Hindi Pravachan

भगवान की कृपा

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धने ३० जनवरी २०१४ के पितृवचनम् में ‘उनके जैसे वही सक्षम है’ इस बारे में बताया। हमारे लिये बहुत संकट हैं, अडचन है, हमें भगवान चाहिये, भगवान की कृपा चाहिये, तो पहले ये जान लो कि भगवान की कृपा किसे प्राप्त करनी है? मुझे प्राप्त करनी है। मुझे कोई लाकर देनेवाला नहीं है। मेरे लिये, अगर मुझे कुछ तकलीफ है, तो मेरी माँ दवा लेगी तो चलेगा क्या?

भगवान का प्यार हमें बदल देता है (God's love changes us)

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धने ३० जनवरी २०१४ के पितृवचनम् में ‘भगवान का प्यार हमें बदल देता है’ इस बारे में बताया। अपनापन चाहिये। अपनापन कब टिकता है? जब हम सोचते हैं कि जिससे मैं प्रेम करता हूँ, उसने मेरे लिये क्या किया है और हम गिनती बंद कर देते हैं । यह सोचोगे कि मैंने क्या किया है, तभी ध्यान में आयेगा कि ९९ चीज उसने दी है, एक चीज नहीं

भय यह हमेशा परिस्थिती से उत्पन्न होता है। (Fear is always because of condition)

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धने २३ जनवरी २०१४ के पितृवचनम् में ‘ भय यह हमेशा परिस्थिती से उत्पन्न होता है।’ इस बारे में बताया। भय, जिस चीज से आप डरते हो, वो चीज अपनेआप तुमसे ज्यादा बलशाली हो जाती है, अपनेआप। और भय कैसे उत्पन्न होता है? It is because of condition. Fear is always because of condition. सारे के सारे fears, सारे के सारे भीतियाँ जो हमारे जिंदगी में है, वो

विश्वास की सीढी (The Step of Faith

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धने २३ जनवरी २०१४ के पितृवचनम् में ‘हमें विश्वास की सीढि चढना चाहिए’ इस बारे में बताया।। हम लोग अगर बाबा के टाईम में होते, बाबा ने मुझे देखा कि नहीं, देखा कि नहीं, पूरा टाईम हमारा उसमें ही जाएगा । इधर बाबा ने देखा कि नहीं देखा। अरे, तुम तुम्हारा काम करो, उसे उसका काम करने दो ना! why you become his critics. उसे आपकी सेंसॉरशिप क्यों

लीला की व्याख्या (Definition Of Leela)

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध ने २० फरवरी २०१४ के पितृवचनम् में ‘लीला की व्याख्या’ के बारे में बताया। तो ये भगवान की कृपा जो है, दिखाई नहीं पडती, हेल्थ दिखाई नहीं पडती, हेल्थ के असर हम लोग जानते हैं। Proper आरोग्य क्या है, हम महसूस कर सकते हैं। वैसे ही भगवान की कृपा यह महसूस करने की बात होती है। और ये जो कथाओं को हम पढते हैं, ये कथाओं से

The Spiritual Transformation of the Mind through God's Stories

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धने २० फरवरी २०१४ के पितृवचनम् में ‘भगवान की कथाओं के द्वारा मन में आध्यात्मिक परिवर्तन’ इस बारे में बताया। तो वैसे ही जब भगवान की कथा पढते हैं, तब वही कथा अपनी जिंदगी में भी, उसका कनेक्शन अपने-आप जोडते रहते हैं। श्रीकृष्ण की कथा आती है, बाललीला की, हम लोग भी कितना मजा करते थे, हम अगर किशन जी के साथ उस समय होते तो कितना मजा

परमपूज्य सद्गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ३ सितंबर २०१५ के पितृवचनम् में ‘दिन में कम से कम चौबीस मिनट तो उपासना करनी ही चाहिए’ इस बारे में बताया। एक चीज बोलता हूँ कि बड़े प्यार के साथ। वेद हैं चार, अठारह पुराण हैं, तेईस उपपुराण हैं, एक सौ आठ उपनिषद हैं, गीता है, रामायण है, महाभारत है, अपने ही सारे ग्रंथ हैं और बहुत सारे ग्रंथ हैं। इस भारत में

श्रीशिवगंगागौरी गदास्तोत्र की महिमा - Aniruddha Bapu

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ३ मार्च २०१६ के पितृवचनम् में’ ‘श्रीशिवगंगागौरी गदास्तोत्र की महिमा’ इस बारे में बताया। श्रीशिवगंगागौरी गदास्तोत्रम्। श्रीशिवगंगागौरी गदा, उसके हाथ में गदा रहती है ना, उसके बाजू में गदा रखी होती है। तो गदास्तोत्र। और ये जो है, इसमें जो कलियुग की जो कलि का प्रभाव बढ रहा है, ये वृत्र हम पर जो attack करता रहता है, हमारे बच्चे जो हैं, उनके पैर

श्रीशब्दध्यानयोग-प्रदक्षिणा

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ३ मार्च २०१६ के पितृवचनम् में’ ‘श्रीशब्दध्यानयोग-प्रदक्षिणा’ के बारे में जानकारी दी। दूषित वातावरण का इन्फेक्शन होने से बचने के लिये, ये बुरी प्रवृत्तियां हमारे बच्चों में ना आये और आयी हुई हों तो निकल जायें इसके लिये और मैं कुछ करने जाऊं, टाईम टाईम पर मुझे बताना पडेगा, क्योंकि मैने always बताया है आपको कि मेरा प्लॅन क्या है? कुछ भी नहीं। So,

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १४ जनवरी २०१६ के पितृवचनम् में जिंदगी में ‘आपके साथ जप करने के लिए त्रिविक्रम को बुलाइए’ इस बारे में बताया। अध्यात्म करते समय भी, बापू ने बोला है अभी ३६ बार कुछ करना है या १० बार करें, जो आप करते हो, तभी पहले उनको बुलाना, हे दादी माँ, आजा! हे त्रिविक्रम, आ मेरे साथ जप करने के लिये! तेरा जप तू ही

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ३० नवंबर २०१७ के पितृवचनम् में ‘४ सेवाओं का उपहार’ इस बारे में बताया। हर साल, हर दिन, हर पल हर एक श्रद्धावान के मन में, हर एक इन्सान के मन में ये विचार रहता है कि मैं जिस स्थिति में हूं, उस स्थिति से मैं और कैसे आगे चला जाऊं, मेरा विकास कैसा हो जाये, मुझे सुख कैसा प्राप्त हो जाये, मेरे दुख

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १८ फरवरी २०१६ के पितृवचनम् में ‘जीवन के विकास के लिये हर एक आवशक्यता पूरी करनेवाले ये ब्रम्हणस्पति हैं’ इस बारे में बताया। ये ब्रह्मणस्पति जो है, हमारे जीवन के विकास के लिये जिस जिस चीज की भी आवश्यकता है, उसे हम तक पहुँचाने वाला, स्रोतों को जो अवरोध होता है उसे काटनेवाला और स्रोत को खुला करनेवाला, हमारा सहायक है, बुद्धिदाता है, विघ्नांतक

Aniruddha Bapu told in his Pitruvachanam dated 18 Feb 2016 about ’God can read your mind’

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १८ फरवरी २०१६ के पितृवचनम् में ‘भगवान आपके मन को जानता है’ इस बारे में  बताया। ये जो मूलाधार चक्र हमारे हर एक के शरीर मे है, इसके स्वामी हैं ये (गणेशजी), और ये जो चक्र है, ये मनुष्य के आनंद के लिये है। उसके जीवन का अभ्युदय करने के लिये है। यहां परमानंद की बात नहीं है, यहां परमार्थ की बात नहीं है,

Aniruddha Bapu told in his Pitruvachanam dated 18 Feb 2016 about ’The definition Of Success’

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १८ फरवरी २०१६ के पितृवचनम् में ‘यश की व्याख्या’ के बारे में बताया। तो यही हमे जानना चाहिये कि मूल परब्रह्म तो एक ही है, तो इतने सारे रूप उसने क्यों लिये? क्योंकि हम लोग नादान हैं, हम लोग समझ नहीं पाते। हमे समझाने के लिये, उसका जो मूल स्वरुप है, वो आसान करने के लिये जगदंबा ने इस सारे उसके परिवार की निर्मिति

Aniruddha Bapu told in his Pitruvachanam dated 14 Jan 2016 about ’Enjoy with the name of God’

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १४ जनवरी २०१६ के पितृवचनम् में ‘भगवान के नाम के साथ आनन्द कीजिए’ इस बारे में बताया। हम लोग जब पिकनिक पे जायें तो हमारे डॅड को और दादी को बोलें कि आओ, तुम भी थोडा मजा करो। उसके लिये कुछ पैसा खर्च करने की आवश्यकता नहीं होती, सिर्फ प्यार से बुलाना। ऐसा करने की आवश्यकता नहीं है कि चार टिकीट हमारे घर के