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श्रीहनुमानचलिसा पठणासंदर्भात सूचना व शंकानिरसन

हरि ॐ, आपल्या संस्थेने दि. २१ ते २७ सप्टेंबर ह्या आठवडाभराकरिता श्रीहनुमानचलिसा पठणाचे ऑनलाईन पद्धतीने आयोजन केले आहे, हे आपणा सर्वांना माहीतच आहे. ह्या पठणाबाबत काही श्रद्धावानांनी काही शंका उपस्थित केल्या. त्या शंकांच्या निरसनाकरिता पुढील स्पष्टीकरण व काही सूचना देत आहे : १. हे पठण भारतीय प्रमाणवेळेनुसार (IST) सकाळी ८.०० वाजता सुरू होईल व भारतीय प्रमाणवेळेनुसार सायंकाळी ८.१५ पर्यंत सुरू राहील. मंगळवार, गुरुवार व शनिवारी (२२, २४ व २६ सप्टेंबर

नित्य उपासनेसंबंधी सूचना

हरि ॐ, सोमवार, दि. २१ सप्टेंबर ते रविवार, दि. २७ सप्टेंबर २०२० पर्यंत सकाळी ८.०० वाजल्यापासून रात्री ८.१५ वाजेपर्यंत दरवर्षीप्रमाणे “हनुमान चलिसा पठण” ह्या विशेष उपासनेचे आयोजन करण्यात आले आहे ह्याची सर्व श्रद्धावानांना पूर्वकल्पना आहेच. त्यामुळे ह्या काळात दररोज संध्याकाळी ८.०० वाजता होणारी नित्य उपासना होणार नाही ह्याची सर्व श्रद्धावानांनी कृपया नोंद घ्यावी. कोणीही श्रद्धावान त्याला जसे व जेवढा वेळ जमेल त्यानुसार ह्या विशेष उपासनेत सहभागी होऊ शकतो. तसेच भारताबाहेरील

सद्गुरु बापूजी के घर के गणेशोत्सव संबंधी सूचना

हरि ॐ, हर वर्ष सद्गुरु बापूजी के घर पर ढाई दिन का गणेशोत्सव बडे हर्षोल्लास से भक्तिमय वातावरण में मनाया जाता है तथा कई श्रद्धावान बापूजी के घर पर गणेशजी के दर्शन के लिए मनोभाव से, बडी संख्या में आते हैं। परंतु इस वर्ष कोविड-१९ की भीषण परिस्थिति के कारण, इच्छा होते हुए भी, किसी भी व्यक्ति के लिए गणेशजी के दर्शन खुले नहीं होंगे, कृपया सभी इस बात पर

गणेशोत्सव में गणपती की मूर्तियों संबंधी सूचना

हरि ॐ, कई श्रद्धावान यह पूछ रहे हैं कि क्या इस साल के गणेशोत्सव के लिए “इको फ्रेंडली” गणपति की मूर्तियाँ उपलब्ध करा दी जानेवालीं हैं। लेकिन फिलहाल सर्वत्र फ़ैले हुए कोरोना वायरस (कोविद-१९) के संकट के कारण, इस साल संस्था की ओर से इको फ्रेंडली गणपति मूर्तियाँ उपलब्ध नहीं करा दी जा सकतीं, इसपर श्रद्धावान कृपया ग़ौर करें। यदि इको फ्रेंडली गणपति की मूर्ति ना मिलें, तो शाडू की

चरणसंवाहन - भाग २ (Serving the Lord’s feet - Part 2)

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धजी ने १५ अप्रैल २०१० के पितृवचनम् में ‘चरणसंवाहन’ के बारे में बताया। अपनी दोनों हाथों से भगवान के, सद्‍गुरु की चरण संवाहना करो। हेमाडपंतजी हमें पूरे दिल से कह रहे हैं कि भाई, अभिवंदना करो और चरणसंवाहन कैसे करो? अभिसंवाहन करो। उसके पैर की जब हम सेवा करते हैं, चरणों की सेवा करते हैं, फोटों में, तसबीर में, मूर्ती में जो भी हैं तो वही है ये

Ghorkashtodharan-Pathan

हरि ॐ, हर साल संस्था द्वारा पूरे श्रावण महीने में घोरकष्टोद्धरण स्तोत्र पठन का कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। इस साल कोरोना वायरस, “कोविद – १९” महामारी के गंभीर हालातों के कारण यह कार्यक्रम आयोजित नहीं किया जा सकता। श्रद्धावानों की इस मुश्किल को मद्देनज़र रखते हुए, संस्था द्वारा (पिछले कुछ सालों के रेकॉर्डिंग का इस्तेमाल करके) इस पठन का लाभ उठाने का प्रबन्ध किया गया है। श्रद्धावान श्रावण महीने

Mahadurgeshwar-Prapatti

हरि ॐ, हर साल श्रावण महीने के सोमवार को कई पुरुष श्रद्धावान एकत्रित आकर “श्री महादुर्गेश्वर प्रपत्ती” बहुत ही हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं। लेकिन इस साल सर्वत्र फ़ैले हुए कोरोना वायरस (कोविद-१९) की आपत्ति के कारण चल रहे लॉकडाउन के दौर में, एक घर के पुरुष सदस्य अपने घर में ही प्रपत्ती करें। अन्य आप्त / रिश्तेदार / मित्र / पड़ोसी इन्हें इकट्ठा करके सामूहिक रूप में प्रपत्ती ना

Aniruddha TV

हरि ॐ, गुरुपूर्णिमा के उपलक्ष्य में, कई श्रद्धावानों द्वारा यह पूछा गया था कि क्या संस्था की ओर से पिछले कुछ वर्षों में मनाये गए गुरुपूर्णिमा उत्सव के कुछ अंश पुनः देखने को मिल सकते हैं। इस विनती को मद्देनजर रखते हुए हम आगे दर्शाये समयों पर इस उत्सव की कुछ व्हिडीओ क्लिपींग्स फेसबुक और अनिरुद्ध टिव्ही के माध्यम से दिखानेवाले हैं। दि. ०५-०७-२०२० – सुबह ११:०० बजे दि. ०५-०७-२०२०

Aniruddha Gurukshetram

हरि ॐ, सभी श्रद्धावान यह जानते ही हैं कि कोरोना (कोविद-१९) की पृष्ठभूमि पर फिलहाल श्रीअनिरुद्ध गुरुक्षेत्रम्‌ दर्शन के लिए बंद रखा गया है। अन्य दिनों की तरह ही आषाढी एकादशी (बुधवार, दि. १ जुलाई २०२०) एवं गुरुपूर्णिमा (रविवार, दि. ५ जुलाई २०२०) इन दो दिनों को भी श्रीअनिरुद्ध गुरुक्षेत्रम्‌ बंद ही रहनेवाला है। अतः इन दिनों पर श्रद्धावान श्रीअनिरुद्ध गुरुक्षेत्रम्‌ में दर्शन के लिए ना आयें, यह नम्र विनती

"The Bapu that I have known" book now available on e-Aanjaneya website in Marathi, Hindi and English

Hari Om, The book “The Bapu that I have known” which was published in 2017 is available in Marathi, Hindi and English. We shraddhavans take immense pleasure in reading this book over and over again by getting to know various facets of the personality of Sadguru Bapu. I am happy to let you know that this book is now available on e-Aanjaneya website in the form of an e-book. Accordingly,