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"The Bapu that I have known" book now available on e-Aanjaneya website in Marathi, Hindi and English

Hari Om, The book “The Bapu that I have known” which was published in 2017 is available in Marathi, Hindi and English. We shraddhavans take immense pleasure in reading this book over and over again by getting to know various facets of the personality of Sadguru Bapu. I am happy to let you know that this book is now available on e-Aanjaneya website in the form of an e-book. Accordingly,

Carrier of rumours

Hari Om, I read the note posted today by Shri. Vaibhavsinh Kulkarni. The note turned out to be literally an expression of my own opinion. ———————————————————— Carrier of rumours Hari Om. For the last few days, a message is being circulated in social media widely. The message claims that the points in it were discussed during a video conference held by Samirdada with Shraddhavans. On reading the message, the first

अफवाहों के वाहक

हरि ॐ आज श्री. वैभवसिंह कुलकर्णी ने पोस्ट की हुई नोट पढ़ी। यह नोट यानी हूबहू मेरा मनोगत है। ————————————————————————- अफवाहों के वाहक हरी ॐ. सोशल मीडिया पर फिलहाल एक मेसेज का बहुत ही आदानप्रदान किया जा रहा है। ‘विदेश के श्रद्धावानों के साथ समीरदादा ने किये हुए व्हिडीओ कॉन्फरन्सिंग के ये मुद्दे हैं’ ऐसा दावा इस मेसेज में किया गया है। यह मेसेज पढ़ने के बाद पहला विचार मेरे

अफवांचे भोई

हरि ॐ आज श्री.वैभवसिंह कुलकर्णीने पोस्ट केलेली नोट बघितली. ही नोट म्हणजे शब्दश: माझे मनोगत आहे. ——————————————————————– अफवांचे भोई हरी ओम .. सोशिअल मीडियावर सध्या एका मेसेजची खूप देवाण घेवाण केली जात आहे. परदेशातील श्रद्धावानांसोबत समीरदादांनी केलेल्या व्हिडीओ कॉन्फरन्सिंग मधले हे मुद्दे आहेत असा दावा ह्या मेसेज मध्ये केलेला आहे. हे मेसेजेस वाचल्यावर पहिला विचार माझ्या डोक्यात आला की समीरदादांना जेंव्हा एखादा मेसेज आपल्यापर्यंत पोहोचवायचा असतो तो ऑफिशिअल मार्गानी आपल्या

'तृतीय महायुद्ध' पुस्तक और आज का वास्तव

हरि ॐ, आज की भीषण जागतिक परिस्थिति के लिए कई देश चीन को ज़िम्मेदार मान रहे हैं। News Links – http://www.aniruddhafriend-samirsinh.com/third-world-war-hindi/ फिर ऐसे में याद आती है, मार्च २००६ से डॉ. अनिरुद्ध धैर्यधर जोशी ने दैनिक प्रत्यक्ष में चालू की हुई ’तिसरे महायुद्ध’ (तृतीय विश्वयुद्ध) इस लेखमाला की, जो बाद में दिसम्बर २००६ की दत्तजयंती के दिन ’तिसरे महायुद्ध’ इस नाम से पुस्तक के रूप में प्रकाशित हुई। इस पुस्तक

'तिसरे महायुद्ध' पुस्तक आणि आजचे वास्तव

हरि ॐ, आजच्या भीषण जागतिक परिस्थितीला अनेक देश चीनला जबाबदार धरत आहेत. News Links – http://www.aniruddhafriend-samirsinh.com/third-world-war-marathi/ मग अशा वेळेस मार्च २००६ सालापासून डॉ. अनिरुद्ध धैर्यधर जोशी यांनी दैनिक प्रत्यक्ष मध्ये चालू केलेल्या ’तिसरे महायुद्ध’ च्या लेखमालेची आठवण होते, जी लेखमाला नंतर डिसेंबर २००६च्या दत्तजयंती ह्या दिवशी ’तिसरे महायुध्द’ या नावाने पुस्तक रूपात प्रकाशीत झाली. या पुस्तकाच्या प्रस्तावनेमध्ये डॉ. अनिरुद्ध म्हणतात, “पुढील काळात आजचे समीकरण उद्या असेलच असे नाही, तर अगदी

'The Third World War' book and present situation

Hari Om,  Many countries across the world are holding China responsible for today’s dire consequences that the world is facing.  News Links – http://www.aniruddhafriend-samirsinh.com/third-world-war-english/ Here, our memories go way back to March 2006, to the article series authored by Dr. Aniruddha Dhairyadhar Joshi titled, ‘Third World War’ that was published in the Dainik Pratyaksha. Later, in December 2006, on the day of Datta Jayanti, the article collection was published in

श्रद्धावानों के लिये जीवन में सुंदरकांड का महत्व

हरि ॐ, आज दुनियाभर में जो परिस्थिति है, उस परिस्थिति में भी बापुजी के सभी श्रद्धावान मित्र उपासना के माध्यम से बापुजी के साथ दृढ़तापूर्वक जुड़ गये हैं और इस सांघिक उपासना के साथ ही, श्रद्धावान अपनीं व्यक्तिगत उपासनाएँ और खुद की प्रगति के लिए आवश्यक होनेवाले विभिन्न Online Courses इनके माध्यम से, बापुजी के बतायेनुसार समय का यथोचित इस्तेमाल करके इस संकट के दौर को अवसर में परिवर्तित कर

अनिरुद्ध प्रेमसागरा मोबाइल अ‍ॅपसंबंधी सूचना

हरि ॐ, सध्या सुरू असलेल्या लॉकडाऊनच्या काळातही बापूंनी आपल्या सर्व श्रध्दावानांसाठी सांघिक उपासनेचा सुंदर मार्ग इंटरनेटच्या माध्यमांतून खुला करून दिला आहे. अनेक श्रध्दावान व्हॉट्‌सॲप द्वारे दररोज या विविध उपासनांबाबत मनापासून आपल्या प्रतिक्रिया व्यक्त करीत आहेत. परंतु, सध्याची परिस्थिती लक्षात घेता अधिकृत सूचनांनुसार व्हॉट्‌सॲपच्या सेटिंगमध्ये बदल करण्यात आले आहेत. मात्र त्याचवेळेस ’अनिरुध्द प्रेमसागरा – श्रध्दावान नेटवर्क’ – हे सर्व श्रध्दावानांसाठी असणारे सोशल नेटवर्क, आपल्यासाठी सहज मार्ग बनला आहे. यातही श्रध्दावानांना अधिक

संस्था ने आय.टी. क्षेत्र में की हुई प्रगति के पीछे अनिरुध्द बापुजी के अथक परिश्रम, अभ्यास, दूरंदेशी तथा मार्गदर्शन

हरि ॐ, आज दुनियाभर से अनगिनत श्रद्धावान “अनिरुद्ध टी.व्ही.” तथा मेरे फेसबुक पेज के माध्यम से हररोज़ प्रक्षेपित होनेवालीं विभिन्न उपासनाओं का आधार महसूस कर रहे हैं। उसी प्रकार, इस मुश्किल दौर में कई श्रद्धावान “अनिरुद्ध रेडिओ” का भी आधार ले रहे हैं और उसके लिए आय.टी. टीम की मन:पूर्वक प्रशंसा कर रहे हैं। लेकिन इस उपलक्ष्य में एक महत्त्वपूर्ण बात पर मैं सभी श्रद्धावानों का ग़ौर फ़रमाना चाहता हूँ।