिसके जरिये वह भगवान के साथ जुडा रह सकता है। भगवान के द्वारा जलायी गयी इस ज्योति को

Pravachan, God, vedic, prayer, Lord, devotion, faith, teachings, Bapu, Aniruddha Bapu, Sadguru, discourse, Bandra, Mumbai, Maharashtra, India, New English school, IES, Indian Education Society, भक्ती, विश्वास, Aniruddha Bapu, अनिरुद्ध बापू, Bapu, बापू, Anirudhasinh, अनिरुद्धसिंह, अनिरुद्ध जोशी, Aniruddha Joshi, Dr. aniruddha Joshi , डॉ. आनिरुद्ध जोशी, सद्‍गुरु अनिरुद्ध, प्राणवायू, साँस, radha, केन्द्र, अंदर, अमर, राधा, दिव्यता, अंबा, देवी, भक्ति, शक्ती, करुना, ललिता, मूलस्तोत्र, हदय, संघता, देह, भक्तस्वरुपीनी राधा, भगवान, क्षमा, heart, breathing, heart, इन्सान, कृपा, krupa, karuna, aamba, lalita, lungs,

साँस और दिव्यत्व – भाग २ (Breathing And Divinity – Part 2) जो सही है उसे स्वीकार करना और जो गलत है उसे बाहर फेंकना यह क्रिया साँस प्रक्रिया में सहज रूप में होती रहती है और इसीलिए साँस को भी दिव्य माना गया है। मानव का बच्चा जन्म लेते ही रोने लगता है। दर असल वह रोता नहीं है, बल्कि साँस लेता है। मानव की मृत्यु का वर्णन करते

Pravachan, God, vedic, prayer, Lord, devotion, faith, teachings, Bapu, Aniruddha Bapu, Sadguru, discourse, Bandra, Mumbai, Maharashtra, India, New English school, IES, Indian Education Society, भक्ती, विश्वास, Aniruddha Bapu, अनिरुद्ध बापू, Bapu, बापू, Anirudhasinh, अनिरुद्धसिंह, अनिरुद्ध जोशी, Aniruddha Joshi, Dr. aniruddha Joshi , डॉ. आनिरुद्ध जोशी, सद्‍गुरु अनिरुद्ध, प्राणवायू, साँस, पेट, मृत्यु, राधा, चैतन्य, गलत, कार्बन डायऑक्साइड, ऑक्सिजन, सही, दिव्यत्व, श्वास, दिव्य, इन्सान, बच्चा, brithing, oxigen, lungs, stumuc, cry, brithing, body,

साँस और दिव्यत्व – भाग १ (Breathing And Divinity -Part 1) जो सही है उसे स्वीकार करना और जो गलत है उसे बाहर फेंकना यह क्रिया साँस प्रक्रिया में सहज रूप में होती रहती है और इसीलिए साँस को भी दिव्य माना गया है। मानव का बच्चा जन्म लेते ही रोने लगता है। दर असल वह रोता नहीं है, बल्कि साँस लेता है। मानव की मृत्यु का वर्णन करते हुए

Pravachan, God, vedic, prayer, Lord, devotion, faith, teachings, Bapu, Aniruddha Bapu, Sadguru, discourse, Bandra, Mumbai, Maharashtra, India, New English school, IES, Indian Education Society, भक्ती, विश्वास, Aniruddha Bapu, अनिरुद्ध बापू, Bapu, बापू, Anirudhasinh, अनिरुद्धसिंह, अनिरुद्ध जोशी, Aniruddha Joshi, Dr. aniruddha Joshi , डॉ. आनिरुद्ध जोशी, सद्‍गुरु अनिरुद्ध, भूकंप, राधा, भरोसा, विश्वास, स्पेस, चैनल, बडा, संकट, छोटा, दिव्यत्व, काल, दिशा, भक्ति, कंपन, श्रध्दा, सहाय्यता, भगवान, kal, disha, faith, channel, problem, shraddha, capable, truth, space, connection, bhagwan, bhakti, earthquake

भगवान किसी भी संकट से बडा है (God is Greater Than Any Problem) भगवान पर रहनेवाला विश्वास यह सबसे अहम बात है। भगवान पर का भरोसा कभी भी हिलने मत दीजिए। जितना संकट बडा उतना भगवान (God) पर का विश्वास भी बडा रखो। मानव के लिए कोई संकट बडा हो सकता है, मगर भगवान (God) किसी भी संकट से बडा ही है, इस बारे में परमपूज्य सद्गुरू श्री अनिरुद्ध बापूनें

Pravachan, God, vedic, prayer, Lord, devotion, faith, teachings, Bapu, Aniruddha Bapu, Sadguru, discourse, Bandra, Mumbai, Maharashtra, India, New English school, IES, Indian Education Society, भक्ती, विश्वास, Aniruddha Bapu, अनिरुद्ध बापू, Bapu, बापू, Anirudhasinh, अनिरुद्धसिंह, अनिरुद्ध जोशी, Aniruddha Joshi, Dr. aniruddha Joshi , डॉ. आनिरुद्ध जोशी, सद्‍गुरु अनिरुद्ध बापू, आप, मन, बुध्दी, राधा, धारा, प्रवाह, मृत्यू, नाम, विघातक, विधायक, भक्ति, महिना, काम, भगवान, साधन, जगह, जन्म, उलटा, साल, माह, प्रेम, दिप, दिया, मनरुपी, प्रेमरुपी, राधाशक्ति, रचनात्मक, उम्र, श्रध्दा, प्याररुपी, बुध्दीरुपी, मनुष्य, space, connection, naam, Radha, vidhayak, vighatk, chantting, bhakti, sharddha, age, year, month, maan, mind, love, dhara, born, travel,

धारा शब्द को उलटा करने पर राधा शब्द बनता है (The Revert of Dhara Is Radha) मनुष्य के जीवन का सफर यह एक ‘धारा’ है। सृजन से लेकर विनाश तक बहनेवाली यह जीवनरूपी धारा होती है। विधायक से विघातक की दिशा में रहनेवाली गति धारा कहलाती है। विघातक शक्ति का रूपान्तरण जो विधायक शक्ति में करती है, वही राधा (Radha) है। धारा शब्द को उलटा करने पर राधा (Radha) शब्द