Hindi

सुंदरकांड पठण उत्सव - १७ मई से २१ मई २०१६

संतश्रेष्ठ श्री तुलसीदास जी विरचित ‘श्रीरामचरितमानस’ यह ग्रंथ भारत भर के श्रद्धावान-जगत् में बड़ी श्रद्धा के साथ पढ़ा जाता है। इस ग्रन्थ के ‘सुंदरकांड’ का श्रद्धावानों के जीवन में बहुत ही महत्त्वपूर्ण स्थान है। सद्गुरु श्री अनिरुद्ध जी को भी ‘सुंदरकांड’ अत्यधिक प्रिय है।  सीतामैया की खोज करने हनुमान जी के साथ निकला वानरसमूह सागरतट तक पहुँच जाता है, यहाँ से सुन्दरकांड का प्रारंभ होता है। उसके बाद हनुमान जी

आक्रमक जापान - भाग ४

आज भी इस आक्रमकता की छाया से दोनों देश पूर्णरूप से मुक्त नहीं हुए हैं। इसके पश्चात्‌ ऍबे ने प्रधानमंत्री मोदी के जापान दौर के अन्तर्गत लगभग ३५० करोड़ डॉलर्स का निवेश करने की घोषणा की। उसी प्रकार भारत को काफ़ी बड़े पैमाने पर यांत्रिक ज्ञान एवं यांत्रिक ज्ञान पर आधारित सेवा उपलब्ध करवाने के लिए भी जापान ने मान्य किया है। भारत एवं जापान के बीच बढ़ते हुए इस

ई-मेल – भाग ३

ई-मेल सर्च :     भेजे व प्राप्त होनेवाले मेल्स की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जाती हैं। ऐसे में पुराना मेल खोजना हो तो ई-मेल सर्च समय की बर्बादी से बचाता है। इस के दो भाग हैं – बेसिक व एडवान्सड। जी-मेल के होम-पेज पर एक लम्बा चौड़ा सर्च बार होता है। बेसिक सर्च : यदि हमें फेसबुक शब्द वाला ई-मेल ढूंढ़ना हैं – सर्च बार में फेसबुक लिखे। व

आक्रमक जापान - भाग ३

‘सेंकाकू’ टापूसमूहों के चक्कर में हम नहीं पड़ेंगे, ऐसा आरंभिक समय में अमेरिका की ओर से कहा जा रहा था। परन्तु द्वितीय विश्वयुद्ध के पश्चात्‌ जापान के संरक्षण की ज़िम्मेदारी उठाने के लिए हम वचनबद्ध हैं, इस प्रकार के उद्‍गार अमेरिका प्रकट करने लगी। यह चीन के लिए इशारा था। ऍबे की रणनीति यहाँ पर चल गई। परन्तु चीन के साथ मुकाबला करते समय केवल अमेरिका पर निर्भर रहने में

Aggresive-Japan-02-11

आज इन नीतियों को अपयश मिला है ऐसा कहा जाता है। इसीलिए २०१२ के चुनाव में जोरदार यश प्राप्त करनेवाले ऍबे की लोकप्रियता पतन की ओर जा रही है। परन्तु ऍबे ने स्वयं ही मध्यावधी चुनाव करवाने का निर्णय लिया है। इससे उनका अपने यश के प्रति आत्मविश्वास बढ़ता हुआ दिखाई देता हैं। इस चुनाव में ऍबे को पहले के समान यश प्राप्त होगा या नहीं, यह कहा नहीं जा

ई-मेल - भाग २

थीम्स : मूल ई-मेल का इन्टरफ़ेस सफ़ेद होता है । इस में रंग संगति व पृष्ठचित्र बदला जा सकता हैं । सबसे पहले जी-मेल के होम-पेज में आए । अगर चॅट ऑफ करना है, तो उसके बाजूवाले रेडिओ बटन पर क्लिक करें । इसके बाद सेव्ह चेंजेस्का बटन गहरा होगा वहाँ क्लिक करे । अब होम-पेज पर गुगल हँगआऊटस् बाँए निचले कोने में दिखना बंद हो जाएगा । यहाँ चॅट ऑन

फ़ायरचॅट

आज अगर कोई हमसे ये कहे कि बिना इंटरनेट का इस्तेमाल किये या फ़िर बिना मोबाइल नेटवर्क का इस्तेमाल किये हम लोग अपने मोबाइल फ़ोन से कम्युनिकेट कर सकते हैं, मेसेजेस भेज सकते हैं! तो हमे क्या लगेगा? हमे इस बात बिलकुल विश्वास नही होगा| लेकिन आज हमे एक ऐसा ऍप देखना हैं, जो कि बिना इंटरनेट के और बिना मोबाइल फ़ोन नेटवर्क कव्हरेज के भी चलता रहता हैं, और

आक्रमक जापान - भाग १

जापान के हिरोशिमा एवं नागासाकी पर अमेरिका द्वारा अणुबॉम्ब डालने के पश्चात्‌ जापानने शरणागति स्वीकार की और द्वितीय महायुद्ध का अंत हुआ। परन्तु जापान पर होनेवाले अणुबॉम्ब के हमले को मात्र कोई भी भूला न सका। अमेरिका एवं सोवियत रशिया ये द्वितीय महायुद्ध के (जेता) परस्पर देशों के बीच शीतयुद्ध भड़क उठा। दोनों ही महासत्ताओं के तड़ाखे में दुनिया को कितनी ही बार खाक कर सकनेवाले अणुबॉम्ब एवं इसके पश्चात्‌

ई-मेल – भाग १

संदेशो के लेनदेन पर पहले भी संसार चलता था, आज भी चल रहा है, ओर आगे भी चलता रहेगा। संदेश का समय रहते पहुँचना बहुत आवश्यक है। यद्यपि प्राचीन व आधुनिक संदेश माध्यमों में काफी अन्तर हैं तथापि मूल संकल्पना वहीं हैं। प्राचीन काल में संदेश वहन का कार्य राजा महाराजा के दूत किया करते थे। जिस में बहुत समय लगता था। धीरे-धीरे समय के साथ-साथ यातायात के साधनों में

यू टयूब - भाग ३

हमारे द्वारा अपलोड किए गए व्हिडिओ को कैसे देखना है? हमारे मन में सहज ही यह बात आ चुकी होगी, हम जो व्हिडिओ अपलोड करते हैं, उसकी लिस्ट (सूची) हमें कहाँ मिलेगी? इसके लिए ‘व्हिडिओ मॅनेजर’ यह विकल्प यू-टयुब ने उपलब्ध करवा दिया है। इस के माध्यम से हम यू-टयुब पर रखे गए अपने व्हिडिओ के सेटिंग भी एडिट कर सकते हैं। व्हिडिओ मॅनेजर : १) हमने यह तो देखा

Smriti Irani

‘जेएनयू के विवाद के कारण देश की प्रतिमा को ठेस पहुँची है। इसका पर्यटन क्षेत्र पर विपरित परिणाम हुआ है’ ऐसा खेद केंद्रीय पर्यटन राज्यमंत्री महेश शर्मा ने ज़ाहिर किया है। देश की प्रतिमा को ठेस पहुँचानेवाली जवाहरलाल नेहरू युनिव्हर्सिटी का विवाद निश्चित रूप में कब और कैसे शुरू हुआ इसका विस्मरण ही हो जाये, इतनी तेज़ी से घटनाचक्र घूमने लगा है। जेएनयू’ मसले के बारे में अधिक जानकारी के

JNU

सन २०१४ के अक्तूबर महीने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमरीका के दौरे पर गये थे। वह नवरात्रि का दौर था और प्रधानमंत्री मोदी नवरात्रि के दौरान अनशन रखते है, इसलिए अमरीका में दी गयी दावत में भारतीय प्रधानमंत्री के लिए विशेष व्यवस्था की गयी थी, इसकी जानकारी प्रसारमाध्यमों द्वारा दी जा रही थी। लेकिन इसके बाद ‘जेएनयू’ में ‘महिषासुर शहादत दिन’ यानी महिषासुर का बलिदान दिवस मनाया गया। महिषासुर यह

JNU, जेएनयू

‘जेएनयू’ में चल रहे देशद्रोही कारनामों के पीछे ‘ज़मात-उल-दवा’ का प्रमुख हफ़ीज़ सईद का हाथ है, ऐसा केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंग ने कहा था। सईद के ट्वीटर अकाऊंट पर से ‘जेएनयू’ में चल रहे भारतविरोधी प्रदर्शनों का समर्थन किया गया था। साथ ही, पाक़िस्तान सरकार भी ‘जेएनयू’ के इन प्रदर्शनों की सहायता करें, ऐसी माँग सईद ने इस ट्वीटर अकाऊंट के ज़रिये की थी। लेकिन यह ट्वीटर अकाऊंट हफ़ीज़ सईद

Smriti Irani

केंद्रीय मनुष्यबलविकास मंत्री स्मृती इराणी ने ‘जेएनयू’ के सिलसिले में संसद में उपस्थित किये गए प्रश्नों का बहुत ही प्रभावी रूप से जवाब दिया। अफ़ज़ल गुरु को बचाव का पूरा मौक़ा दिया जाने के बाद, सर्वोच्च न्यायालय ने उसे फ़ाँसी की सज़ा सुनायी। उसके बाद उसे बार बार माफ़ी के लिए आवेदन करने का भी मौक़ा दिया गया। उसके बाद ही, उसे सुनायी गयी फ़ाँसी की सज़ा पर अमल किया

सीआरपीएफ़ के जवान शहीद होने पर ‘जेएनयू’ में जल्लोष

६ अप्रैल २०१० को छत्तिसगढ़ के दांतेवाडा ज़िले में माओवादियों ने बुज़दिल हमला किया और इस हमले में ‘सीआरपीएफ़’ के ७६ जवान शहीद हो गये। इस घटना के बाद देशभर में ग़ुस्से की तीव्र लहर दौड़ उठी थी। वहीं, ‘जेएनयू’ में इस हमले के बाद जल्लोष शुरू हुआ था। ‘इंडिया मुर्दाबाद, माओवाद ज़िंदाबाद’ के नारे यहाँ के कुछ छात्र दे रहे थे। माओवादियों को मिली इस क़ामयाबी के जल्लोष के