जन्म और मृत्यु ये भी हमारे लिए बडे संदर्भ-बिन्दु हैं

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धने १५ मई २०१४ के पितृवचनम् में ‘जन्म और मृत्यु ये भी हमारे लिए बडे संदर्भ-बिन्दु हैं(The Birth and The Death are also the biggest reference points for us)’ इस बारे में बताया।

हमारे जन्म और मृत्यु भी क्या है? They are two biggest reference points. ये संदर्भ-बिन्दु हैं। जन्म मृत्यु क्या होते हैं? संदर्भ-बिन्दु हैं, that is not a frame of reference. ये संदर्भ-बिन्दु हैं।

जन्म और मृत्यु ये भी हमारे लिए बडे संदर्भ-बिन्दु हैं ये कैसे संदर्भ-बिन्दु हैं? जन्मबिंदु है, तो हमे लगता है अच्छा है, मृत्युबिंदु है तो डर लगता है। लगेगा। आप कोई संत नही बने हो, आप कोई ऋषि नही बने हो, आप कोई योगीश्वर नही है, तो डर लगेगा, उसमे कोई हैरान होने की बात नही है, या कोई कम लगने की आवश्यकता नही है। right, ये क्यूं डराता है?

मृत्यु के बाद क्या है? कोई जानता नही। Life after death कितनी हजार किताब मिलेंगी आपको। लेकिन वे पढने के बाद भी you are mot sure, सचमुच यही होनेवाला है, ये क्या होनेवाला है। और यहां से छोडकर जाऊँ तो पीछे क्या होनेवाला है। ये भी मालूम नही है। यानी क्या, दोनों चीजें अज्ञात हैं कि मृत्यु के बाद मेरा क्या होनेवाला है और मै मरने के बाद यहां क्या होनेवाला है? मेरे अपने जो पीछे रह गये हैं, उनका क्या होनेवाला है? यानी दो जगह अज्ञात हैं। आगे की भी अज्ञात है और पीछे की बात जो है, पीछे रहनेवाली, वो भी अज्ञात है।

जनम लेते समय कहां से आया मालूम नही, लेकिन जहां आया हूं वो तो ज्ञात है, इसलिये उसका डर नही लगता। ये दोनों, जहां से निकलना है वही मालूम नही, जहां जाना है, वह भी मालूम नही तो डर लगेगा ही। यहां क्या है, कहां से आये मालूम नही लेकिन आये हैं ये जानते हैं। तो ये क्या हो गया, जन्म और मृत्यु reference points हैं। एक का डर क्यों लगता है, क्योकि दोनों जगह अज्ञात हैं।

‘जन्म और मृत्यु ये भी हमारे लिए बडे संदर्भ-बिन्दु हैं’ इस बारे में हमारे सद्गुरु श्री अनिरुद्ध ने पितृवचनम् में बताया, जो आप इस व्हिडिओ में देख सकते हैं।

‘काल और दिशा ये हमारे लिए संदर्भ-बिन्दु हैं’ इस बारे में हमारे सद्गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने पितृवचनम् में बताया, जो आप इस व्हिडिओ में देख सकते हैं।

॥ हरि ॐ ॥ ॥ श्रीराम ॥ ॥ अंबज्ञ ॥

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