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ब्लॉग का परिचय

अपने विचार, राय प्रस्तुत करना और बडे पैमाने पर लोगों तक पहुँचाने का असरदार, किफायती और सबसे तेज रास्ता याने की ब्लॉग | विधायक कार्य पुरी तरह से पूर्णत्व की ओर ले जाने के लिए जरूरत होती है ऐसेही प्रभावी और सामान्य जब तक सहजतासें पहुँच पाए ऐसे माध्यम की | इंटरनेट जगत में सर्वोच्च शिखरपर रहनेवाली ‘गुगल’ कंपनी ने बराबर हमारी ‘नस’ पकडकर अपने ‘ब्लॉगर’ यह प्रोडक्ट इंटरनेट मार्केट

सोशल मीडिया

आजकल हम देख ही रहे हैं कि तंत्रज्ञान ने मानवी जीवन को किस तरह व्याप्त किया हुआ है। मोबाईल्स, कॉम्प्युटर्स, लॅपटॉप्स, टॅबलेट्स ऐसे अनगिनत गॅजेट्स के रूप मे यह तंत्रज्ञान कदम कदम पर हमारे संमुख आ जाता है। नयी पीढ़ी तो नये तंत्रज्ञान के साथ झट् से दोस्ती कर लेती है, लेकिन औरों का क्या? क्या वे आधुनिक तंत्रज्ञान के लाभों से वंचित ही रहें? ऐसे सवाल उठते हैं। इन

Happy Diwali to All Shraddhavan Friends

  My dear Shraddhavan friends, On the auspicious occasion of Deepavali I send you my best wishes for a happy & prosperous New Year and pray at the Lotus Feet of Bapu to shower His grace & blessings on each one of you and your families at all times. [divider] मेरे प्रिय श्रद्धावान मित्रों, दीपावलि के इस शुभ पर्व पर मैं तुम सब को शुभेच्छाएँ दे रहा हूँ कि नया

"अनिरुद्ध - प्रेमनो सागर" - सदगुरु श्री अनिरुद्ध बापू के गुणसंकीर्तन एवं सत्संग का अनोखा कार्यक्रम वडोदरा में

हरि ॐ. सदगुरु श्री अनिरुद्ध बापू के गुणसंकीर्तन एवं सत्संग का – “अनिरुद्ध – प्रेमनो सागर” यह अनोखा कार्यक्रम वडोदरा, गुजरात में १ नवम्बर को आयोजित किया गया है। गत कई वर्षों से गुजरात में कई जगहोंपर ‘श्री अनिरुद्ध उपासना केंद्र’ कार्यरत हैं और गुणसंकीर्तन एवं सत्संग का कोई कार्यक्रम वहाँ पर आयोजित किया जाये, ऐसी विनति कई वर्षों से उनकेद्वारा की जारही थी। उन्हीं की विनती पर गौर करके

Durga

  दुर्गे दुर्घट भारी तुजविण संसारी । अनाथनाथे अंबे करुणा विस्तारी ॥ वारी वारी जन्ममरणांतें वारी । हारी पडलो आता संकट निवारी ॥ 1 ॥ जय देवी जय देवी महिषासुरमर्दिनी । सुरवरईश्वरवरदे तारक संजीवनी ॥ धृ ॥ त्रिभुवनभुवनी पाहता तुजऐसी नाही । चारी श्रमले परंतु न बोलवे कांही ॥ साही विवाद करिता पडिले प्रवाही । ते तूं भक्तांलागी पावसि लवलाही॥ जय देवी… प्रसन्नवदने प्रसन्न होसी निजदासा । क्लेशांपासुनि सोडवी तोडी

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हरि ॐ, श्रीराम, अंबज्ञ! पहले हमें अब श्रीसूक्त सुनना है। श्रीसूक्त… वेदों का यह एक अनोखा वरदान है जो इस… हमने उपनिषद् और मातृवात्सल्यविंदानम् में पढ़ा है कि लोपामुद्रा के कारण हमें प्राप्त हुआ है…महालक्ष्मी और उसकी कन्या लक्ष्मी… इस माँ-बेटी का एकसाथ रहनेवाला पूजन, अर्चन, स्तोत्र, स्तवन… सब कुछ… यानी यह ‘श्रीसूक्तम्’। तो आज पहले… स़िर्फ आज से हमें शुरुआत करनी है। ‘श्रीसूक्तम्’ का पाठ हमारे महाधर्मवर्मन् करनेवाले हैं।

परग्रहवासी अनुनाकीयोंपर  डॉ. अनिरुद्ध जोशी द्वारा लिखित अग्रलेखमाला

वाचकों को यह जानकारी देते हुए हमें खुशी हो रही है कि ’eसाप्ताहिक अंबज्ञ प्रत्यक्ष’ डॉ. अनिरुद्ध धैर्यधर जोशी द्वारा लिखित तुलसीपत्र अग्रलेखमाला के लेखों के वर्तमान क्रम में परिवर्तन करते हुए अब ७ नवंबर २०१४ से तुलसीपत्र ९९७ से शुरु होनेवाले अग्रलेख प्रकाशित किये जाएंगें। इन अत्यन्त महत्त्वपूर्ण अग्रलेखों में डॉ. अनिरुद्ध धैर्यधर जोशी(सद्‌गुरु अनिरुद्ध बापू) के द्वारा परग्रहवासी अनुनाकीयों के वसुन्धरा पृथ्वी पर हुए आगमन से संबंधित इतिहास के संदर्भ में सविस्तार

स्कंद चिन्हके बारें मे खुलासा (Clarification Of Skanda Chinha)

 स्कंद चिन्हके बारें मे खुलासा (Clarification Of Skanda Chinha)   बापु के अनेक श्रद्धावान मित्र दैनिक प्रत्यक्ष (Pratyaksha) के अग्रलेखों से संबंधित विषयों से जुडी वेबसाईट्स् का इंटरनेट पर अध्ययन कर रहे हैं । यह अध्ययन करते समय कुछ श्रद्धावानों के मन में कौन सा स्कन्दचिन्ह उचित और कौन सी स्कन्दचिन्हसदृश आकृति अनुचित, यह प्रश्न उठ रहा था। इसलिए सभी श्रद्धावान मित्रों की जानकारी के लिए उचित और अनुचित आकृति

सहस्र तुलसीपत्र अर्चन विशेषांक (Sahastra Tulsipatra Visheshank)

दैनिक ‘प्रत्यक्ष’ के कार्यकारी संपादक श्री. अनिरुद्ध धैर्यधर जोशी अर्थात हम सबके चहीते सद्गुरु अनिरुद्ध बापू द्वारा लिखित, संतश्रेष्ठ श्रीतुलसीदासजी के ‘श्रीरामचरितमानस’ लिखित सुन्दरकाण्ड पर आधारित ‘तुलसीपत्र’ नामक अग्रलेखश्रृंखला का 1000वां लेख दि. 05-08-2014 को प्रकाशित हुआ। इस अग्रलेखश्रृंखला द्वारा बापू श्रद्धावानों के जीवन के सभी क्षेत्रों में विकास करने संबंधी मार्गदर्शन कर रहे हैं, दुष्प्रारब्ध से लड़ने की कलाकुशलता सिखा रहे हैं और साथ ही साथ संकटों से समर्थरूप