Hindi Pravachan

ऐश्वर्य और पंक के बीच का फर्क (The difference between Aishwarya and Pank) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 25 March 2004

आसुरी मार्ग से हासिल की गयी संपत्ति को ऐश्वर्य नहीं कहा जाता क्योंकि वह न तो प्राणमय होता है और ना ही वह ऊर्ध्व दिशा में ले जाने वाला होता है । उसे पंक यानी दलदल कहते हैं और दलदल में फँसे हुए व्यक्ति का दलदल से बाहर निकलना असंभव होता है । ऐश्वर्य और पंक के बीच का फ़र्क परम पूज्य सद्‌गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने २५ मार्च

ऐश्वर्य का अर्थ (The Meaning of Aishwarya) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 25 March 2004

पृथ्वी के साथ जुडा हुआ भौतिक धन, साधनसामग्री, जो प्राणसहित होती है, विकास की ओर ले जाने वाली होती है, उसे ही ऐश्वर्य कहा जाता है । ऐश्वर्य इस शब्द का अर्थ उस शब्द में रहने वाले बीजों के आधार पर क्या होता है, यह बात परम पुज्य बापूने अपने गुरुवार दिनांक २५ मार्च २००४ के हिन्दी प्रवचन में बतायी, जो आप इस व्हिडियो में देख सकते हैं l ॥

राधाजीही दैवी संपत्ती है। (Radha - The Divine treasure) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 25 March 2004

जो भी भगवानमें विश्वास करते है, वो मानते है की, भगवान के पास हमे सब कुछ देने की शक्ति है। भगवान के देने की शक्तिही राधाजी है। राधाजी भक्तोंको आराधना करने के लिए प्रेरित करती है। राधाजी हमे आनंद कैसे पाना है ये भी सिखाती है। इस बारेमें परम पुज्य बापूने अपने गुरुवार दिनांक २५ मार्च २००४ के हिन्दी प्रवचन मे मार्गदर्शन किया, वह आप इस व्हिडीओमें देख सकते है।

चिन्तन का महत्त्व (Importance of Chintan) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 26 Feb 2004

चाहे सुख हो या दुख, मानव को किसी भी स्थिति में भगवान से दूरी बढानी नहीं चाहिए । जीवन के हर मोड पर, कदम कदम पर भगवान से जुडे रहना जरूरी है । मानव के जीवनरूपी वर्तुल (सर्कल) की केन्द्रबिन्दु भगवान ही रहनी चाहिए । जो भगवान का हमेशा चिन्तन करता है, उसके योगक्षेम की चिन्ता भगवान करते हैं । बुद्धि से भगवान की पर्युपासना करने की ताकत राधाजी देती

उपासना शब्द का अर्थ (The meaning of 'Upasana') - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 26 Feb 2004

उपासना शब्द का अर्थ हैं भगवान के नज़दीक बैठना। याने भगवान के गुणों के नज़दीक बैठना। मेरे मन को भगवान के नज़दीक बिठाने की कोशिश करना, कम से कम मेरी बुद्धी पूरी तरह से भगवान के शरण में लगानाl इस बारे में परमपूज्य सद्‌गुरु अनिरुद्ध बापू ने अपने गुरूवार दिनांक २६ फरवरी २००४ के हिंदी प्रवचन में मार्गदर्शन किया वह आप इस व्हिडियो में देख सकते हैं। ॥ हरि ॐ

भगवान के शरण जाना चाहिये (One should seek God's refuge) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 26 Feb 2004

जब तक हम बुद्धी का अपराध नहीं करते तब तक प्राणो से ताकत आती रहती हैंl जबभी बुद्धी का अपराध करते हैं तो प्राणो की ताकत हम तक आ नहीं पहुचती l हमारे नीतिमन को ताकतवर बनाने के लिए बुद्धी का इस्तेमाल करके हमें भगवान के शरण जाना चाहिए, इस बारे में परमपूज्य सद्‌गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने गुरूवार दिनांक २६ फरवरी २००४ के हिंदी प्रवचन में मार्गदर्शन किया

श्रद्धावान का जीवन यह भगवान की देन है (Shraddhavan's life is the gift of God) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 24 July 2014

श्रद्धावान को स्वयं के जीवन की कभी भी घृणा नहीं करनी चाहिए । ’मेरा जीवन यह मेरे भगवान की देन है’, यह बात हर एक श्रद्धावान को याद रखनी चाहिए । भगवान की देन कभी भी गलत, घातक, अहितकारी, दुखदायी नहीं हो सकती । भगवान पर भरोसा करनेवाले श्रद्धावान को जीवन को सकारात्मक नजरिये से देखना चाहिए, इस बारे में परम पूज्य सद्‌गुरु श्री अनिरुद्ध बापु ने अपने गुरूवार दिनांक

तुम स्वयं ही स्वयं के मार्गदर्शक हो । (You are your own guide) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 24 July 2014

हर एक व्यक्ति स्वयं ही स्वयं का मार्गदर्शक है । मनुष्य को चाहिए कि वह अपने अस्तित्व का एहसास रखकर स्वयं के हित का विचार करके, स्वयं का आत्मपरीक्षण करके अपना विकास करे । उपलब्ध जीवनकाल का उचित उपयोग करके मानव अपना आत्महित किस तरह कर सकता है, इस बारे में परम पूज्य सद्‌गुरु श्री अनिरुद्ध बापु ने अपने गुरूवार दिनांक २४ जुलाई २०१४ के हिंदी प्रवचन में बताया, जो

अस्तित्व का एहसास (Awareness of Being) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 24 July 2014

मानव को प्राथमिक स्तर पर यह जानना चाहिए कि वह है, उसका अस्तित्व है, इसलिए उसके लिए सब कुछ है । `मैं हूँ’ इस बात का मानव को एहसास रखना चाहिए । मानव को अन्तर्मुख होकर `मैं कैसा हूँ’ यह स्वयं से पूछना चाहिए । बहुत बार मानव अपने अस्तित्व का एहसास खोकर जीवन भर कल्पना में जीता है और इस वजह से जीने के आनन्द से वंचित रह जाता

भक्त भगवान से जुडा हुआ होता है। (The Devotee is constantly connected with The God) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 24 July 2014

मानव को यह श्रद्धा रखनी चाहिए कि मैं भगवान से जुडा हुआ हूँ और भगवान दयालु एवं क्षमाशील हैं, वे मुझे सजा देने के लिए नहीं, बल्कि प्रेम से मेरा उद्धार करने आये हैं । भगवान से क्षमा अवश्य माँगिए, परंतु भगवान ने मेरा साथ छोड दिया है, ऐसा कभी भी मत मानना । भगवान से मुझे अन्य कोई भी अलग नहीं कर सकता, इस श्रद्धा के महत्त्व के बारे

भय से मुक्ति पाने के लिए भगवान पर भरोसा रखिए (Keep Faith in God to get rid of Fear) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 15 May 2014.

मानव जिस बात से डरता है, उसके बारे में वह ज्यादा सोचता है । जिस बात से उसे डर नहीं लगता उसके बारे में वह नहीं सोचता । सच्चे श्रद्धावान की जिम्मेदारी भगवान उठाते हैं और निरपेक्ष प्रेम के साथ उसके लिए सब कुछ करते रह्ते हैं । मानव का भगवान पर पूरा भरोसा होना चाहिए । भय से मुक्ति पाने के लिए भगवान पर भरोसा रखना आवश्यक है, यह

कृष्णसंयुता राधा (Krishna-sanyuta Radha) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 19 February 2004

  Krishna-sanyuta Radha – कृष्णसंयुता यह राधाजी का महज नाम नहीं है, बल्कि यह तो राधाजी की स्थिति है, यह राधाजी की आकृति है, यह राधाजी का भाव है । दर असल कृष्णसंयुता ही राधाजी का मूल स्वरूप है  । भरोसा यह कृष्णसंयुत ही होता है और इसीलिए भरोसा यह तत्त्व राधाजी से जुडा है । राधाजी के कृष्णसंयुता इस नाम के बारे में सद्गुरु श्रीअनिरुद्ध ने अपने १९ फ़रवरी

भरोसा (Surety & Certainty) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 19 February 2004

  Surety & Certainty – मानव को केवल भगवान पर ही भरोसा करना चाहिए और भगवान पर ही केवल भरोसा करने की शक्ति ही राधाजी है । विश्वास और भरोसा इनके बीच फ़र्क है । विश्वास के स्तर पर से आगे बढकर मानव को भगवान पर पूरा भरोसा रखना चाहिए, यह मुद्दा सद्गुरु श्रीअनिरुद्ध बापु ने अपने १९ फ़रवरी २००४ के हिंदी प्रवचन में विशद किया, जो आप इस व्हिडियो

भक्तमाता राधाजी भक्त का जीवन मंगलमय बनाती हैं (Bhaktamata Radhaji makes devotees life auspicious) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 05 May 2005

Bhaktamata Radhaji makes devotees life auspicious – जीवन मंगलमय बनाना हो तो भगवान के साथ कभी भी अहंकार से पेश नहीं आना चाहिए । राधाजी स्वयं हंकाररूपा हैं, अहंकार कभी राधाजी में होता ही नहीं है । भक्तमाता राधाजी जिसके जीवन में सक्रिय रहती हैं, उसके जीवन में अहंकार का अपने आप ही लोप हो जाता है । राधाजी की कृपा से श्रद्धावान का जीवन मंगल कैसे होता है, यह

अहंकार से पीछा छुडाने का सरल उपाय (An easy way to get rid of the ego) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 05 May 2005

अहंकार (ego) यह इस विश्व की सब से अमंगल बात है । ’मैंने क्या क्या किया’ यह भगवान से कभी मत कहना; ’भगवान ने मेरे लिए क्या क्या किया’ इसे दोहराते रहना । भगवान की भक्ति करते रहने से भगवान मेरे जीवन का केन्द्रस्थान बन जाते हैं, कर्ता बन जाते हैं और अहंकार अपने आप ही छूट जाता है । अहंकार से पीछा छुडाने का सरल उपाय परम पूज्य सद्गुरु श्रीअनिरुद्ध