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श्रीसाईसच्चरित पंचशील परिक्षा - पारितोषिक वितरण समारोह (Shree Saisatcharit Panchshil Exam)

गत इतवार अनेक श्रध्दावानों को एक बहुत ही अनोखे समारोह में शामिल होने अवसर मिला। मैं भी उस में शामिल था। यह समारोह था श्रीसाईसच्चरित पर आधारित पंचशील परिक्षा के पारितोषिक वितरण का जिस में श्रीसाईसच्चरित पंचशील परिक्षा (Shree Saisatcharit Panchshil Exam) में Distinction प्राप्त एवं Rank Holder परिक्षार्थियों को पारितोषिक देकर सम्मानित किया गया। इस समारोह में इन परिक्षार्थियों का अभिनंदन करने हेतु श्रीहरिगुरुग्राम में ३००० से अधिक श्रध्दावान

कहे साई वही हुआ धन्य धन्य| हुआ जो मेरे चरणों में अनन्य || (Sai the Guiding Spirit Saisatcharit)

पिछले ड़ेढ दो साल से सद्गुरु श्रीअनिरुद्धजी ‘श्रीसाईसच्चरित’ (Shree Saisatcharit) पर हिन्दी में प्रवचन कर रहे हैं। इससे पहले बापु ने श्रीसाईसच्चरित पर आधारित ‘पंचशील परीक्षा’ (Panchshil Exam) की शुरुआत की और उन परीक्षाओं के प्रॅक्टिकल्स के लेक्चर्स भी लिये। उस समय हम सब को श्रीसाईसच्चरित नये से समझ में आया। 11 फरवरी 1999 में बापु ने पंचशील परीक्षा क्यों देनी चाहिए, यह हमें समझाया। बापु कहते हैं, ‘‘हम सबको

ऑनलाईन डोनेशन अभी सभी जगह उपलब्ध

इन दिनों श्रीवर्धमान व्रताधिराज चल रहा है। व्रत के दौरान श्रद्धावान तीर्थ स्थलों पर दर्शन / उपासना हेतु जाते हैं। साथ ही साथ सभी उपासना केन्द्रों पर जानेवाले तथा न जा पानेवाले श्रद्धावान गुरुपूर्णिमा अथवा अनिरुद्ध पूर्णिमा के समय तो सद्गुरु के दर्शन के लिए आते ही हैं। वे श्रद्धावान उन उत्सवों के समय तहेदिल से बापूजी को कुछ न कुछ देना चाहते हैं। मगर सद्गुरु बापू तो व्यक्तिगत तौर पर कभी भी किसी

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आज बड़े अरसे बाद हम आपस में संवाद कर रहे हैं। पिछले कई दिनों से अपने ही दो प्रोजेक्ट्स में अर्थात जेरियाट्रिक इंस्टिट्यूट तथा श्री अनिरुद्ध धाम के कार्यों में व्यस्त था, तत्पश्चात हर वर्ष की भांति मैं बापूजी के साथ गाणगापुर गया था।  आज नववर्ष की पूर्वसंध्या पर मैं आपको अर्थात बापूजी के सभी श्रद्धावान मित्रों को तथ उनके श्रद्धावान परिवारजनों को नववर्ष की अनिरुद्ध शुभकामनाएं देना चाहता हूँ। आनेवाला

परमपूज्य सद्गुरु श्री अनिरुद्धजी द्वारा श्रद्धावानों के लिए तय किए हुए मानदण्ड

३० अगस्त २००९ के रोज़ दैनिक प्रत्यक्ष में छपे हुए अग्रलेख में परमपूज्य सद्गुरु बापूजी ने उन्हें ‘क्या पसंद है और क्या पसंद नहीं है’ यह स्पष्टरूप में कहा था। इस अग्रलेख के जरिए बापूजी ने ९ मानदण्ड दिए थे जो संस्था से जुड़े हुए प्रत्येक कार्यकर्ता के लिए संचालित किए जाते हैं। संस्था के कार्य में सेवा करनेवाले प्रत्येक कार्यकर्ता के लिए यह मानदण्ड हमेशा लागू रहेंगे। इन मानदण्डों के आधार पर प्रत्येक श्रद्धावान को किसी भी अधिकारपद पर

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भारत सर्वाधिक युवाओं का देश बनता जा है। इसी मात्रा में, इस युवा देश में युवाओं के सर्वाधिक पसंदीदा माध्यमवाले सोशल मीडिया का प्रभाव बहुत अधिक मात्रा में बढ़ता जा रहा है। देश में नेटीजन्स की संख्या करोड़ों में बढ़ रही है, ऐसे में कोई भी सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव को रोक नहीं सकेगा।  टेक्नोलॉजी के विकास के साथ साथ अधिकाधिक व्यापक होता हुआ यह माध्यम आज विश्व पर अपना अधिपत्य जमाए हुए है। जीवन के प्रत्येक क्षेत्र

श्रीश्वासम् (Shreeshwasam)

गुरुवार,दिनांक 07-11-2013 के प्रवचन में सद्गुरु श्रीअनिरुद्धजी ने ‘श्रीश्वासम्’ उत्सव के संदर्भ में महत्त्वपूर्ण जानकारी दी। जनवरी 2014 में ‘श्रीश्वासम्’ उत्सव मनाया जायेगा। ‘श्रीश्वासम्’ का मानवी जीवन में रहनेवाला महत्त्व भी बापु ने प्रवचन में बताया। सर्वप्रथम “उत्साह” के संदर्भ में बापु ने कहा, “मानव के प्रत्येक कार्य की, ध्येय की पूर्तता के लिए उत्साह का होना सबसे महत्त्वपूर्ण है। उत्साह मनुष्य के जीवन को गति देते रहता है। किसीके

सप्तमातृका पूजन ( Saptamatruka pujan)

    गुरुवार, दि. २४ अक्तूबर २०१३ के दिन परमपूज्य बापूजी ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण विषय पर प्रवचन किया। प्रत्येक माता-पिता की इच्छा होती है कि अपने बच्चे का जीवन स्वस्थ हो और उसे दीर्घ आयु मिले। इस दृष्टिकोन से सदियों से चली आ रही परंपरा अनुसार घर में बच्चे के जन्म के बाद षष्ठी पूजन किया जाता है।  मगर समय के चलते गलत रूढ़ियाँ पड़ती गईं जिनकी वजह से इस

श्रीसरस्वती व श्रीमहासरस्वती प्रतिमा (Images of Saraswati and Mahasaraswati)

सद्‌गुरु बापूंनी त्यांच्या २२ ऑगस्ट २०१३च्या प्रवचनात सांगितल्याप्रमाणे, श्रीसरस्वती व श्रीमहासरस्वती ह्या दोन्ही प्रतिमा (concept) येथे देत आहे.

अंग्रेजी सुधारने के लिए नन्दाई द्वारा लिखित पुस्तकोंका प्रकाशन

मुझे यकीन है, अब तक आप सबको यह ज्ञात हुआ होगा कि रविवार, दि. २५ अगस्त २०१३ को परमपूज्य बापू, नंदाई और सुचितदादा की उपस्थिति में, ’हॅपी इंग्लिश स्टोरीज’ इस सिरीज के अंतर्गत स्वयं नंदाई के द्वारा लिखे गये ’साई फॉर मी’ इन पुस्तकों के पहले सेट का प्रकाशन एक भव्य प्रकाशन समारोह में हुआ । नन्दाई की आत्मबल क्लास में वरिष्ठ अध्यापिका एवं कार्यकर्ता सेवक के रूप में काम

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    ६ मई २०१० को ’रामराज्य २०२५’ इस संकल्पना पर आधारित परमपूज्य बापु का प्रवचन श्रद्धावानों ने सुना ही है। इस प्रवचन में बापु ने अनेकविध विषयों के बारे में महत्त्वपूर्ण जानकारी दी थी। उनमें एक महत्त्वपूर्ण मुद्दा था- ’अच्छी तरह अंग्रेजी (इंग्लिश) भाषा में बातचीत करना सीखना’। उस समय बापु ने कहा था, “आज अंग्रेजी यह दुनिया के व्यवहार की भाषा बन गयी है। अपनी मातृभाषा पर नाज अवश्य

विश्‍व का रहस्य त्रिविक्रम - π (Pi)

   पिछले कुछ हफ्तोंसें परमपूज्य बापूजीके प्रवचन ’ॐ रामवरदायिनी श्रीमहिषासुरमर्दिन्यै नम:l” इस श्रीअनिरुध्द गुरुक्षेत्रम्‌ मंत्र कें, अंकुरमंत्र भागकें तिसरें पद पर चालू हैंl इस प्रवचन अंतर्गत बापूने हमें परमेश्‍वरी सूत्र (algorithms) और शुभचिन्हों कीं पहचान करा दीl इन सूत्रोंके अंतर्गत बापूने हमें, स्कंदचिन्ह, स्वस्तिक, सृष्टी के सूर्य – चंद्र, दीप, आरती, इत्यादी अनेक algorithms की विस्तृत जानकारी दीl उसके बाद जुलै के महिनें में बापू ने उनके प्रवचन की शुरुआत

गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु: गुरुर्देवो महेश्वर: । गुरुरेव परब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः ॥ श्रीगुरुगीतेमध्ये या श्लोकाद्वारे गुरुमहिमा वर्णिला आहे. वटपौर्णिमा ते गुरुपौर्णिमा या महिन्याभराच्या काळास ‘श्रीगुरुचरणमास’ म्हटले जाते. गुरुपौर्णिमा हा सद्गुरुंच्या ऋणांचे स्मरण करून सद्गुरुचरणी कृतज्ञता व्यक्त करण्याचा दिवस ! गुरुपौर्णिमेच्या पर्वावर सद्गुरुंना गुरुदक्षिणा देण्याची पद्धतही आहे. पण सद्गुरु श्रीअनिरुद्ध तर कुणाकडूनच कधीही कुठल्याही स्वरूपात काहीही स्वीकारत नाहीत. अगदी गुरुपौर्णिमेलाही ते साधी फुलाची पाकळीही स्वीकारत नाहीत. सद्गुरु बापू म्हणतात- “मला जर काही

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२७ जून २०१३ के प्रवचन में बापु के द्वारा विशद की गयी गेहूँ का सत्त्व बनाने की रेसिपी यहाँ पर दी जा रही है।  गेहूँ का सत्त्व बनाने के लिये गेहूँ रात को पानी में भिगोकर रख दीजिए। अगले दिन यह पानी निकालकर गेहूँ को नये पानी में भिगोइए। तीसरे दिन यह पानी निकालकर गेहूँ को पुन: नये पानी में भिगोइए। चौथे दिन गेहूँ में से पानी निकाल दीजिए और इस भिगोये गये गेहूँ