Hindi Pravachan

अहंकार से पीछा छुडाने का सरल उपाय (An easy way to get rid of the ego) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 05 May 2005

अहंकार (ego) यह इस विश्व की सब से अमंगल बात है । ’मैंने क्या क्या किया’ यह भगवान से कभी मत कहना; ’भगवान ने मेरे लिए क्या क्या किया’ इसे दोहराते रहना । भगवान की भक्ति करते रहने से भगवान मेरे जीवन का केन्द्रस्थान बन जाते हैं, कर्ता बन जाते हैं और अहंकार अपने आप ही छूट जाता है । अहंकार से पीछा छुडाने का सरल उपाय परम पूज्य सद्गुरु श्रीअनिरुद्ध

ॐ रां राधायै राधिकायै रमादेव्यै नम: ।(Om Ram Radhayai Radhikayai Ramdevyai Namah) - Aniruddha Bapu Hindi Pravachan

महाभाव-स्वरूपा राधाजी के सहस्र नामों में से प्रत्येक नाम की महिमा स्पष्ट करते हुए सद्गुरु श्रीअनिरुद्ध बापु अपने प्रत्येक प्रवचन में ’भक्तिमार्ग पर भक्तमाता राधाजी अपने बच्चों के लिए यानी श्रद्धावानों के लिए किस तरह सक्रिय रहती हैं’, यह भी विशद करते थे । ’ॐ रां राधायै राधिकायै रमादेव्यै नम:’ इस मन्त्र का जप ’राधासहस्रनाम’ पर आधारित प्रत्येक हिन्दी प्रवचन के बाद सद्गुरु श्रीअनिरुद्ध बापु स्वयं करते थे और श्रद्धावान

समर्पण ही आराधना की आत्मा है (Surrendering to The God is the Core of Worship) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 04 March 2004

मैं भगवान का हूँ, मेरे पास जो कुछ भी है वह भगवान का दिया हुआ ही है, मैं जो भक्ति कर रहा हूँ वह भगवान की कृपा से भगवान को प्राप्त करने के लिए ही कर रहा हूँ, इस समर्पित भाव के साथ श्रद्धावान को भक्तिपथ पर चलना चाहिए । केवल काम्यभक्ति न करते हुए समर्पण भाव से भगवान की आराधना करना श्रेयस्कर है, समर्पण ही आराधना की आत्मा है(Surrendering

एकविधा भक्ति (Ekavidha Bhakti) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 04 March 2004

जीवन में भगवान को प्राथमिकता देनी चाहिए । मैं भगवान के घर में रहता हूँ, यह भाव रहना चाहिए l जो मेरा है वह भगवान ने ही मुझे दिया हुआ है, इसलिए मेरा जो कुछ भी है वह भगवान का है, मैं भगवान का हूँ, इस भाव के साथ श्रद्धावान के द्वारा की गयी भगवद्‍भक्ति को एकविधा भक्ति (Ekavidha Bhakti) कहते हैं, यह बात सद्गुरु श्री अनिरुद्ध बापु ने अपने दि.

एकविध ध्यान (Ekavidha Dhyaan) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 04 March 2004

मानव भुक्ति से लेकर मुक्ति तक कुछ भी यदि भगवान से प्राप्त करना चाहता है, तो उसे भगवान का एकविध ध्यान (Ekavidha Dhyaan) करना चाहिए । ” भगवान, तुम्हारे सिवा मेरा कोई नहीं है, मैं जो कुछ भी कर रहा हूँ तुम्हारे ही आधार से कर रहा हूँ, तुम्हें पाने के लिए कर रहा हूँ ” इस भाव के साथ श्रद्धावान के द्वारा भगवान का किया गया ध्यान ही एकविध ध्यान

Aniruddha bapu, personality and individuality

परम पूज्य सद्‌गुरु श्री अनिरुद्ध बापुजी ने गुरूवार १६ जनवरी २०१४ के हिंदी प्रवचन में अपनापन यह जताने की बात नहीं है, बल्कि महसूस करने की बात है । सद्गुरुतत्त्व के प्रति अपनापन जताने के बजाय अपनापन महसूस करना आवश्यक है और इसके लिए सद्गुरु का तुम्हारे प्रति रहने वाला जो अपनापन है, उसे महसूस करो, यह बात स्पष्ट की, जो आप इस व्हिडियो में देख सकते हैं l ( Feel

बुरे विचारों से मुक्ति पाने का मार्ग (How To Get Rid of Bad Thoughts) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 16 Jan 2014

परम पूज्य सद्‌गुरु श्री अनिरुद्ध बापुजी ने गुरूवार १६ जनवरी २०१४ के हिंदी प्रवचन में हमारे मन में रहनेवालीं, उत्पन्न होनेवालीं या बार बार उठनेवालीं गलत बातों, भावनाओं, विचारों आदि से मुक्त होने के लिए क्या करना चाहिए, यह प्रश्न मानव के मन में उठता है l ‘बार बार ये बुरे विचार मन में क्यों आते हैं’ इसी बात पर मानव अपना ध्यान केन्द्रित करता है और इससे उन बुरे

सद्‍गुरुतत्त्व की भक्ति से स्वयं को पहचानो (Know Yourself by SadguruTattva's Bhakti) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 8 May 2014

सद्‍गुरुतत्त्व की भक्ति से स्वयं को पहचानो ( Know Yourself by SadguruTattva’s Bhakti) स्वयं को न पहचानना यह मानव की सबसे बडी गलती है l जीवन में किन बातों के कारण मुझे शान्ति मिलती है और किन बातों के कारण अशान्ति सताती है यह जानकर आचरण करना चाहिए l सद्‍गुरुतत्त्व की भक्ति से मानव स्वयं को पहचान सकता है l इसलिए साईनाथ से यह मन्नत मानना जरूरी है कि हे

भगवान की योजना को जीवन में कैसे उतारें (How to follow God's Plan) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 8 May 2014

भगवान प्रत्येक मानव के जीवनविकास के लिए सर्वोत्तम योजना( plan ) बनाते एवं कार्यान्वित करते हैं l मानव जो योजना बनाता है, वह भगवान के द्वारा निर्धारित की गयी योजना से मेल खाती हो, तो ही उसे जीवन में सफलता मिलती है l भगवान के साथ जो प्रेमभाव से जुडे रहने से आपके द्वारा भगवान की योजना के साथ मेल खानेवाली योजना अपने आप बनती रहती है और आपका जीवन बेहतर

प्रेम से आती है जिम्मेदारी (Love brings Responsibility) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 8 May 2014

जहाँ प्रेम होता है वहाँ प्रेम से अपने आप जिम्मेदारी आ जाती है l जहाँ प्रेम होता है वहाँ जिम्मेदारी बोझ नहीं लगती, बल्कि उससे तृप्ति मिलती है l सांवेगिक बुद्धिमत्ता को पहचानकर मानव उससे प्रेम करने वाले व्यक्ति के प्रेम को प्रतिसाद यानी रिस्पाँड करे और प्रेम के साथ अपनी पारिवारिक एवं सभी प्रकार की जिम्मेदारियों को अचूकता से निभाये l  प्रेम और जिम्मेदारी के बीच के रिश्ते के

सांवेगिक बुद्धिमत्ता का महत्त्व (Importance of Emotional Intelligence) – Aniruddha Bapu Hindi Discourse 8 May 2014

मानव अपनी भावनाओं को पहचानने में गलती करता है और इसी वजह से सही दिशा में आगे नहीं बढ सकता l सांवेगिक बुद्धिमत्ता(Emotional Intelligence) का उचित उपयोग करके मानव को गृहस्थी और परमार्थ में उचित कदम उठाते हुए अपना विकास करना चाहिए l सांवेगिक बुद्धिमत्ता के महत्त्व के बारे में परम पूज्य सद्‌गुरु श्री अनिरुद्ध बापु ने अपने दि. 8 मई 2014 के हिंदी प्रवचन में महत्त्वपूर्ण विवेचन किया,  जो

दृढ विश्वास ही आवश्यक है (Firm Belief is necessary) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 8 May 2014

मेरे जीवन में गृहस्थी एवं परमार्थ को एकसाथ सुफल संपूर्ण बनाने के लिए मुझे जिस जिस बात की   आवश्यकता है, वह प्रत्येक बात सद्‍गुरुतत्त्व के पास भरपूर है और वह उचित समय पर मुझे वह हर एक बात देने ही वाला है l मुझे जो भी माँगना है, वह मैं सद्‍गुरु से ही माँगूंगा और सद्गुरु के अलावा किसी और से कुछ भी स्वीकार नहीं करूँगा यह निर्धार श्रद्धावान के

सांवेगिक बुद्धिमत्ता (Emotional Intelligence) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 8 May 2014

मानव यह भावनाप्रधान प्राणि है l मानव की भावनाओं का अध्ययन करके उसके द्वारा व्यक्ति या समूह का रुझान सांवेगिक बुद्धिमत्ता (Emotional Intelligence) के आधार से जानने का विज्ञान आज कल विकसित हो रहा है l भावनाओं में बहकर किसी भी घटना के प्रति रिअ‍ॅक्ट न करते हुए परिस्थिति को रिस्पाँड करने के लिए मानव को सांवेगिक बुद्धिमत्ता का उपयोग करना चाहिए l  सांवेगिक बुद्धिमत्ता के बारे में परम पूज्य

आत्मयोग्यता

मेरी बुद्धि में ही कुछ खोट है, मेरे पास बुद्धि ही कम है, यह कहकर अकसर मानव स्वयं को कोसते रहता है l भगवान ने सभी मानवों को एकसमान बुद्धि का वरदान दिया है, मानव उसका उपयोग कर अभ्यास के साथ उसे कितना बढाता है, इस बात पर ही उसका बुद्ध्यंक (Intelligence Quotient) निश्चित होता है l मानव के बुद्ध्यंक के बारे में परम पूज्य सद्‌गुरु श्री अनिरुद्ध बापु ने

आत्मयोग्यता

महज परमार्थ में ही नहीं बल्कि जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सफल बनने के लिए आत्मयोग्यता और आत्मविश्वास का होना आवश्यक है l आत्मयोग्यता बढाने से आत्मविश्वास बढता है और आत्मयोग्यता बढाने के लिए सद्‍गुरुतत्त्व की भक्ति करना यह राजमार्ग है l आत्मयोग्यता को बढाने के संदर्भ में परम पूज्य सद्‌गुरु श्री अनिरुद्ध बापु ने गुरूवार ०१ मई २०१४ के हिंदी के प्रवचन में, मार्गदर्शन किया, जो आप इस व्हिडियो