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अनिरुद्ध भक्तिभाव चैतन्य महासत्संगाची पूर्वतयारी

हरि ॐ, जशी जशी ३१ डिसेंबर २०१९ तारीख जवळ येत चालली आहे तशी “अनिरुद्ध भक्तिभाव चैतन्य” या महासत्संगाची तयारी जोरात चालू आहे. तसेच गायकांची प्रॅक्टिसही जोरदारपणे सुरू आहे. सोबत काही फोटोज्‌ पाठवत आहे.                 ।। हरि ॐ ।। श्रीराम ।। अंबज्ञ ।। ।। नाथसंविध्‌ ।।

न्हाऊ तुझिया प्रेमे - ऑडिओ अल्बम

हरि ॐ, २०१३ साली श्रद्धावानांनी अनुभवलेल्या “न्हाऊ तुझिया प्रेमे” या महासत्संगात गायलेले अभंग आज आपण  “अनिरुद्ध भजन म्युझिक” या ॲपवर उपलब्ध करून देत आहोत. हे अभंग ३१ डिसेंम्बरला होणाऱ्या “अनिरुद्ध भक्तिभाव चैतन्य” या कार्यक्रमाची उत्कंठा व पिपासा वाढवतच ठेवतील अशी माझी खात्री आहे. ॥ हरि ॐ ॥ श्रीराम ॥ अंबज्ञ ॥ ॥ नाथसंविध् ॥

Aniruddha Bhaktibhav Chaitanya

दि. २५-१०-२०१८ को प्रकाशित हुआ “पिपासा-३” तथा दि. १४-०२-२०१९ को प्रकाशित हुआ “पिपासा-४”, ये दोनों अभंगसंग्रह श्रद्धावानों के लिए सुख और आनन्द का बहुत बड़ा पर्व ही साबित हुए। आज भी इन दोनों प्रकाशन समारोहों की सुखदायी यादों ने श्रद्धावानों के मन में घर बना लिया है। अब गुरुवार दि. २१-११-२०१९ को श्रीहरिगुरुग्राम में “पिपासा-५” इस अभंगसंग्रह का प्रकाशन समारोह आयोजित किया गया है। इस समारोह के दौरान “पिपासा-५” के

Aniruddha Bhaktibhav Chaitanya

हरि ॐ, ३१ डिसेंबर २०१९ रोजी आयोजित केलेला “अनिरुद्ध भक्तिभाव चैतन्य” हा सर्व श्रद्धावानांची उत्कंठा व उत्सुकता वाढविणारा महासत्संग सोहळा अवघ्या काही दिवसांवर येऊन ठेपला आहे. सद्‍गुरु श्रीअनिरुद्धांवर रचलेल्या मराठी व हिंदी अभंग तसेच भक्तिरचनांचा समावेश असणारा हा भक्तिप्रधान सोहळा प्रत्यक्ष बापूंच्या सान्निध्यात अनुभवताना, नववर्षाची सुरुवात अत्यंत आनंददायी करण्याचा दुग्धशर्करा योग आपल्या सर्वांनाच प्राप्त झालेला आहे. आता ह्या समारंभ सोहळ्यास अवघे काही दिवसच बाकी असून, समारंभ स्थळावरील मोजक्याच विभागांतील प्रवेशपत्रिका

Maatruvaatsalyavindaanam Marathi edition on Amazon Kindle

  हरि ओम्, मातृवात्सल्यविंदानम् मराठी आवृत्ती आता अमेझॉन किंडलवर उपलब्ध आहे. लिंक – https://www.amazon.in/dp/B07ZTSL47V ——————————————————————— Hari Om, Maatruvaatsalyavindaanam Marathi edition is now available on Amazon Kindle.  Book link – https://www.amazon.in/dp/B07ZTSL47V II Hari Om II Shree Ram II Ambadnya II II Naathsanvidh II

Aniruddha Bhaktibhav Chaitanya

हरि ॐ, मंगलवार, दिनांक ३१ दिसंबर २०१९ को होनेवाले अनिरुद्ध भक्तिभाव चैतन्य इस समारोह में श्रद्धावानों के लिए प्रसादालय कि सुविधा उपलब्ध की गयी है । समारोह के दिन श्रद्धावान बडी संख्या में उपस्थित होंगे, जिसके कारण ’प्रसादालय’ के कूपन लेने में श्रध्दावानों को ज्यादा समय लग सकता है । इस बात को ध्यान में रखकर श्रीयंत्र धनलक्ष्मी पूजन याने शुक्रवार दि. २५ अक्तूबर २०१९ से श्रद्धावानों के लिए अनिरुद्ध

Bapu Always Protects His Children

हरि ॐ, सभी श्रद्धावान यह जानते ही हैं कि प्रथम पुरुषार्थ अनिरुद्ध धाम का निर्माणकार्य डुडुळ गाव, पुणे-आळंदी रोड यहाँ संपन्न हो रहा है। आज तक इस पुरुषार्थ धाम के निर्माणकार्य में सेवावृत्ति से सम्मिलित होने के लिए कई श्रद्धावान वहाँ पर उत्साह के साथ चले आते थे। फिलहाल यह निर्माणकार्य अंतिम चरण में पहुँच गया है और अब वहाँ की आध्यात्मिक पवित्रता तथा शुचिता को क़ायम रखना आवश्यक है।

दसरा विजयोपासनेसंबंधी सूचना

हरी ॐ, यावर्षी दसरा मंगळवार दि. ०८.१०.२०१९ रोजी आहे. दरवर्षी दसऱ्याच्या दिवशी श्रीहरिगुरुग्राम येथे विजयोपासना घेण्यात येते. पण यावर्षी पासून दसऱ्याची विजयोपासना ही जवळच्या गुरुवारी घेण्यात येणार आहे. यानुसार यावर्षी दसऱ्याची विजयोपासना गुरुवार दि. १०.१०.२०१९ रोजी संध्याकाळी ७.३० वा. श्रीहरिगुरुग्राम येथे घेण्यात येईल याची कृपया श्रद्धावानांनानी नोंद घ्यावी. सुनिलसिंह मंत्री मुख्य कार्यकारी अधिकारी

गूँज उठी पिपासा - भाग १ संबंधी सूचना

हरि ॐ, सद्‍गुरु श्रीअनिरुद्धजी पर रची हुईं नयीं हिन्दी भक्तिरचनाओं के संग्रह का पहला भाग “गूँज उठी पिपासा – भाग १”, आज आश्विन (अशुभनाशिनी) नवरात्रि की घटस्थापना के पावन पर्व पर “अनिरुद्ध भजन म्युझिक“ ॲप पर श्रद्धावानों के लिए उपलब्ध हुआ है। इसीके साथ, हम “अनिरुद्ध भजन म्युझिक” ॲप पर “प्रिमीयम प्लॅन” भी लाँच कर रहे हैं। इस प्रिमीयम प्लॅन में हमें “गूँज उठी पिपासा” के साथ साथ आगे प्रकाशित होनेवाले अल्बम्स

गूँज उठी पिपासा - भाग १ प्रकाशन

हरि ॐ, श्रद्धावानों को भक्तिभाव चैतन्य में आकंठ डूबानेवाले “पिपासा ३” एवं “पिपासा ४” ये अभंगसंग्रह इस साल प्रकाशित हुए। सद्‍गुरु श्रीअनिरुद्धजी पर के प्रेमरस से ओतप्रोत भरी ये अभंगरचनाएँ, ३१ दिसम्बर २०१९ के “अनिरुद्ध भक्तिभाव चैतन्य“ इस महासत्संग की आतुरता से प्रतीक्षा करनेवाले श्रद्धावानों के मन की पिपासा को अधिक से अधिक बढ़ाती ही जा रहीं हैं। ये सभी अभंगरचनाएँ यानी इस महासत्संग की उत्कंठा को बढ़ाने वाला मानो