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आगामी सैनिक – ‘स्नायपर ड्रोन’

युद्ध सिर्फ युद्धभूमि तक ही सीमीत नहीं है, यह आज इस नए युग में सभी जानते है। पारम्परिक प्रकार के युद्ध की गति तेज होकर अब सायबर युद्ध, व्यापार युद्ध, अंतरिक्ष युद्ध, नगरीय युद्ध, इत्यादि बन गया है। इस के अतिरिक्त, आत्याधुनिक रोबोट्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआय) यह आधुनिक युद्ध नीति में अग्रणी तकनीक के तौर पर उजागर हुए हैं। संरक्षण के साथ लगभग सभी क्षेत्रों में रोबोट्स और ‘एआय’

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हरि ॐ, सद्‌गुरु नामसंकीर्तन एवं सांघिक पठन का महत्त्व हम सभी श्रद्धावान जानते ही हैं| अनिरुद्ध चलिसा पठन करने से सद्‌गुरु पर का विश्‍वास दृढ़ होने में हमें सहायता मिलती है, यह विश्वास श्रद्धावानों को मन में होता है| इसलिए संस्था की ओर से गत ६ वर्षों से श्रीहरिगुरुग्राम में ‘अनिरुद्ध चलिसा पठन’ का आयोजन किया जाता है| इस साल यह पठन सबकी सुविधा के लिए शनिवार दिनांक ७ अक्तूबर

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हरि ॐ, ह्या वर्षीच्या आश्विन नवरात्रोत्सवात परमपूज्य सद्‍गुरुंनी दिलेल्या विशेष नवरात्री पूजनामध्ये अर्पण केलेल्या चुनर्‍यांचे पुढे काय करावे, असा प्रश्न अनेक श्रद्धावानांकडून विचारण्यात येत आहे. परमपूज्य बापूंकडे ह्या संदर्भात विचारणा केली असता, बापूंनी खुलासा केला आहे की, श्रद्धावानांनी ह्या सर्व चुनर्‍यांचा अंबज्ञ इष्टिके सोबत जलात पुनर्मिलाप करावा किंवा काही ठिकाणी सोयीसाठी उपलब्ध असलेल्या निर्माल्य कलशामध्ये ह्या चुनर्‍या इतर निर्माल्यासोबत अर्पण कराव्यात. हरि ॐ, इस वर्ष के आश्विन नवरात्रि उत्सव में परमपूज्य सद्‍गुरु के

नवरात्रि-पूजन - आदिमाता दुर्गा एवं भक्तमाता पार्वती का एकत्रित पूजन

फिलहाल मनाये जा रहे आश्विन नवरात्रि-उत्सव से, नवरात्रिपूजन की शुद्ध, सात्त्विक, आसान, मग़र फिर भी श्रेष्ठतम पवित्र पद्धति श्रद्धावानों के लिए उपलब्ध कराके परमपूज्य सद्‍गुरु ने सभी श्रद्धावानों को अत्यधिक कृतार्थ कर दिया है। इस उत्सव के उपलक्ष्य में, कई श्रद्धावानों ने अपने घर में बहुत ही भक्तिमय एवं उत्साहपूर्ण माहौल में मनाये जा रहे इस पूजन की, आकर्षक एवं प्रासादिक सजावट के साथ खींचीं तस्वीरें, “नवरात्रिपूजन” इस शीर्षक के

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हरि ॐ, दैनिक “प्रत्यक्ष”च्या तुलसीपत्र अग्रलेख मालिकेतील दि. २० ऑगस्ट २०१७ रोजीच्या अग्रलेखामध्ये परमपूज्य सद्‍गुरु श्रीअनिरुद्धांनी नवरात्रीतील चतुर्थीच्या रात्र जागराणाचे महत्त्व सांगताना लिहिले होते की… “नवरात्रीच्या चतुर्थीच्या दिवस-रात्रीची ही ‘कूष्माण्डा नवदुर्गा’ नायिका आहे व ह्यामुळेच नवीन शुभकार्यास मानवाने नवरात्री-चतुर्थीस सुरुवात केल्यास, त्याचे कार्य सुलभ बनते. जीवनात काहीतरी श्रेष्ठ व उत्कृष्ट करून दाखविण्याची ज्या श्रद्धावानाची इच्छा असते, त्याने नवरात्रीतील चतुर्थीच्या रात्री अवश्य जागरण करून आदिमातेच्या ग्रंथांचे वाचन करावे व दिवसा तिचे

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हरि ॐ, वर्तमान समय में मनाये जा रहे आश्विन नवरात्रि उत्सव से, परमपूज्य सद्‍गुरु के द्वारा दी गयी नवरात्रि पूजन की विशेष पद्धति के अनुसार श्रद्धावान अपने घर में प्रेम से मोठी आई (मां जगदंबा) का पूजन कर रहे हैं। श्रद्धावानों के द्वारा किये गये पूजन की फोटोज एकसाथ, एक ही जगह देखने का आनन्द प्राप्त हो इसके लिए हमने एक फेसबुक पेज बनाया है। इस फेसबुक की लिंक इस

१. इस आश्विन नवरात्रि उत्सव से परमपूज्य सद्‍गुरु अनिरुद्ध बापू के द्वारा दी गयी नवरात्रि-पूजन की विशेष पद्धति में, परात की मृत्तिका (मिट्टी) में गेहूँ (गोधूम) बोने की विधि का समावेश है। इस विधि के अनुसार बोये जाने वाले गेहूँ अंबज्ञ इष्टिका के मुख के सामने न बोते हुए, उन्हें अन्य सभी तरफ से बोयें, जिससे कि नवरात्रि की अवधि में गेहूँ के तृणांकूरोंसे से आदिमाता का मुख ढँक न जाये। संदर्भ के

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हरि ॐ, सध्याच्या आश्विन नवरात्रोत्सवातील, परमपूज्य सद्‍गुरुंनी दिलेल्या विशेष पूजन पद्धतीमध्ये पहिल्या दिवशी सकाळी करावयाच्या प्रतिष्ठापना पूजनातील क्र.१९च्या उपचारानुसार झेंडूच्या फुलांची माळ परातीभोवती (अंबज्ञ इष्टिकेच्या मांडणीभोवती) अर्पण करावयाची आहे. दुसर्‍या दिवसापासून सायंकाळच्या नित्य पूजनामध्ये नवीन माळ अर्पण करतेवेळी, आदल्या दिवशीची माळ / माळा पूजन मांडणीत तशाच ठेवाव्यात किंवा न ठेवाव्यात हे श्रद्धावान स्वत:च्या आवडीनुसार व सोईनुसार ठरवू शकतात. प्रतिष्ठापना पूजन व नित्य पूजनाच्या उपचारांनुसार, मोठ्या आईला दररोज अनुक्रमे सकाळी व

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हरि ॐ, आज सुरु झालेल्या आश्विन नवरात्रोत्सवामध्ये परमपूज्य सद्‍गुरुंनी दिलेल्या नवरात्रीपूजनाच्या विशेष पद्धतीचा अनेक श्रद्धावान लाभ घेत आहेत. ह्या नवरात्रीपूजनाच्या विधीविधानामध्ये अंबज्ञ इष्टिकेवर देवीचे डोळे, नाक व ओठ काजळाने रेखांकित करण्याचा एक उपचार समाविष्ट आहे. हे देवीचे डोळे, नाक व ओठ रेखांकित करण्यासाठी काजळाव्यतिरिक्त बुक्काही (अबीर) वापरला जाऊ शकतो ह्याची सर्व श्रद्धावानांनी नोंद घ्यावी. हरि ॐ, आज से आरंभ हुए आश्विन नवरात्रि-उत्सव में परमपूज्य सद्‍गुरु द्वारा दी गयी नवरात्रि पूजन

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हरि ॐ, परमपूज्य सद्‌गुरु के द्वारा विशेष रूपसे बतायी गयी और उसके अनुसार मेरे द्वारा ब्लॉग पर पोस्ट की गयी नवरात्रि पूजन करने की शुद्ध, सात्त्विक, सरल परन्तु तब भी श्रेष्ठतम पवित्र पद्धति सभी श्रद्धावानों के लिए इस वर्ष की आश्विन नवरात्रि से उपलब्ध करायी गयी है। उसके अन्तर्गत विधिविधान कैसा होगा, इसकी सारी जानकारी मेरे ब्लॉग पर पहले ही दी गयी है। इस विधिविधान के अन्तिम (क्रमांक ३६) मुद्दे

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Hari Om, A number of Shraddhavaans have been enquiring about the Ishtika (brick) made from the pulp of the paper of the Ramnaam book and to be used as part of the forthcoming Ashvin Navratri Poojan. However, this year the Sanstha will not be able to make available these Ishtika (bricks), for want of sufficient time. Shraddhavaans may therefore use the regular Ishtika (bricks) available otherwise. Shraddhavaans may note all

नवरात्रिपूजन करने की शुद्ध, सात्त्विक, सरल परन्तु तब भी श्रेष्ठतम पवित्र पद्धति

आज दिनांक १४ सितंबर २०१७ के ’दैनिक प्रत्यक्ष’ में प्रकाशित अग्रलेख में बतायेनुसार ’नवरात्रिपूजन’ का विधिविधान निम्नलिखित है। यह विधिविधान हिन्दी तथा मराठी इन दोनों भाषाओं में दिया गया है। हर श्रद्धावान अपने घर में इस प्रकार पूजन कर सकता है।   प्रतिष्ठापनाः १)    आश्‍विन नवरात्रि के पहले दिन एक इष्टिका को गीले टॉवेल से, हलके हाथों से साफ कर लीजिए।              (रामनामबही के कागज़ से बनी इष्टिका यदि

मैने देखे हुए बापू - पुस्तक की प्रस्तावना

मैंने पहली बार बापू को देखा, वह १९८५ में| ‘दादा के नायर कॉलेज के सर’ यह बापू से उस समय हुआ मेरा प्रथम परिचय| पढ़ाई पूरी करके पुणे से लौटने के बाद मेरा बापू के साथ काम करना शुरू हो गया और उस सिलसिले में बापू की परळ की क्लिनिक में जाना भी शुरू हो गया| यह सब करते हुए बापू के व्यक्तित्व को करीब से देखने का और उनकी

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(उत्तरार्ध) ‘क्षमेचा सागर असणारा भगवंत क्षमाशील आहे, भगवंताचे कार्य मानवाला शिक्षा करणे हे नसून मानवाला प्रारब्धाच्या गुलामीतून सोडवून मानवाचा समग्र विकास करून आपल्या प्रत्येक लेकराला सर्वस्वी आनंदी बनवणे हीच भगवंताची इच्छा आहे. तुमची हाक त्याच्यापर्यंत पोहोचतच असते, त्यासाठी कुणाच्याही मध्यस्थीची गरज नाही, भगवंत आणि त्याचा भक्त यांचे नाते थेट आहे, त्यांच्यात कुणाही एजंटची गरज नाही.’ अशी ही शाश्‍वत संकल्पना डॉ. अनिरुद्ध धैर्यधर जोशींनी श्रद्धावानांच्या मनावर ठसवली आणि सर्वसामान्य श्रद्धावानांचा प्रवास

हमारे बापु

१ जनवरी २०१२ को ‘दैनिक प्रत्यक्ष’ के ‘मी पाहिलेला बापू’ इस विशेषांक में प्रकाशित हुआ लेख ‘दादा के सर’ यह मेरा बापु के साथ सन १९८५ में हुआ प्रत्यक्ष परिचय| सुचितदादा जनरल मेडिसिन में एम.डी. करने के लिए डॉ. व्ही. आर. जोशीजी की युनिट में जॉईन हो गये| उस वक़्त बापु यानी डॉ. अनिरुद्ध धैर्यधर जोशी भी उसी युनिट में सिनिअर लेक्चरर थे| वे मेरे दादा को फर्स्ट एम.बी.बी.एस. से