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"अनिरुद्ध - प्रेमनो सागर" - सदगुरु श्री अनिरुद्ध बापू के गुणसंकीर्तन एवं सत्संग का अनोखा कार्यक्रम वडोदरा में

हरि ॐ. सदगुरु श्री अनिरुद्ध बापू के गुणसंकीर्तन एवं सत्संग का – “अनिरुद्ध – प्रेमनो सागर” यह अनोखा कार्यक्रम वडोदरा, गुजरात में १ नवम्बर को आयोजित किया गया है। गत कई वर्षों से गुजरात में कई जगहोंपर ‘श्री अनिरुद्ध उपासना केंद्र’ कार्यरत हैं और गुणसंकीर्तन एवं सत्संग का कोई कार्यक्रम वहाँ पर आयोजित किया जाये, ऐसी विनति कई वर्षों से उनकेद्वारा की जारही थी। उन्हीं की विनती पर गौर करके

Durga

  दुर्गे दुर्घट भारी तुजविण संसारी । अनाथनाथे अंबे करुणा विस्तारी ॥ वारी वारी जन्ममरणांतें वारी । हारी पडलो आता संकट निवारी ॥ 1 ॥ जय देवी जय देवी महिषासुरमर्दिनी । सुरवरईश्वरवरदे तारक संजीवनी ॥ धृ ॥ त्रिभुवनभुवनी पाहता तुजऐसी नाही । चारी श्रमले परंतु न बोलवे कांही ॥ साही विवाद करिता पडिले प्रवाही । ते तूं भक्तांलागी पावसि लवलाही॥ जय देवी… प्रसन्नवदने प्रसन्न होसी निजदासा । क्लेशांपासुनि सोडवी तोडी

Let us Relive the Joy - 3

I am sure you would be waiting for the next set of photographs of some old memories of Bapu. I am hereby attaching a few more to add to this collection. ll  Hari Om  ll    ll  Shriram  ll    ll  Ambadnya  ll

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हरि ॐ, श्रीराम, अंबज्ञ! पहले हमें अब श्रीसूक्त सुनना है। श्रीसूक्त… वेदों का यह एक अनोखा वरदान है जो इस… हमने उपनिषद् और मातृवात्सल्यविंदानम् में पढ़ा है कि लोपामुद्रा के कारण हमें प्राप्त हुआ है…महालक्ष्मी और उसकी कन्या लक्ष्मी… इस माँ-बेटी का एकसाथ रहनेवाला पूजन, अर्चन, स्तोत्र, स्तवन… सब कुछ… यानी यह ‘श्रीसूक्तम्’। तो आज पहले… स़िर्फ आज से हमें शुरुआत करनी है। ‘श्रीसूक्तम्’ का पाठ हमारे महाधर्मवर्मन् करनेवाले हैं।

परग्रहवासी अनुनाकीयोंपर  डॉ. अनिरुद्ध जोशी द्वारा लिखित अग्रलेखमाला

वाचकों को यह जानकारी देते हुए हमें खुशी हो रही है कि ’eसाप्ताहिक अंबज्ञ प्रत्यक्ष’ डॉ. अनिरुद्ध धैर्यधर जोशी द्वारा लिखित तुलसीपत्र अग्रलेखमाला के लेखों के वर्तमान क्रम में परिवर्तन करते हुए अब ७ नवंबर २०१४ से तुलसीपत्र ९९७ से शुरु होनेवाले अग्रलेख प्रकाशित किये जाएंगें। इन अत्यन्त महत्त्वपूर्ण अग्रलेखों में डॉ. अनिरुद्ध धैर्यधर जोशी(सद्‌गुरु अनिरुद्ध बापू) के द्वारा परग्रहवासी अनुनाकीयों के वसुन्धरा पृथ्वी पर हुए आगमन से संबंधित इतिहास के संदर्भ में सविस्तार

स्कंद चिन्हके बारें मे खुलासा (Clarification Of Skanda Chinha)

 स्कंद चिन्हके बारें मे खुलासा (Clarification Of Skanda Chinha)   बापु के अनेक श्रद्धावान मित्र दैनिक प्रत्यक्ष (Pratyaksha) के अग्रलेखों से संबंधित विषयों से जुडी वेबसाईट्स् का इंटरनेट पर अध्ययन कर रहे हैं । यह अध्ययन करते समय कुछ श्रद्धावानों के मन में कौन सा स्कन्दचिन्ह उचित और कौन सी स्कन्दचिन्हसदृश आकृति अनुचित, यह प्रश्न उठ रहा था। इसलिए सभी श्रद्धावान मित्रों की जानकारी के लिए उचित और अनुचित आकृति

सहस्र तुलसीपत्र अर्चन विशेषांक (Sahastra Tulsipatra Visheshank)

दैनिक ‘प्रत्यक्ष’ के कार्यकारी संपादक श्री. अनिरुद्ध धैर्यधर जोशी अर्थात हम सबके चहीते सद्गुरु अनिरुद्ध बापू द्वारा लिखित, संतश्रेष्ठ श्रीतुलसीदासजी के ‘श्रीरामचरितमानस’ लिखित सुन्दरकाण्ड पर आधारित ‘तुलसीपत्र’ नामक अग्रलेखश्रृंखला का 1000वां लेख दि. 05-08-2014 को प्रकाशित हुआ। इस अग्रलेखश्रृंखला द्वारा बापू श्रद्धावानों के जीवन के सभी क्षेत्रों में विकास करने संबंधी मार्गदर्शन कर रहे हैं, दुष्प्रारब्ध से लड़ने की कलाकुशलता सिखा रहे हैं और साथ ही साथ संकटों से समर्थरूप

Aniruddha bapu, personality and individuality

परम पूज्य सद्‌गुरु श्री अनिरुद्ध बापुजी ने गुरूवार १६ जनवरी २०१४ के हिंदी प्रवचन में अपनापन यह जताने की बात नहीं है, बल्कि महसूस करने की बात है । सद्गुरुतत्त्व के प्रति अपनापन जताने के बजाय अपनापन महसूस करना आवश्यक है और इसके लिए सद्गुरु का तुम्हारे प्रति रहने वाला जो अपनापन है, उसे महसूस करो, यह बात स्पष्ट की, जो आप इस व्हिडियो में देख सकते हैं l ( Feel

सद्गुरु अनिरुद्ध बापू की उपासना

सभी सब श्रद्धावान जानते ही हैं कि परमपूज्य सद्गुरु बापू पिछले ३ गुरुवार श्रीहरिगुरुग्राम में प्रवचन के लिए नहीं आए हैं। निरंतर ३ गुरुवार बापू का दर्शन न होने के कारण कई श्रद्धावानों ने आस्था और प्रेम से बापू के बारे में जानना चाहा। उन सभी श्रद्धावानों को मैं यह बताना चाहता हूँ कि बापू अपनी बहुत ही कठोर उपासना में व्यस्त हैं तथा अभी कुछ और समय तक यह उपासना जारी रहेगी। इस उपासना की वजह

त्रिविक्रम जल पर आधारित परमपूज्य बापू का प्रवचन

गुरुवार, 6 मार्च 2014 को परमपूज्य बापू ने ‘ त्रिविक्रम जल ’ इस विषय पर प्रवचन किया। हिन्दी प्रवचन में भी बापू ने इस सन्दर्भ में संक्षेप में जानकारी दी। इस ‘त्रिविक्रम जल’ विषय पर आधारित मराठी प्रवचन का हिन्दी भाषान्तर यहाँ पर संक्षेप में दे रहा हूँ, जिससे कि सभी बहुभाषिक श्रद्धावानों के लिए इस विषय को समझने में आसानी होगी। — ‘हरि ॐ’। ‘श्रीगुरुक्षेत्रम् मंत्र’ यह हम सब लोगों

ऑनलाईन हिन्दी eWeekly (e साप्ताहिक) के शुभारंभ के बारे में (Online e weekly Ambadnya Pratyaksha)

मैनें अपने कल के पोस्ट में प्रत्यक्ष जैसे एक eWeekly का ’महाशिवरात्री’ के शुभ अवसर पर प्रकाशित होने की घोषणा की थी l पर परमपूज्य बापू के निर्देश से यह eWeekly कल के बदले अगले सप्ताह, याने गुरूवार दिनांक, ६ मार्च २०१४ के दिन प्रकाशित किया जाएगा l ll हरि ॐ ll  ll श्रीराम ll  ll अंबज्ञ ll —————————————————————————————————————————————————————- In my yesterday’s Hindi blogpost I had mentioned that we are launching a Pratyaksha-like eWeekly in

ऑनलाईन हिन्दी eWeekly (e साप्ताहिक) का शुभारंभ

आप यह जानते ही होंगे कि दत्तगुरु पब्लिकेशन्स के द्वारा कृपासिन्धु यह मासिक पत्रिका मराठी, हिन्दी, गुजराती एवं अंग्रेजी इन चार भाषाओं में प्रकाशित की जाती है। अब दत्तगुरु पब्लिकेशन्स प्रत्यक्ष को eWeekly स्वरूप में प्रकाशित करने जा रहा है और यह प्रकाशन लोटस पब्लिकेशन्स प्रायव्हेट लिमिटेड की सहायता से हो रहा है। सभी श्रद्धावान जानते हैं कि दैनिक ‘प्रत्यक्ष’ का यह नौवाँ वर्ष चल रहा है। यह समाचारपत्र मुख्य रूप से मराठी में

सद्गुरु अनिरुद्ध बापु द्वारा श्री त्रिविक्रम का महत्वपूर्ण मंत्र विवेचन - Important Mantra of Shree Trivikram - Sadguru Aniruddha Bapu

ll हरि ॐ ll सद्गुरु अनिरुद्ध बापु गुरुवार दि. ०६-०३-२०१४ से श्रीत्रिविक्रम के एक महत्त्वपूर्ण मन्त्र के बारे में विवेचन करनेवाले हैं l वह मन्त्र है- ॐ त्रातारं इन्द्रं अवितारं इन्द्रं हवे हवे सुहवं शूरं इन्द्रम्। ह्वयामि शक्रं पुरुहूतं इन्द्रं स्वस्ति न: मघवा धातु इन्द्र:॥ इस दिन श्रद्धावान अपने साथ ३० मि.लि. जल ले आकर सद्गुरु अनिरुद्ध बापू के मार्गदर्शन के अनुसार उसका जाप करके उसे इस मन्त्र के द्वारा भारित

बा पु ने पिछले गुरुवार को यानी २३-०१-२०१४ को ‘सर्वमंगलमांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यंबके गौरि नारायणि नमोऽस्तुते ।।’ इस ‘दुर्गा मंत्र’ के अल्गोरिदम पर प्रवचन किया । इस प्रवचन का हिन्दी अनुवाद ब्लॉग पर विस्तृत रूप में अपलोड किया गया है । इस प्रवचन के दो महत्त्वपूर्ण मुद्दें थे- १) यह अल्गोरिदम निश्चित रूप से क्या है और २) इस अल्गोरिदम के विरोध में महिषासुर किस तरह कार्य करता है

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ॐ   रामवरदायिनी श्रीमहिषासुरमर्दिन्यै नम:। इस महिषासुरमर्दिनी ने ही, इस चण्डिका ने ही, इस दुर्गा ने ही सब कुछ उत्पन्न किया। प्रथम उत्पन्न होनेवाली या सर्वप्रथम अभिव्यक्त होनेवाली वह एक ही है। फिर वह उन तीन पुत्रों को जन्म देती है और फिर सबकुछ शुरू होता है । हमने बहुत बार देखा, हमें यह भी समझ में आया की यह एकमात्र ऐसी है, जिसका प्राथमिक नाम, पहला नाम ही उसका