Samirsinh Dattopadhye

भगवान सर्वसमर्थ है (God is omnipotent) - Aniruddha Bapu‬

परम पूज्य सद्‍गुरू श्री अनिरुद्ध बापूने उनके ०८ जनवरी २०१५ के हिंदी प्रवचन में डॉ. टेस्ला का उदाहरण देकर ‘भगवान सर्वसमर्थ है (God is omnipotent) ’ इस बारे में समझाया। एक विश्वास असावा पुरता, कर्ता हर्ता साई ऐसा। यह साईनाथ सब कुछ कर सकता है। हमारे मन में आता है- ये कैसे हो सकता है? ये नही हो सकता है। लेकीन हो सकता है। वह जरूर कर सकता है। प्रार्थना

चरणों में अटूट विश्वास रखना। (keep unshaken faith in the lotus feet of Sai) - Aniruddha Bapu

साई चरणों में अटूट विश्वास रखना। (Keep unshaken faith in the lotus feet of Sai) – Aniruddha Bapu परम पूज्य सद्‍गुरू श्री अनिरुद्ध बापूने उनके ०८ जनवरी २०१५ के हिंदी प्रवचन के दौरान ‘साईचरणों में अटूट विश्वास रखना’, इस बारे में बताया।  मै नादान हूँ, निकम्मा हूँ ऐसे मत सोचो। साई नाथजी का वचन है- ‘शरण में मेरी आया और निकम्मा निकला। बतला दो बतला दो ऐसा कोई॥’ अगर मेरे

परमात्मा का वादा कभी झूठा नहीं होता (Paramatma always keeps his promises) - Aniruddha Bapu‬

Paramatma always keeps his promises परम पूज्य सद्‍गुरू श्री अनिरुद्ध बापूने उनके ०८ जनवरी २०१५ के हिंदी प्रवचनके दौरान ‘ परमात्मा (Paramatma) का वादा कभी झूठा नही होता, वह अपना वादा निभाता ही है’, इस बारे में बताया। जो इन्सान का जन्म लेता है, वह सिर्फ दो ही प्रान्त या प्रदेश में जी सकता है। पहला आदिमाता और परमात्मा के इच्छा का दुसरा प्रान्त है नियमों का प्रान्त। दुसरे प्रान्त

भगवंताने कर्मस्वातंत्र्याबरोबर प्रार्थनास्वातंत्र्यही दिले आहे (God has granted the freedom of Praying with the freedom of action) - Aniruddha Bapu

परमपूज्य सद्‍गुरू श्री अनिरुद्ध बापूंनी त्यांच्या २५ जून २०१५ च्या मराठी प्रवचनात ‘भगवंताने कर्मस्वातंत्र्याबरोबर प्रार्थनास्वातंत्र्यही (freedom of Praying) दिले आहे’, याबाबत सांगितले. स्वस्तिक्षेम संवादामध्ये चण्डिकाकुलाशी बोलताना हवे ते मागा, गप्पा मारा, भांडा, पण प्रेमाने भांडा, संवाद साधा. परंतु सर्वांत महत्त्वाचे म्हणजे स्वस्तिक्षेम संवादावर पूर्ण विश्वास असायला हवा. ‘चण्डिकाकुल सर्व जाणतेच’ असे असले तरीही आपल्याला त्यांना सर्व सांगायलाच पाहिजे कारण भगवंताने कर्मस्वातंत्र्याबरोबर प्रार्थनास्वातंत्र्यही (freedom of Praying) दिले आहे, असे आपल्या लाडक्या

मॉं दुर्गा ! करुणा का विस्तार करो (Mother Durga! Expand Your Compassion) - Aniruddha Bapu‬ Hindi‬ Discourse 01 Jan 2015

मॉं दुर्गा! करुणा का विस्तार करो (Mother Durga! Expand Your Compassion) ‘दुर्गे दुर्घट भारी तुजवीण संसारी, अनाथनाथे अंबे करुणा विस्तारी’ इस मॉं दुर्गाकी आरती में माता दुर्गा पर सर्वप्रथम विश्वास प्रकट करके फिर दुर्गामाता(मॉं दुर्गा) से प्रार्थना की है कि हे मॉं, मैं जहां भी हूं वहां तक तुम अपनी करुणा का विस्तार करो; मैं अक्षम हूं परंतु तुम अपनी करुणा का विस्तार करने में संपूर्ण समर्थ हो। श्री आदिशंकराचार्यजी

Durga

  दुर्गे दुर्घट भारी तुजविण संसारी । अनाथनाथे अंबे करुणा विस्तारी ॥ वारी वारी जन्ममरणांतें वारी । हारी पडलो आता संकट निवारी ॥ 1 ॥ जय देवी जय देवी महिषासुरमर्दिनी । सुरवरईश्वरवरदे तारक संजीवनी ॥ धृ ॥ त्रिभुवनभुवनी पाहता तुजऐसी नाही । चारी श्रमले परंतु न बोलवे कांही ॥ साही विवाद करिता पडिले प्रवाही । ते तूं भक्तांलागी पावसि लवलाही॥ जय देवी… प्रसन्नवदने प्रसन्न होसी निजदासा । क्लेशांपासुनि सोडवी तोडी

‘मैं हूँ’ यह त्रिविक्रम का मूल नाम है (‘I Am’ Is Trivikram's Original Name) - Aniruddha Bapu‬ Hindi‬ Discourse 01 Jan 2015

‘मैं हूँ’ यह त्रिविक्रम का मूल नाम है (‘I Am’ Is Trivikram’s Original Name) आदिमाता चण्डिका और उनके पुत्र त्रिविक्रम (Trivikram) से कुछ मांगते समय श्रद्धावान को सकारात्मक (पॉझिटिव्ह) रूप से मांगना चाहिए। वेदों के महावाक्य यही बताते हैं कि हर एक मानव में परमेश्वर का अंश है। यदि मानव में परमेश्वर का अंश है तो उसे नकारात्मक रूप से मांगने की आवश्यकता ही नहीं है। ‘मैं हूँ’ यह त्रिविक्रम

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Hindi Cinema: Special, Enthralling and Weird as Well!              No one would know if this is a real incident or a fabricated one. In the eighties, an international competition was held in India. The medals were being given to the winners by a senior accomplished actor. An international player enquired with his Indian counterpart who the chief guest was. The international player was quite surprised

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Every anniversary issue of Daily Pratyaksha has seen a unique theme, selected by Dr. Aniruddha Dhairyadhar Joshi (Sadguru Shree Aniruddha Bapu), its Executive Editor, being covered in great detail, with its multifarious facets being systematically analysed and presented to the readers. The past two years’ Anniversary Special issues of Pratyaksha have been on yet another unique theme, “The Special, the Astonishing & the Peculiar”. The fact that it has been

श्रीसूक्ताच्या पहिल्या ऋचेचा अर्थ - भाग १५  (The Meaning Of The First Rucha Of Shree Suktam - Part 15) - Aniruddha Bapu‬ ‪Marathi‬ Discourse 18 June 2015

श्रीसूक्ताच्या पहिल्या ऋचेचा अर्थ- भाग १५ (The Meaning Of The First Rucha Of Shree Suktam – Part 15) लहान मूल ज्याप्रमाणे आपल्या आईवडिलांकडे, आजीआजोबांकडे हट्ट करते, अन्य कुणा तिर्‍हाइकाकडे हट्ट करत नाही; त्याप्रमाणे श्रद्धावानाने आपल्या पित्याकडे म्हणजेच त्रिविक्रमाकडे हट्ट करावा, त्रिविक्रमाच्या मातेकडे म्हणजेच आपल्या आजीकडे अर्थात श्रीमातेकडे हट्ट करावा. त्रिविक्रमच उचित ते सर्वकाही देणारा आहे. या जगात जे जे काही शुभ, कल्याणकारी, मंगल आहे ते निर्माण करणारा ‘जातवेद’ त्रिविक्रम आहे.