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Hindi Pravachan

लीला की व्याख्या (Definition Of Leela) – Aniruddha Bapu Pitruvachanam

लीला की व्याख्या (Definition Of Leela)

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध ने २० फरवरी २०१४ के पितृवचनम् में ‘लीला की व्याख्या’ के बारे में बताया। तो ये भगवान की कृपा जो है, दिखाई नहीं पडती, हेल्थ दिखाई नहीं पडती, हेल्थ के असर हम लोग जानते हैं। Proper आरोग्य क्या है, हम महसूस कर सकते हैं। वैसे ही भगवान की कृपा यह महसूस करने की बात होती है। और ... Read More »

भगवान की कथाओं के द्वारा मन में आध्यात्मिक परिवर्तन (The Spiritual Transformation of the Mind through God’s Stories) – Aniruddha Bapu

The Spiritual Transformation of the Mind through God's Stories

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धने २० फरवरी २०१४ के पितृवचनम् में ‘भगवान की कथाओं के द्वारा मन में आध्यात्मिक परिवर्तन’ इस बारे में बताया। तो वैसे ही जब भगवान की कथा पढते हैं, तब वही कथा अपनी जिंदगी में भी, उसका कनेक्शन अपने-आप जोडते रहते हैं। श्रीकृष्ण की कथा आती है, बाललीला की, हम लोग भी कितना मजा करते थे, हम अगर ... Read More »

दिन में कम से कम चौबीस मिनट तो उपासना करनी ही चाहिए (One should perform Upasana everyday at least for 24 minutes) – Aniruddha Bapu

परमपूज्य सद्गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ३ सितंबर २०१५ के पितृवचनम् में ‘दिन में कम से कम चौबीस मिनट तो उपासना करनी ही चाहिए’ इस बारे में बताया। एक चीज बोलता हूँ कि बड़े प्यार के साथ। वेद हैं चार, अठारह पुराण हैं, तेईस उपपुराण हैं, एक सौ आठ उपनिषद हैं, गीता है, रामायण है, महाभारत है, अपने ही सारे ... Read More »

श्रीशिवगंगागौरी गदास्तोत्र की महिमा (The Greatness of ShriShivaGangaGauri Gadastotra) – Aniruddha Bapu

श्रीशिवगंगागौरी गदास्तोत्र की महिमा - Aniruddha Bapu

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ३ मार्च २०१६ के पितृवचनम् में’ ‘श्रीशिवगंगागौरी गदास्तोत्र की महिमा’ इस बारे में बताया। श्रीशिवगंगागौरी गदास्तोत्रम्। श्रीशिवगंगागौरी गदा, उसके हाथ में गदा रहती है ना, उसके बाजू में गदा रखी होती है। तो गदास्तोत्र। और ये जो है, इसमें जो कलियुग की जो कलि का प्रभाव बढ रहा है, ये वृत्र हम पर जो ... Read More »

श्रीशब्दध्यानयोग-प्रदक्षिणा के बारे में जानकारी (Shreeshabdadhyaanayoga Pradakshina Information) – Aniruddha Bapu

श्रीशब्दध्यानयोग-प्रदक्षिणा

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ३ मार्च २०१६ के पितृवचनम् में’ ‘श्रीशब्दध्यानयोग-प्रदक्षिणा’ के बारे में जानकारी दी। दूषित वातावरण का इन्फेक्शन होने से बचने के लिये, ये बुरी प्रवृत्तियां हमारे बच्चों में ना आये और आयी हुई हों तो निकल जायें इसके लिये और मैं कुछ करने जाऊं, टाईम टाईम पर मुझे बताना पडेगा, क्योंकि मैने always बताया है ... Read More »

आपके साथ जप करने के लिए त्रिविक्रम को बुलाइए (Invite Trivikram to Chant with You) – Aniruddha Bapu

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १४ जनवरी २०१६ के पितृवचनम् में जिंदगी में ‘आपके साथ जप करने के लिए त्रिविक्रम को बुलाइए’ इस बारे में बताया। अध्यात्म करते समय भी, बापू ने बोला है अभी ३६ बार कुछ करना है या १० बार करें, जो आप करते हो, तभी पहले उनको बुलाना, हे दादी माँ, आजा! हे त्रिविक्रम, आ ... Read More »

४ सेवाओं का उपहार (The Gift of 4 Yojanas) – Aniruddha Bapu Pitruvachanam

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ३० नवंबर २०१७ के पितृवचनम् में ‘४ सेवाओं का उपहार’ इस बारे में बताया। हर साल, हर दिन, हर पल हर एक श्रद्धावान के मन में, हर एक इन्सान के मन में ये विचार रहता है कि मैं जिस स्थिति में हूं, उस स्थिति से मैं और कैसे आगे चला जाऊं, मेरा विकास कैसा ... Read More »

जीवन के विकास के लिये हर एक आवशक्यता पूरी करनेवाले ये ब्रम्हणस्पति हैं। (Brahmanaspati provides everything we need) – Aniruddha Bapu

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १८ फरवरी २०१६ के पितृवचनम् में ‘जीवन के विकास के लिये हर एक आवशक्यता पूरी करनेवाले ये ब्रम्हणस्पति हैं’ इस बारे में बताया। ये ब्रह्मणस्पति जो है, हमारे जीवन के विकास के लिये जिस जिस चीज की भी आवश्यकता है, उसे हम तक पहुँचाने वाला, स्रोतों को जो अवरोध होता है उसे काटनेवाला और ... Read More »

भगवान आपके मन को जानता है (God can read your mind) – Aniruddha Bapu

Aniruddha Bapu told in his Pitruvachanam dated 18 Feb 2016 about ’God can read your mind’

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १८ फरवरी २०१६ के पितृवचनम् में ‘भगवान आपके मन को जानता है’ इस बारे में  बताया। ये जो मूलाधार चक्र हमारे हर एक के शरीर मे है, इसके स्वामी हैं ये (गणेशजी), और ये जो चक्र है, ये मनुष्य के आनंद के लिये है। उसके जीवन का अभ्युदय करने के लिये है। यहां परमानंद ... Read More »

यश की व्याख्या (The definition Of Success) – Aniruddha Bapu

Aniruddha Bapu told in his Pitruvachanam dated 18 Feb 2016 about ’The definition Of Success’

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १८ फरवरी २०१६ के पितृवचनम् में ‘यश की व्याख्या’ के बारे में बताया। तो यही हमे जानना चाहिये कि मूल परब्रह्म तो एक ही है, तो इतने सारे रूप उसने क्यों लिये? क्योंकि हम लोग नादान हैं, हम लोग समझ नहीं पाते। हमे समझाने के लिये, उसका जो मूल स्वरुप है, वो आसान करने ... Read More »

भगवान के नाम के साथ आनन्द कीजिए (Enjoy with the name of God) – Aniruddha Bapu

Aniruddha Bapu told in his Pitruvachanam dated 14 Jan 2016 about ’Enjoy with the name of God’

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १४ जनवरी २०१६ के पितृवचनम् में ‘भगवान के नाम के साथ आनन्द कीजिए’ इस बारे में बताया। हम लोग जब पिकनिक पे जायें तो हमारे डॅड को और दादी को बोलें कि आओ, तुम भी थोडा मजा करो। उसके लिये कुछ पैसा खर्च करने की आवश्यकता नहीं होती, सिर्फ प्यार से बुलाना। ऐसा करने ... Read More »

जीवन के अच्छे पलों को याद करना यह भी रिक्रिएशन है। (Remembering best moments of life is also a recreation) – Aniruddha Bapu

Aniruddha Bapu told in his Pitruvachanam dated 14 Jan 2016 about ’Remembering best moments of life is also a recreation’

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १४ जनवरी २०१६ के पितृवचनम् में ‘जीवन के अच्छे पलों को याद करना यह भी रिक्रिएशन है’ इस बारे में बताया। तो भगवान ने सपनें बनाये रात की नींद में और ये मेडिकल टर्म जान लीजिये कि आप लोग, कुछ लोग बोलते हैं कि मुझे सपना आता ही नहीं, अरे झूठ बोल रहे हैं। ... Read More »

पंचमुखहनुमत्कवचम् विवेचन – १९ (क्रैं बीज – युद्ध बीज) [Panchamukha-Hanumat-kavacham Explanation – 19 (Kraim Beej – Yuddha Beej) – Aniruddha Bapu

Aniruddha Bapu told in his Pitruvachanam dated 16 Mar 2017 about, Panchamukha-Hanumat-kavacham Explanation – 19 (Kraim Beej - Yuddha Beej)

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १६ मार्च २०१७ के पितृवचनम् में ‘पंचमुखहनुमत्कवचम् विवेचन’ में ‘क्रैं बीज – युद्ध बीज’ के बारे में बताया। ‘क्रैं अस्त्राय फट् इति दिग्बंधः’। – क्रैं बीज जो है इसे युद्ध बीज कहते हैं। क्या कहते हैं? युद्ध बीज। क्रैं ये युद्ध बीज है। हमारे मन में जो युद्ध चलता रहता है, खुद के साथ ... Read More »

पंचमुखहनुमत्कवचम् विवेचन – १८ (क्रैं अस्त्राय फट्) [Panchamukha-Hanumat-kavacham Explanation – 18 (Kraim Astraaya Phat) – Aniruddha Bapu

Aniruddha Bapu told in his Pitruvachanam dated 16 Mar 2017 about, Panchamukha-Hanumat-kavacham Explanation - 18 (Kraim Astraaya Phat)

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १६ मार्च २०१७ के पितृवचनम् में ‘पंचमुखहनुमत्कवचम् विवेचन’ में ‘क्रैं अस्त्राय फट्’ इस बारे में बताया। हम हमारे जीवन में खुद के जीवन में झाँककर देखेंगे तो हम लोग जान जाएंगे कि हमारे जीवन में हम लोग ने कितनी बार हम गुस्से के कारण कुछ गलत लफ्ज बोल देते हैं, गलत शब्द बोल देते ... Read More »

पंचमुखहनुमत्कवचम् विवेचन – १७ (फट् बीज) [Panchamukha-Hanumat-kavacham Explanation – 17 (Phat Beej) – Aniruddha Bapu

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १६ मार्च २०१७ के पितृवचनम् में ‘पंचमुखहनुमत्कवचम् विवेचन’ में ‘फट् बीज’ के बारे में बताया। ‘क्रैं अस्त्राय फट्’ इति दिग्बंधः। – ‘फट्’ जो है, जो किसी भी चीज का तुरंत त्याग करने के लिये, उसका नाश करने के लिये, उसका विनाश करने के लिये, उसको नष्ट करने के लिये हमेशा के लिये, जो आवाहन ... Read More »