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हमारे बापु

१ जनवरी २०१२ को ‘दैनिक प्रत्यक्ष’ के ‘मी पाहिलेला बापू’ इस विशेषांक में प्रकाशित हुआ लेख ‘दादा के सर’ यह मेरा बापु के साथ सन १९८५ में हुआ प्रत्यक्ष परिचय| सुचितदादा जनरल मेडिसिन में एम.डी. करने के लिए डॉ. व्ही. आर. जोशीजी की युनिट में जॉईन हो गये| उस वक़्त बापु यानी डॉ. अनिरुद्ध धैर्यधर जोशी भी उसी युनिट में सिनिअर लेक्चरर थे| वे मेरे दादा को फर्स्ट एम.बी.बी.एस. से

श्रध्दावानांनी सावध राहणे आवश्यक

हरि ॐ, सध्या असे निदर्शनास येत आहे की परमपूज्य सद्‍गुरु अनिरुद्ध बापूंच्या नावाचा वापर करून त्यांच्याबद्दल, त्यांनी सांगितलेल्या उपक्रमांबद्दल आणि त्याचबरोबर त्यांनी सांगितलेल्या उपासनेंबद्दल काही लोक सोशल मिडियाच्या आधारे चुकीची माहिती पसरवत असून त्याद्वारे स्वत:चे महत्त्व वाढविण्याचा प्रयत्न करीत आहेत. तरी सर्व श्रद्धावानांनी कृपया ह्याची नोंद घ्यावी. कोणतीही महत्त्वाची माहिती श्रद्धावानांपर्यंत पोहोचविण्याचे असल्यास, ती अधिकृतरित्या माझ्या ब्लॉगवरून अथवा अधिकृत व्हॉट्‍सअ‍ॅप ग्रुप्सद्वारे पोस्ट केली जाते. तरी इतर कोणतीही व्यक्ती अशी माहिती

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श्रावण महिन्यामध्ये अनेक श्रद्धावान पुरुष “श्रीमहादुर्गेश्वर प्रपत्ती” प्रेमाने करीत असतात. आज दि. ७ ऑगस्ट २०१७ रोजी श्रावण महिन्यातील तिसरा सोमवार असून, आजच्या दिवशी खंडग्रास चंद्रग्रहणाचाही योग आहे. ह्या चंद्रग्रहणाचा पर्वकाळ रात्री १०.५२ ते रात्री १२.४९ असल्यामुळे, आज करावयाची “श्रीमहादुर्गेश्वर प्रपत्ती” सायंकाळी सूर्यास्तानंतर रात्री १०.०० वाजेपर्यंत शक्यतो पूर्ण करावी. श्रावण महीने में कई श्रद्धावान पुरुष “श्रीमहादुर्गेश्वर प्रपत्ती” प्रेमपूर्वक करते हैं। आज दि. ७ अगस्त २०१७ यह श्रावण महीने का तीसरा सोमवार

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हरि ॐ, सद्‍गुरु श्रीअनिरुद्ध बापूंच्या मार्गदर्शनानुसार श्रावण महिन्यातील सोमवारी अनेक श्रद्धावान पुरूष ’ श्री महादुर्गेश्वर प्रपत्ती’ प्रेमाने करीत असतात. ह्या प्रपत्तीमधील दोन महत्त्वाची अंग म्हणजे ’श्री महादुर्गेश्वर प्रपत्ती कथा’ व ’व्दादश – ज्योतिर्लिंग आरती’. काही वयस्कर व बहुभाषिक श्रद्धावानांकडून मिळालेल्या माहितीनुसार, ही कथा वाचण्यास तसेच आरती म्हणण्यास त्यांना अडचणी येत आहेत. बापूंनी सांगितल्याप्रमाणे प्रपत्तीच्या वेळी अशा श्रद्धावानांच्या कुटुंबातील स्त्री व्यक्तीची, उदा. आई, पत्नी, बहीण किंवा इतर कोणत्याही स्त्री व्यक्तीची कथा

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हरि ॐ, मुझे यह बतलाते हुए खुशी हो रही है के ‘मैने देखे हुए बापू’ यह हिन्दी किताब आजसे श्रीहरीगुरुग्राम यहा पर सब श्रद्धावानोके लिए उपलब्ध है। जय जगदम्ब जय दुर्गे   ॥ हरि ॐ ॥ ॥ श्रीराम ॥ ॥ अंबज्ञ ॥

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हरि ॐ ’मी पाहिलेला बापू (’मैने देखे हुए बापू’) इस पुस्तक का प्रकाशन गुरुपूर्णिमा के दिन मराठी और हिन्दी भाषाओं में किया जाना है। अधिक से अधिक श्रद्धावान, डॉ. अनिरुद्ध याने हमारे बापू के व्यक्तित्व के अनेक पहलुओं को इस पुस्तकद्वारा जान पाएंगे। इस बात को ध्यान में रखते हुए इस पुस्तक का अॅडवान्स बुकिंग किया गया। हमें यह कहते हुए बडा हर्ष हो रहा है कि, अब तक तकरीबन

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हरि ॐ इस गुरुवार को यानी दिनांक २२ जून २०१७ को बापू श्रीहरिगुरुग्राम में दर्शन के समय आये थे। लगभग ४ गुरुवारों के बाद बापू को दर्शन के समय आये देखकर श्रद्धावानों को बहुत ही आनंद हुआ। लेकिन उससे भी अधिक आनंद, बापू को चप्पल उतारकर स्टेज पर बैठे देखकर हुआ। साथ ही, बापू स्टेज पर बिना चप्पल के और बिना काठी का सहारा लिये चल रहे हैं, यह देखकर

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हरि ॐ, डॉ. अनिरुद्ध धैर्यधर जोशी यानी हमारे प्रिय सद्गुरु श्री अनिरुद्ध बापू, एक विविधांगी एवं विशेषतापूर्ण पहलुओं से भरा अद्वितीय व्यक्तित्व! इस असाधारण व्यक्तित्व की पहचान कराने के एक प्रयास के तौर पर, ‘दैनिक प्रत्यक्ष’ के सन २०१२ तथा २०१३ के ‘नववर्ष विशेषांक’ ‘मैंने देखे हुए बापू’ (मी पाहिलेला बापू) इस विषय को समर्पित किये गये थे। बापू के स्कूली जीवन से लेकर मेडिकल प्रॅक्टिस के दौर तक अनेकविध

श्रीहरिगुरुग्राम येथे सद्‌गुरु बापूंचे आगमन व दर्शन

हरि ॐ, सर्व श्रद्धावानांना सूचित करण्यात येत आहे की सद्‌गुरु बापू आज श्रीहरिगुरुग्राम येथे उपासनेनंतर दर्शनाच्या वेळेस येतील. सभी श्रद्धावानों को यह सूचित किया जाता है कि सद्‌गुरु बापू आज श्रीहरिगुरुग्राम में उपासना के बाद दर्शन के समय आयेंगे।   ॥ हरि ॐ ॥ ॥ श्रीराम ॥ ॥ अंबज्ञ ॥

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

“राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ – विश्व का अद्वितीय संगठन” इस रमेशभाई मेहता द्वारा लिखित एवं लोटस पब्लिकेशन्स प्रा. लि. द्वारा प्रकाशित पुस्तक का प्रकाशन समारोह कल दि. २९ अप्रैल २०१७ को दीनानाथ मंगेशकर नाट्यगृह में संपन्न हुआ। यह पुस्तक एक ही समय मराठी, हिंदी, गुजराती तथा अँग्रेज़ी इन ४ भाषाओं में प्रकाशित की गयी। इस पुस्तक का प्रकाशन मा. राज्यपाल (उत्तरप्रदेश) राम नाईकजी, ज्येष्ठ संसद सदस्य तथा एस्सेल ग्रुप के अध्यक्ष

श्रीचण्डिका एक्झाल्टेशन आर्मी के प्रशिक्षण की नई बॅच

हरि ॐ. गुरुवार, दि. १७ मार्च २०१७ को सद्‍गुरु अनिरुद्ध बापू ने पितृवचन के बाद एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण सूचना की। इस सूचना में, ‘रामराज्य’ संकल्पना का एक अंग रहनेवाली ‘श्रीचण्डिका एक्झाल्टेशन आर्मी’ के प्रशिक्षण वर्ग की दूसरी बॅच जल्द ही शुरू की जायेगी, ऐसा बापू ने घोषित किया। अगले गुरुवार, यानी दि. २३ मार्च २०१७ को, इस प्रशिक्षण वर्ग के प्रवेश के लिए आवश्यक फॉर्म्स, श्रीहरिगुरुग्राम में एक काउंटर पर

श्री पंचमुख-हनुमत्-कवच - हिन्दी अर्थ

॥हरि: ॐ ॥   ॥श्री पंचमुख-हनुमत्-कवच ॥   (मूल संस्कृत और हिन्दी अर्थ)   ॥अथ श्रीपञ्चमुखहनुमत्कवचम् ॥   श्रीगणेशाय नम:| ॐ अस्य श्रीपञ्चमुखहनुमत्कवचमन्त्रस्य ब्रह्मा ऋषि:| गायत्री छंद:| पञ्चमुख-विराट् हनुमान् देवता| ह्रीम् बीजम्| श्रीम् शक्ति:| क्रौम् कीलकम्| क्रूम् कवचम्| क्रैम् अस्त्राय फट् | इति दिग्बन्ध:|  इस स्तोत्र के ऋषि ब्रह्मा हैं, छंद गायत्री है, देवता पंचमुख-विराट-हनुमानजी हैं, ह्रीम् बीज है, श्रीम् शक्ति है, क्रौम् कीलक है, क्रूम् कवच है और ‘क्रैम् अस्त्राय फट्’

साईनिवास

साईभक्तों के दिल में श्री साईसत्‌चरित इस ग्रंथ के प्रति बहुत ही आत्मीयता होती है। कई श्रद्धावान इस अपौरुषेय ग्रंथ का नियमित रूप से पारायण करते हैं। इस ग्रंथ का लेखन जिस वास्तु में किया गया, वह वास्तु अर्थात् श्री साईसत्‌चरितकार श्री. गोविंद रघुनाथ दाभोलकरजी (हेमाडपंत) का बांद्रा स्थित निवासस्थान – साईनिवास । श्रीसाईसत्‌चरित के ४०वें अध्याय में हम, सन १९१७ में श्री साईनाथजी की तसवीर के साईनिवास में हुए

कोल्हापुर मेडिकल अँड रिहॅबिलिटेशन कँप २०१७ की तैयारी

गत १३ साल से लगातार आयोजित किये जा रहे कोल्हापूर मेडिकल अँड रिहॅबिलिटेशन कँप के सन २०१७ के सत्र की शुरुआत होने जा रही है। पूरे १० एकर की व्याप्ति रहनेवाले इस कँप के लिए मनुष्य़बल भी उतने ही प्रमाण में लगता है। इस भक्तिमय निष्काम सेवा के लिए जगहों जगहों से, इस साल सेवा करने का अवसर प्राप्त हुए कार्यकर्ता शिविर के लिए निकले हैं। मुंबई से २२ बसेस

भारतवर्ष_aniruddha bapu_Bharatwarsha

  डॉ. अनिरुद्ध जोशी (अनिरुद्ध बापू ) के द्वारा आज के दैनिक प्रत्यक्ष में किया गया आवाहन मुझे भारत के किसी भी राजकीय पक्ष में या किसी भी प्रकार के राजकीय कार्य में रत्ती भर भी दिलचस्पी नहीं है। राजनेताओं से मुझे कुछ भी लेने की इच्छा नहीं है और उन्हें देने जैसा भी मेरे पास कुछ भी नहीं है। परंतु मेरी प्रिय मातृभूमि का हित अथवा अनहित इनके बारे