Samirsinh Dattopadhye

झूठे मैं से छुटकारा कैसे पाया जाये (How to Get Rid of False Self) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 11 Sep 2014

झूठे मैं से छुटकारा कैसे पाया जाये जब तक मानव का हनुमानजी के साथ कनेक्शन नहीं जुडता, तब तक उसका विकास नहीं हो सकता और हनुमानजी के साथ मानव का कनेक्शन जुडने के आडे मानव का झूठा मैं आता है। इस झूठे मैं को खत्म करने के लिए मानव को भक्तिमय प्रयास करना चाहिए। झूठे मैं से छुटकारा कैसे पाया जा सकता है इस बारे में परम पूज्य सद्गुरु श्री

नासै रोग हरै सब पीरा (Naasai rog harai sab peera) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 11 Sep 2014

नासै रोग हरै सब पीरा | मानव के भीतर रहने वाला ‘झूठा मैं’ उस मानव के मन में भय और भ्रम उत्पन्न करता है । मन को बीमारियों का उद्‍भवस्थान कहा जाता है । भय के कारण ही पहले मन में और परिणामस्वरूप देह में रोग उत्पन्न होते हैं । संतश्रेष्ठ श्री तुलसीदासजी द्वारा विरचित श्रीहनुमानचलिसा की ‘नासै रोग हरै सब पीरा’ इस पंक्ति में छिपे भावार्थ के बारे में

Shree Aniruddha Chalisa Pathan on 12th October 2014

Since last three years, we all have been participating in the collective chanting of Shree Aniruddha Chalisa at Shri Harigurugram. This year too the programme of chanting of Shree Aniruddha Chalisa would be held on Sunday, 12th October, 2014 at Shree Harigurugram. We all are indeed extremely fortunate to get this golden opportunity of participating in this chanting. All Shraddhavan friends of Sadguru Bapu are cordially invited for the ceremony.

जय कपीस तिहुँ लोक उजागर - 2 (Jai Kapees Tihun Lok Ujaagar-2) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 11 Sep 2014

जय कपीस तिहुँ लोक उजागर | मन, प्राण और प्रज्ञा ये मानव के भीतर रहने वाले तीन लोक हैं । मानव के भीतर के इन तीनों लोकों का उजागर होना मानव का विकास होने के लिए आवश्यक होता है । इन तीनों लोकों को उजागर करने के हनुमानजी के कार्य के बारे में सद्गुरुपरम पूज्य सद्गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने  अपने ११ सितंबर २०१४ के प्रवचन में बताया, जो आप

जय कपिश तिहु लोक उजागर ( Jai Kapish Tihu Lok Ujagar ) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 11 Sep 2014

जय कपिश तिहु लोक उजागर | सन्तश्रेष्ठ श्रीतुलसीदासजी श्रीहनुमानचलिसा स्तोत्र में हनुमानजी को ‘कपिश’ कहकर संबोधित करते हैं । ‘कपिश’ यह संबोधन ‘कपि’ और ‘ईश’ इन दो शब्दों का अर्थ अपने ११ सितंबर २०१४ के हिंदी प्रवचन में परम पूज्य सद्गुरु श्रीअनिरुद्धजी ने बताया । जिसे आप इस इस व्हिडियो में देख सकते हैं l ॥ हरि ॐ ॥ ॥ श्रीराम ॥ ॥ अंबज्ञ ॥

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर (Jai Hanuman Gyan Gun Sagar) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 11 Sep 2014.

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर । सन्तश्रेष्ठ श्रीतुलसीदासजी हनुमानजी को हमेशा ही बडे प्यार से संबोधित करते हैं । श्रीहनुमानचलिसा स्तोत्र के प्रारंभ में वे ‘जय हनुमान ज्ञान गुन सागर’ कहकर हनुमानजी की जयजयकार करते हैं । महाप्राण श्रीहनुमानजी के ज्ञानगुनसागर स्वरूप के बारे में परम पूज्य सद्गुरु श्रीअनिरुद्धसिंह ने अपने ११ सितंबर २०१४ के हिंदी प्रवचन में बताया, जो आप इस व्हिडियो में देख सकते हैं l ॥ हरि ॐ

Heartiest Congratulations on Success of Mangalyaan

On behalf of all the Shraddhavan friends of Sadguru Aniruddha Bapu,I heartily congratulate Indian Space Research Organisation and all its personnel for achieving epochal success in Mission Mangalyaan. Mangalyaan also known as Mars Orbiter Mission is India’s maiden mission to Mars. It is incredible that a day before the launch of the mission i.e. on 5th November 2013, ISRO Chairman K. Radhakrishnan had himself placed a scale model of the

झूठा मैं कैसे उत्पन्न होता है (How the False Self gets created) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 21 August 2014

How the False Self gets created मानव के मन में विचारचक्र लगातार चलता रहता है । मानव किसी भी बात के बारे में डर की भावना से सोचता है । इस अनुचित विचारशृंखला से उसका सही मैं दबकर झूठा मैं उसपर हावी हो जाता है । ‘झूठे मैं’  की उत्पत्ति के बारे में  परम पूज्य सद्गुरु श्रीअनिरुद्धसिंह ने अपने २१ अगस्त २०१४ के प्रवचन में मार्गदर्शन किया, जो आप इस

झूठे मैं से मुक्ति कैसे पायी जा सकती है (How to get rid of False Self)  - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 21 August 2014

मानव के जीवन में लोग जो उसके बारे में कहते हैं उसके आधार पर वह मानव अपनी एक झूठी प्रतिमा बना लेता है और वही उसका सही मैं है यह वह मान लेता है । इस भ्रम कारण से ही उसके जीवन में रण चलता रहता है । भगवान की शरण में जाकर इस ‘ झूठे मैं ’ के रण से मुक्ति पायी जा सकती है, इस बारे में परम

सही मैं और झूठा मैं के बीच की खींचातानी (Tug of War between True Self & False Self - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 21 August 2014)

सही मैं और झूठा मैं के बीच की खींचातानी अन्य लोगों से मानव अपने बारे में रहने वाली उनकी राय सुनकर ‘अपने मैं’ की धारणा बना लेता है। इससे वह अपने सही मैं को दबाकर झूठे मैं को ताकतवर बनाता है और इन दोनों के बीच की खींचातानी जीवन भर चलती रहती है । सही मैं और झूठा मैं के बीच की खींचातानी के बारे में परम पूज्य सद्गुरु श्रीअनिरुद्धसिंह

सही मैं और झूठा मैं (True Self & False Self)  - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 21 August 2014

सही मैं और झूठा मैं (True Self & False Self) मानव के भीतर के ‘ सही मैं ’ को यानी बिभीषण को महाप्राण हनुमानजी सामर्थ्य प्रदान करते हैं  । वहीं, मानव के भीतर का ‘ झूठा मैं ’ यह कुंभकर्ण की तरह रहता है । मानव को चाहिए कि भगवान की भक्ति करके वह ‘ झूठे मैं ’ का दामन छोडकर ’सही मैं’ को प्रबल बनाये । मानव के भीतर रहने वाले ‘ सही

साईनाथजी की शरण में जाने से जीवन सार्थक बन जाता है | (Take shelter at Sainathji's Feet and Life becomes Fruitful - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 21 August 2014)

साईनाथजी की शरण में जाने से जीवन सार्थक बन जाता है | (Take shelter at Sainathji’s Feet and Life becomes Fruitful) साईनाथजी की शरण में गया और जीवन व्यर्थ हो गया ऐसा इस दुनिया में कोई भी नहीं है ।  यह साईवचन मानव (human beings) के जीवन में सच (thruth) हो सकता है, लेकिन इसके लिए उसका सच में साईनाथजी की शरण में जाना अनिवार्य है । शरण इस शब्द के

ब्राह्ममुहूर्ताचे महत्त्व - भाग २ (The Importance of Brahma Muhoorta- Part 2) - Aniruddha Bapu Marathi Discourse 31 March 2005

ब्राह्ममुहूर्ताचे महत्त्व  – भाग २ रोज ब्राह्ममुहूर्तावर उठून उपासना करणे ज्यांना शक्य आहे त्यांनी अवश्य करावे, पण आजच्या धकाधकीच्या काळात सर्वांनाच हे करणे सहज शक्य होणार नाही, तरीही महिन्यातून एकदा तरी ब्राह्ममुहूर्तावर उठून उपासना करणे हे अचिन्त्य लाभ देणारे आहे. ब्राह्ममुहूर्ताच्या वेळी आत्माराम साक्षीरूपात न राहता चेतन स्वरूपात आमच्या सत्प्रवृत्तीला प्रेरणा देतो, हे लक्षात घेऊन ही संधी साधली पाहिजे. ब्राह्ममुहूर्ताच्या महत्त्वाबद्दल परम पूज्य सद्गुरु श्रीअनिरुद्धांनी त्यांच्या ३१ मार्च २००५ रोजीच्या प्रवचनात

एएडिएम सेवा- अनन्त चतुर्दशी २०१४ (AADM Seva- Anant Chaturdashi 2014) - Aniruddha Bapu Marathi Discourse 11 Sep 2014

अनिरुद्धाज अ‍ॅकॅडमी ऑफ डिझॅस्टर मॅनेजमेंट (AADM)  के स्वयंसेवकों के द्वारा अनन्त चतुर्दशी, ८ सितंबर २०१४ को गणपति पुनर्मिलाप (विसर्जन) कार्यक्रम में की गयी सेवा की जानकारी सद्गुरु श्री अनिरुद्धजी ने यानी बापु ने दी l मुंबई में ६१ जगह और मुंबई के बाहर ५ शहरों में यह(AADM)  सेवा की गयी l इस सेवा में ४७४५ स्वयंसेवकों ने हिस्सा लिया, जिनमें ७१ मेडिकल्स स्वयंसेवकों का यानी डॉक्टर्स और पॅरामेडिकल्स का सहभाग

ब्राह्ममुहूर्ताचे महत्त्व - १ ( The Importance of Brahma Muhoorta - 1) - Aniruddha Bapu Marathi Discourse 31 March 2005

ब्राह्ममुहूर्ताचे महत्त्व – १ ( The Importance of Brahma Muhoorta – 1) ब्राह्ममुहूर्तावर जी उपासना मानव करतो, त्याची भक्ती करण्यातील एकाग्रता वाढते, सहज प्राणायाम आपोआप घडतो, प्रगाढ शान्ती मिळते. इतर दिवशी एकाग्र मनाने न केलेली उपासनासुद्धा परमात्मा प्रेमाने स्वीकारतो. ब्राह्ममुहूर्ताच्या महत्त्वाबद्दल परम पूज्य सद्गुरु श्रीअनिरुद्धांनी त्यांच्या ३१ मार्च २००५ रोजीच्या प्रवचनात सांगितले, जे आपण या व्हिडियोत पाहू शकता. ॥ हरि ॐ ॥ ॥ श्रीराम ॥ ॥ अंबज्ञ ॥