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कल दशहरा था। बापूजी खुद श्रीहरिगुरुग्राम में पधारे और सभी श्रद्धावानों को बापूजी के दर्शनों का लाभ मिला।  संपन्न हुए दशहरे के पावन पर्व की मेरे सभी मित्रों को शुभकामनाएं देते हुए मैं सदगुरु बापूजी के चरणों में यही प्रार्थना करता हूँ कि प्रत्येक श्रद्धावान का सदगुरु चरणों में “विश्वास” दृढ हो।  इस आश्विन नवरात्रि में हम सब ने कई घटनाएं देखीं। इस नवरात्रि के पहले दिन, अर्थात प्रतिपदा के दिन प्रभात समय श्रीअनिरुद्ध गुरुक्षेत्रम में

सभी श्रद्धावानों के लिए खुश खबर...Good news to Shraddhavans

Good news to Shraddhavans   नवरात्रि के पावन पर्व पर अर्थात अश्विन नवरात्रि के पहले दिन से श्रद्धावन अधिक प्रसन्नता और उल्हास महसूस करेंगे। उनके लिए तोहफों की बौछार हो रही है। पहले तो हम बड़ी बेसब्री से इन्तजार हो रही CDs Pipasa (पिपासा) , Pipasa 2 (पिपासा २) and Pipasa Pasarli (पिपासा पसरली) को रिलीस कर रहे हैं।   दुसरे, हम अपना सबसे पहला e-commerce website लॉन्च  कर रहे हैं, जो की वास्तव में एक ऑनलाइन बुक पोर्टल है जिसकी वजह

Aniruddha Chalisa

ll Hari Om ll Shree Aniruddha Chalisa Pathan began in a very pious atmosphere at Shree Harigurugram. The Padchinnh and idol of Bapu arrived at 9:15 AM. After this the ceremony started with chanting of Anhik, Shree Aadimata Shubhankara Stavanam and 9 Vachane of Sadguru Bapu.  Chanting of Shree Aniruddha Chalisa started at 10:00 AM. Shraddhavans have turned up in large numbers to take the advantage of this blessed opportunity.

Aniruddha Chalisa

 ll हरि ॐ ll   श्री अनिरुद्ध चलीसा पाठ (Aniruddha Chalisa)       पिछले साल, नवरात्री के दौरान हम सब ने मिलकर श्री हरिगुरुग्राम में श्री अनिरुद्ध चलीसा का पाठ किया था । तब यह कार्यक्रम परम पूज्य बापूजी की “तपस्या” के दौरान हुआ था और इस साल भी यह कार्यक्रम उनकी “उपासना” के दौरान हो रहा है । हम सचमुच बहुत भाग्यशाली हैं जो हमें फिर से इस पाठ में भाग लेने का

Shree Lalita Panchami, Mahishasurmardini

ll हरि ॐ ll “श्रीललिता पंचमी” – श्रीमातृवात्सल्यविंदानम कथा (Lalita Panchami)   श्रीललिता पंचमी – बापूंजीके घर पर पूजी जानेवाली मोठेआई की मूरत   आश्विन शुद्ध पंचमी अर्थात श्रीललिता पंचमी । आदिमाता महिषासुरमर्दिनी का श्री रामजी को दिया हुआ वरदान, अर्थात रावण के वध का कार्य पूरा करने के आड़े आने वाले दुर्गम का वध करने हेतु रामसेना में वह आश्विन शुद्ध पंचमी की रात को प्रगट हुई और उसने अपने परशु से उस काकरूपी असुर