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परमपूज्य सद्गुरु श्री अनिरुद्धजी द्वारा श्रद्धावानों के लिए तय किए हुए मानदण्ड

३० अगस्त २००९ के रोज़ दैनिक प्रत्यक्ष में छपे हुए अग्रलेख में परमपूज्य सद्गुरु बापूजी ने उन्हें ‘क्या पसंद है और क्या पसंद नहीं है’ यह स्पष्टरूप में कहा था। इस अग्रलेख के जरिए बापूजी ने ९ मानदण्ड दिए थे जो संस्था से जुड़े हुए प्रत्येक कार्यकर्ता के लिए संचालित किए जाते हैं। संस्था के कार्य में सेवा करनेवाले प्रत्येक कार्यकर्ता के लिए यह मानदण्ड हमेशा लागू रहेंगे। इन मानदण्डों के आधार पर प्रत्येक श्रद्धावान को किसी भी अधिकारपद पर

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भारत सर्वाधिक युवाओं का देश बनता जा है। इसी मात्रा में, इस युवा देश में युवाओं के सर्वाधिक पसंदीदा माध्यमवाले सोशल मीडिया का प्रभाव बहुत अधिक मात्रा में बढ़ता जा रहा है। देश में नेटीजन्स की संख्या करोड़ों में बढ़ रही है, ऐसे में कोई भी सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव को रोक नहीं सकेगा।  टेक्नोलॉजी के विकास के साथ साथ अधिकाधिक व्यापक होता हुआ यह माध्यम आज विश्व पर अपना अधिपत्य जमाए हुए है। जीवन के प्रत्येक क्षेत्र

श्रीश्वासम् (Shreeshwasam)

गुरुवार,दिनांक 07-11-2013 के प्रवचन में सद्गुरु श्रीअनिरुद्धजी ने ‘श्रीश्वासम्’ उत्सव के संदर्भ में महत्त्वपूर्ण जानकारी दी। जनवरी 2014 में ‘श्रीश्वासम्’ उत्सव मनाया जायेगा। ‘श्रीश्वासम्’ का मानवी जीवन में रहनेवाला महत्त्व भी बापु ने प्रवचन में बताया। सर्वप्रथम “उत्साह” के संदर्भ में बापु ने कहा, “मानव के प्रत्येक कार्य की, ध्येय की पूर्तता के लिए उत्साह का होना सबसे महत्त्वपूर्ण है। उत्साह मनुष्य के जीवन को गति देते रहता है। किसीके

सप्तमातृका पूजन ( Saptamatruka pujan)

    गुरुवार, दि. २४ अक्तूबर २०१३ के दिन परमपूज्य बापूजी ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण विषय पर प्रवचन किया। प्रत्येक माता-पिता की इच्छा होती है कि अपने बच्चे का जीवन स्वस्थ हो और उसे दीर्घ आयु मिले। इस दृष्टिकोन से सदियों से चली आ रही परंपरा अनुसार घर में बच्चे के जन्म के बाद षष्ठी पूजन किया जाता है।  मगर समय के चलते गलत रूढ़ियाँ पड़ती गईं जिनकी वजह से इस

श्रीसरस्वती व श्रीमहासरस्वती प्रतिमा (Images of Saraswati and Mahasaraswati)

सद्‌गुरु बापूंनी त्यांच्या २२ ऑगस्ट २०१३च्या प्रवचनात सांगितल्याप्रमाणे, श्रीसरस्वती व श्रीमहासरस्वती ह्या दोन्ही प्रतिमा (concept) येथे देत आहे.

अंग्रेजी सुधारने के लिए नन्दाई द्वारा लिखित पुस्तकोंका प्रकाशन

मुझे यकीन है, अब तक आप सबको यह ज्ञात हुआ होगा कि रविवार, दि. २५ अगस्त २०१३ को परमपूज्य बापू, नंदाई और सुचितदादा की उपस्थिति में, ’हॅपी इंग्लिश स्टोरीज’ इस सिरीज के अंतर्गत स्वयं नंदाई के द्वारा लिखे गये ’साई फॉर मी’ इन पुस्तकों के पहले सेट का प्रकाशन एक भव्य प्रकाशन समारोह में हुआ । नन्दाई की आत्मबल क्लास में वरिष्ठ अध्यापिका एवं कार्यकर्ता सेवक के रूप में काम

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    ६ मई २०१० को ’रामराज्य २०२५’ इस संकल्पना पर आधारित परमपूज्य बापु का प्रवचन श्रद्धावानों ने सुना ही है। इस प्रवचन में बापु ने अनेकविध विषयों के बारे में महत्त्वपूर्ण जानकारी दी थी। उनमें एक महत्त्वपूर्ण मुद्दा था- ’अच्छी तरह अंग्रेजी (इंग्लिश) भाषा में बातचीत करना सीखना’। उस समय बापु ने कहा था, “आज अंग्रेजी यह दुनिया के व्यवहार की भाषा बन गयी है। अपनी मातृभाषा पर नाज अवश्य

विश्‍व का रहस्य त्रिविक्रम - π (Pi)

   पिछले कुछ हफ्तोंसें परमपूज्य बापूजीके प्रवचन ’ॐ रामवरदायिनी श्रीमहिषासुरमर्दिन्यै नम:l” इस श्रीअनिरुध्द गुरुक्षेत्रम्‌ मंत्र कें, अंकुरमंत्र भागकें तिसरें पद पर चालू हैंl इस प्रवचन अंतर्गत बापूने हमें परमेश्‍वरी सूत्र (algorithms) और शुभचिन्हों कीं पहचान करा दीl इन सूत्रोंके अंतर्गत बापूने हमें, स्कंदचिन्ह, स्वस्तिक, सृष्टी के सूर्य – चंद्र, दीप, आरती, इत्यादी अनेक algorithms की विस्तृत जानकारी दीl उसके बाद जुलै के महिनें में बापू ने उनके प्रवचन की शुरुआत

गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु: गुरुर्देवो महेश्वर: । गुरुरेव परब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः ॥ श्रीगुरुगीतेमध्ये या श्लोकाद्वारे गुरुमहिमा वर्णिला आहे. वटपौर्णिमा ते गुरुपौर्णिमा या महिन्याभराच्या काळास ‘श्रीगुरुचरणमास’ म्हटले जाते. गुरुपौर्णिमा हा सद्गुरुंच्या ऋणांचे स्मरण करून सद्गुरुचरणी कृतज्ञता व्यक्त करण्याचा दिवस ! गुरुपौर्णिमेच्या पर्वावर सद्गुरुंना गुरुदक्षिणा देण्याची पद्धतही आहे. पण सद्गुरु श्रीअनिरुद्ध तर कुणाकडूनच कधीही कुठल्याही स्वरूपात काहीही स्वीकारत नाहीत. अगदी गुरुपौर्णिमेलाही ते साधी फुलाची पाकळीही स्वीकारत नाहीत. सद्गुरु बापू म्हणतात- “मला जर काही

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२७ जून २०१३ के प्रवचन में बापु के द्वारा विशद की गयी गेहूँ का सत्त्व बनाने की रेसिपी यहाँ पर दी जा रही है।  गेहूँ का सत्त्व बनाने के लिये गेहूँ रात को पानी में भिगोकर रख दीजिए। अगले दिन यह पानी निकालकर गेहूँ को नये पानी में भिगोइए। तीसरे दिन यह पानी निकालकर गेहूँ को पुन: नये पानी में भिगोइए। चौथे दिन गेहूँ में से पानी निकाल दीजिए और इस भिगोये गये गेहूँ

धारी माता का प्रकोप

हाल ही में उत्तराखंड में जलप्रलय हुआ जिसकी वजह से बड़े पैमाने पर मानवहानी तथा वित्तहानी हुई। यह सारी ख़बरें हम समाचार पत्रों में और न्युजचॅनल्स्‌ में देख ही रहें थे। कल प्रवचन के दौरान बापूजी ने इस घटना का उल्लेख किया। इस बात से सम्बंधित लेख आज के दैनिक प्रत्यक्ष में प्रकाशित हुआ है। उसका हिंदी अनुवाद यहॉं दे रहा हूँ। ऐसा माना जाता है कि चारधाम यात्रा करनेवाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा धारा माता करती है।

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अनिरुद्धधाम (Aniruddhadham) हरि: ॐ मंगलवार दिनांक ०७-०५-२०१३ को, अक्कलकोटनिवासी श्री स्वामी समर्थ पुण्यतिथि के पवित्र दिन, प्रथम अनिरुद्धधाम के निर्माणकार्य शुरुआत डुडूळ गाँव, देहू- आळंदी रोड (तालुका हवेली, जिला पुणे) में हुई। परमपूज्य बापुजी के निर्देश के अनुसार महाधर्मवर्मन्‌ डॉ. योगीन्द्रसिंह जोशी और डॉ. सौ. विशाखावीरा जोशी ने कुछ श्रद्धावानों के साथ निर्माणकार्य की शुरुआत होने से पहले कार्यारंभ-पूर्व की जानेवाली उपासना की। इसमें श्री गुरुक्षेत्रम् मन्त्र, ’ॐ गं गणपतये

Sai Niwas Hindi Documentary DVD

Sainiwas Documentary हरी ॐ मित्रों, पिछले गुरूवार को, अर्थात ३१ जनवरी २०१३ को श्रद्धावनों के लिए स्वस्तिक्षेम संवाद के बाद, जो बापूजी के हिंदी प्रवचन के लिए बैठते हैं उनके लिए साईंनिवास डाक्यूमेंट्री (हिन्दी में डबींग की हुई) लगाई गयी थी। चूंकि मूल प्रति की अवधि २ घंटों की है, इसका संक्षिप्त प्रारूप, जिसकी अवधि ४५ मिनटों की है, वह दिखाई गई। उपस्थितों में से बहुतों ने पहले ही मूल मराठी प्रति देखी