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विश्‍व का रहस्य त्रिविक्रम - π (Pi)

   पिछले कुछ हफ्तोंसें परमपूज्य बापूजीके प्रवचन ’ॐ रामवरदायिनी श्रीमहिषासुरमर्दिन्यै नम:l” इस श्रीअनिरुध्द गुरुक्षेत्रम्‌ मंत्र कें, अंकुरमंत्र भागकें तिसरें पद पर चालू हैंl इस प्रवचन अंतर्गत बापूने हमें परमेश्‍वरी सूत्र (algorithms) और शुभचिन्हों कीं पहचान करा दीl इन सूत्रोंके अंतर्गत बापूने हमें, स्कंदचिन्ह, स्वस्तिक, सृष्टी के सूर्य – चंद्र, दीप, आरती, इत्यादी अनेक algorithms की विस्तृत जानकारी दीl उसके बाद जुलै के महिनें में बापू ने उनके प्रवचन की शुरुआत

Gurupournima

गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु: गुरुर्देवो महेश्वर: । गुरुरेव परब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः ॥ श्रीगुरुगीतेमध्ये या श्लोकाद्वारे गुरुमहिमा वर्णिला आहे. वटपौर्णिमा ते गुरुपौर्णिमा या महिन्याभराच्या काळास ‘श्रीगुरुचरणमास’ म्हटले जाते. गुरुपौर्णिमा हा सद्गुरुंच्या ऋणांचे स्मरण करून सद्गुरुचरणी कृतज्ञता व्यक्त करण्याचा दिवस ! गुरुपौर्णिमेच्या पर्वावर सद्गुरुंना गुरुदक्षिणा देण्याची पद्धतही आहे. पण सद्गुरु श्रीअनिरुद्ध तर कुणाकडूनच कधीही कुठल्याही स्वरूपात काहीही स्वीकारत नाहीत. अगदी गुरुपौर्णिमेलाही ते साधी फुलाची पाकळीही स्वीकारत नाहीत. सद्गुरु बापू म्हणतात- “मला जर काही

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२७ जून २०१३ के प्रवचन में बापु के द्वारा विशद की गयी गेहूँ का सत्त्व बनाने की रेसिपी यहाँ पर दी जा रही है।  गेहूँ का सत्त्व बनाने के लिये गेहूँ रात को पानी में भिगोकर रख दीजिए। अगले दिन यह पानी निकालकर गेहूँ को नये पानी में भिगोइए। तीसरे दिन यह पानी निकालकर गेहूँ को पुन: नये पानी में भिगोइए। चौथे दिन गेहूँ में से पानी निकाल दीजिए और इस भिगोये गये गेहूँ

धारी माता का प्रकोप

हाल ही में उत्तराखंड में जलप्रलय हुआ जिसकी वजह से बड़े पैमाने पर मानवहानी तथा वित्तहानी हुई। यह सारी ख़बरें हम समाचार पत्रों में और न्युजचॅनल्स्‌ में देख ही रहें थे। कल प्रवचन के दौरान बापूजी ने इस घटना का उल्लेख किया। इस बात से सम्बंधित लेख आज के दैनिक प्रत्यक्ष में प्रकाशित हुआ है। उसका हिंदी अनुवाद यहॉं दे रहा हूँ। ऐसा माना जाता है कि चारधाम यात्रा करनेवाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा धारा माता करती है।

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अनिरुद्धधाम (Aniruddhadham) हरि: ॐ मंगलवार दिनांक ०७-०५-२०१३ को, अक्कलकोटनिवासी श्री स्वामी समर्थ पुण्यतिथि के पवित्र दिन, प्रथम अनिरुद्धधाम के निर्माणकार्य शुरुआत डुडूळ गाँव, देहू- आळंदी रोड (तालुका हवेली, जिला पुणे) में हुई। परमपूज्य बापुजी के निर्देश के अनुसार महाधर्मवर्मन्‌ डॉ. योगीन्द्रसिंह जोशी और डॉ. सौ. विशाखावीरा जोशी ने कुछ श्रद्धावानों के साथ निर्माणकार्य की शुरुआत होने से पहले कार्यारंभ-पूर्व की जानेवाली उपासना की। इसमें श्री गुरुक्षेत्रम् मन्त्र, ’ॐ गं गणपतये

Sai Niwas Hindi Documentary DVD

Sainiwas Documentary हरी ॐ मित्रों, पिछले गुरूवार को, अर्थात ३१ जनवरी २०१३ को श्रद्धावनों के लिए स्वस्तिक्षेम संवाद के बाद, जो बापूजी के हिंदी प्रवचन के लिए बैठते हैं उनके लिए साईंनिवास डाक्यूमेंट्री (हिन्दी में डबींग की हुई) लगाई गयी थी। चूंकि मूल प्रति की अवधि २ घंटों की है, इसका संक्षिप्त प्रारूप, जिसकी अवधि ४५ मिनटों की है, वह दिखाई गई। उपस्थितों में से बहुतों ने पहले ही मूल मराठी प्रति देखी

स्वस्तिक्षेम संवादम्‌ (Swastikshem Sanwad)

कल परमपूज्य बापूजी ने प्रवचन में स्वस्तिक्षेम संवादम्‌ की संकल्पना सारे श्रद्धावानों के समक्ष रखी; सभी श्रद्धावानों के हित के लिए। इस में प्रत्येक श्रद्धावान को चण्डिकाकुल के किसी भी सदस्य के साथ संवाद करना है। श्रद्धावान के मन की भावना, विचार या वो जो कुछ कहना चाहता है वो उस सदस्य के समक्ष कह सकता है। पहले बापू श्रीहरिगुरुग्राम में प्रवचन से पूर्व, “सर्वमंगलमांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि

॥ हरि ॐ॥ कल श्रीहरिगुरुग्राम में हुए प्रवचन में, श्रीअनिरुद्धजी ने भारत में हाल ही में हुईं कुछ घटनाओं पर भाष्य किया; जिन घटनाओं के कारण सारा भारत हिल गया था, दहल गया था| हर एक समझदार और संवेदनशील भारतीय नागरिक इन घटनाओं  से व्यथित हो गया| बापु ने अपने इस प्रवचन में अपने सभी श्रद्धावान मित्रों को एक आश्‍वासक दिलासा दिया| बापु के इस प्रवचन का महत्त्वपूर्ण ‘आश्‍वासक’ भाग

बापूजी द्वारा श्रद्धावानानों के लिए नववर्ष की सौगात - मातृवात्सल्य उपनिषद (New year gift to Shraddhavan-Matruvatsalya Upanishad)

New year gift to Shraddhavan-Matruvatsalya Upanishad ॥ हरि ॐ ॥   दीवाली से पहलेवाले गुरूवार के प्रवचन में बापूजी ने कहा था कि दत्तजयंतीके दिन मातृवात्सल्य उपनिषद उपलब्ध होगा। तब बापूजी ने उपनिषद के बारेमें कहा था कि, “यह उपनिषद हर एक के लिए उस के जीवन की, मन की कमतरता के लिए उसके दुर्गुणोंके लिए, प्रत्येक पुण्य के लिए, प्रत्येक पाप के लिए, उसके पूर्व एवं इस जीवन के