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Aniruddha bapu, personality and individuality

परम पूज्य सद्‌गुरु श्री अनिरुद्ध बापुजी ने गुरूवार १६ जनवरी २०१४ के हिंदी प्रवचन में अपनापन यह जताने की बात नहीं है, बल्कि महसूस करने की बात है । सद्गुरुतत्त्व के प्रति अपनापन जताने के बजाय अपनापन महसूस करना आवश्यक है और इसके लिए सद्गुरु का तुम्हारे प्रति रहने वाला जो अपनापन है, उसे महसूस करो, यह बात स्पष्ट की, जो आप इस व्हिडियो में देख सकते हैं l ( Feel

सद्गुरु अनिरुद्ध बापू की उपासना

सभी सब श्रद्धावान जानते ही हैं कि परमपूज्य सद्गुरु बापू पिछले ३ गुरुवार श्रीहरिगुरुग्राम में प्रवचन के लिए नहीं आए हैं। निरंतर ३ गुरुवार बापू का दर्शन न होने के कारण कई श्रद्धावानों ने आस्था और प्रेम से बापू के बारे में जानना चाहा। उन सभी श्रद्धावानों को मैं यह बताना चाहता हूँ कि बापू अपनी बहुत ही कठोर उपासना में व्यस्त हैं तथा अभी कुछ और समय तक यह उपासना जारी रहेगी। इस उपासना की वजह

त्रिविक्रम जल पर आधारित परमपूज्य बापू का प्रवचन

गुरुवार, 6 मार्च 2014 को परमपूज्य बापू ने ‘ त्रिविक्रम जल ’ इस विषय पर प्रवचन किया। हिन्दी प्रवचन में भी बापू ने इस सन्दर्भ में संक्षेप में जानकारी दी। इस ‘त्रिविक्रम जल’ विषय पर आधारित मराठी प्रवचन का हिन्दी भाषान्तर यहाँ पर संक्षेप में दे रहा हूँ, जिससे कि सभी बहुभाषिक श्रद्धावानों के लिए इस विषय को समझने में आसानी होगी। — ‘हरि ॐ’। ‘श्रीगुरुक्षेत्रम् मंत्र’ यह हम सब लोगों

ऑनलाईन हिन्दी eWeekly (e साप्ताहिक) के शुभारंभ के बारे में (Online e weekly Ambadnya Pratyaksha)

मैनें अपने कल के पोस्ट में प्रत्यक्ष जैसे एक eWeekly का ’महाशिवरात्री’ के शुभ अवसर पर प्रकाशित होने की घोषणा की थी l पर परमपूज्य बापू के निर्देश से यह eWeekly कल के बदले अगले सप्ताह, याने गुरूवार दिनांक, ६ मार्च २०१४ के दिन प्रकाशित किया जाएगा l ll हरि ॐ ll  ll श्रीराम ll  ll अंबज्ञ ll —————————————————————————————————————————————————————- In my yesterday’s Hindi blogpost I had mentioned that we are launching a Pratyaksha-like eWeekly in

ऑनलाईन हिन्दी eWeekly (e साप्ताहिक) का शुभारंभ

आप यह जानते ही होंगे कि दत्तगुरु पब्लिकेशन्स के द्वारा कृपासिन्धु यह मासिक पत्रिका मराठी, हिन्दी, गुजराती एवं अंग्रेजी इन चार भाषाओं में प्रकाशित की जाती है। अब दत्तगुरु पब्लिकेशन्स प्रत्यक्ष को eWeekly स्वरूप में प्रकाशित करने जा रहा है और यह प्रकाशन लोटस पब्लिकेशन्स प्रायव्हेट लिमिटेड की सहायता से हो रहा है। सभी श्रद्धावान जानते हैं कि दैनिक ‘प्रत्यक्ष’ का यह नौवाँ वर्ष चल रहा है। यह समाचारपत्र मुख्य रूप से मराठी में

सद्गुरु अनिरुद्ध बापु द्वारा श्री त्रिविक्रम का महत्वपूर्ण मंत्र विवेचन - Important Mantra of Shree Trivikram - Sadguru Aniruddha Bapu

ll हरि ॐ ll सद्गुरु अनिरुद्ध बापु गुरुवार दि. ०६-०३-२०१४ से श्रीत्रिविक्रम के एक महत्त्वपूर्ण मन्त्र के बारे में विवेचन करनेवाले हैं l वह मन्त्र है- ॐ त्रातारं इन्द्रं अवितारं इन्द्रं हवे हवे सुहवं शूरं इन्द्रम्। ह्वयामि शक्रं पुरुहूतं इन्द्रं स्वस्ति न: मघवा धातु इन्द्र:॥ इस दिन श्रद्धावान अपने साथ ३० मि.लि. जल ले आकर सद्गुरु अनिरुद्ध बापू के मार्गदर्शन के अनुसार उसका जाप करके उसे इस मन्त्र के द्वारा भारित

बा पु ने पिछले गुरुवार को यानी २३-०१-२०१४ को ‘सर्वमंगलमांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यंबके गौरि नारायणि नमोऽस्तुते ।।’ इस ‘दुर्गा मंत्र’ के अल्गोरिदम पर प्रवचन किया । इस प्रवचन का हिन्दी अनुवाद ब्लॉग पर विस्तृत रूप में अपलोड किया गया है । इस प्रवचन के दो महत्त्वपूर्ण मुद्दें थे- १) यह अल्गोरिदम निश्चित रूप से क्या है और २) इस अल्गोरिदम के विरोध में महिषासुर किस तरह कार्य करता है

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ॐ   रामवरदायिनी श्रीमहिषासुरमर्दिन्यै नम:। इस महिषासुरमर्दिनी ने ही, इस चण्डिका ने ही, इस दुर्गा ने ही सब कुछ उत्पन्न किया। प्रथम उत्पन्न होनेवाली या सर्वप्रथम अभिव्यक्त होनेवाली वह एक ही है। फिर वह उन तीन पुत्रों को जन्म देती है और फिर सबकुछ शुरू होता है । हमने बहुत बार देखा, हमें यह भी समझ में आया की यह एकमात्र ऐसी है, जिसका प्राथमिक नाम, पहला नाम ही उसका

श्रीसाईसच्चरित पंचशील परिक्षा - पारितोषिक वितरण समारोह (Shree Saisatcharit Panchshil Exam)

गत इतवार अनेक श्रध्दावानों को एक बहुत ही अनोखे समारोह में शामिल होने अवसर मिला। मैं भी उस में शामिल था। यह समारोह था श्रीसाईसच्चरित पर आधारित पंचशील परिक्षा के पारितोषिक वितरण का जिस में श्रीसाईसच्चरित पंचशील परिक्षा (Shree Saisatcharit Panchshil Exam) में Distinction प्राप्त एवं Rank Holder परिक्षार्थियों को पारितोषिक देकर सम्मानित किया गया। इस समारोह में इन परिक्षार्थियों का अभिनंदन करने हेतु श्रीहरिगुरुग्राम में ३००० से अधिक श्रध्दावान

कहे साई वही हुआ धन्य धन्य| हुआ जो मेरे चरणों में अनन्य || (Sai the Guiding Spirit Saisatcharit)

पिछले ड़ेढ दो साल से सद्गुरु श्रीअनिरुद्धजी ‘श्रीसाईसच्चरित’ (Shree Saisatcharit) पर हिन्दी में प्रवचन कर रहे हैं। इससे पहले बापु ने श्रीसाईसच्चरित पर आधारित ‘पंचशील परीक्षा’ (Panchshil Exam) की शुरुआत की और उन परीक्षाओं के प्रॅक्टिकल्स के लेक्चर्स भी लिये। उस समय हम सब को श्रीसाईसच्चरित नये से समझ में आया। 11 फरवरी 1999 में बापु ने पंचशील परीक्षा क्यों देनी चाहिए, यह हमें समझाया। बापु कहते हैं, ‘‘हम सबको