Samirsinh Dattopadhye

स्वार्थ (Swaarth)

झूठे अहं से मुक्ति पाने का आसान उपाय | हनुमानजी का स्मरण करना और अपने आराध्य का ध्यान करना इस प्रक्रिया से मानव झूठे अहं से अपना पाला  छुडा सकता है। झूठे अहं से मुक्त होने के सरल उपाय के बारे में परम पूज्य सद्गुरु श्री अनिरुद्ध बापू  ने अपने १८ सितंबर २०१४ के  हिंदी प्रवचन में बताया, जो आप इस व्हिडियो में देख सकते हैं l ॥ हरि ॐ

स्वार्थ (Swaarth)

भयभंजक हनुमानजी | मानव के जीवन में रामरूपी कर्म और कर्मफलरूपी सीता के के बीच में सेतु बनाते हैं महाप्राण हनुमानजी! रावणरूपी भय मानव के कर्म से कर्मफल को दूर करता है। रामभक्ति करके मानव को चाहिए कि वह हनुमानजी को अपने जीवन में सक्रिय होने दें। हनुमानजी के भयभंजक सामर्थ्य के बारे में परम पूज्य सद्गुरु श्री अनिरुद्ध बापू  ने अपने १८ सितंबर २०१४  के हिंदी प्रवचन में बताया,

स्वार्थ (Swaarth)

मानवी गर्भ पर भय असर करता है | भाग – ३ Fear भय के कारण मानव के मन पर बुरे परिणाम होते हैं। गर्भवती महिला के गर्भ पर भी भय का असर होता है। गर्भवती महिला को इस बात का विशेष ध्यान रखते हुए भयकारी बातों से दूर रहना चाहिए। मानवी गर्भ पर भय किस तरह असर करता है, इसके बारे में परम पूज्य सद्गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने

Dan Brown says “Science and religion are two languages trying to tell the same story”

Last year ‘Digital Fortress’ and ‘Deception Point’ had featured in the list of the novels that I had read. I had liked them and hence I had praised them and their author, Dan Brown through couple of my blogposts. If you too admire Dan Brown then this week would have been very exciting for you especially if you happened to be in India. Dan Brown who was named one of

स्वार्थ (Swaarth)

मानवी गर्भ पर भय असर करता है| भाग – 1 भय के कारण मानव के मन पर बुरे परिणाम होते हैं। गर्भवती महिला के गर्भ पर भी भय का असर होता है। गर्भवती महिला को इस बात का विशेष ध्यान रखते हुए भयकारी बातों से दूर रहना चाहिए। मानवी गर्भ पर भय किस तरह असर करता है, इसके बारे में परम पूज्य सद्गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने १८ सितंबर

परग्रहवासी अनुनाकीयोंपर  डॉ. अनिरुद्ध जोशी द्वारा लिखित अग्रलेखमाला

वाचकों को यह जानकारी देते हुए हमें खुशी हो रही है कि ’eसाप्ताहिक अंबज्ञ प्रत्यक्ष’ डॉ. अनिरुद्ध धैर्यधर जोशी द्वारा लिखित तुलसीपत्र अग्रलेखमाला के लेखों के वर्तमान क्रम में परिवर्तन करते हुए अब ७ नवंबर २०१४ से तुलसीपत्र ९९७ से शुरु होनेवाले अग्रलेख प्रकाशित किये जाएंगें। इन अत्यन्त महत्त्वपूर्ण अग्रलेखों में डॉ. अनिरुद्ध धैर्यधर जोशी(सद्‌गुरु अनिरुद्ध बापू) के द्वारा परग्रहवासी अनुनाकीयों के वसुन्धरा पृथ्वी पर हुए आगमन से संबंधित इतिहास के संदर्भ में सविस्तार

चीज , चीज ,नॉनव्हेज चीज, cheese, non veg cheese

व्हेज चीज आणि नॉनव्हेज चीज (Veg and Non veg Cheese) चायनीज खाद्यप्रकाराबरोबरच आता इटालियन, लेबनीज, कोरियन असे अनेक विदेशी खाद्यप्रकार गेल्या काही वर्षात भारतात लोकप्रिय होत चालले आहेत. ह्या खाद्यप्रकारांमध्ये बर्‍याच वेळा “चीज” वापरले जाते. चीज हा प्रकार जरी भारतामध्ये अनेक वर्षं मिळत असला तरी मागच्या काही वर्षांमध्ये “चीज”ची आवड लोकांमध्ये खूपच वाढली आहे. सद्‌गुरु अनिरुद्ध बापूंनी (डॉ. अनिरुध्द जोशी) दिनांक २५ सप्टेंबर २०१४ च्या हिंदी प्रवचनात “व्हेज चीज” व

Diwali Wishes to all Shraddhavans

Yesterday we celebrated Shree Dhanalaxmi – Shree Yantra Poojan at Shree Harigurugram. Sadguru Bapu could not make it to the utsav as He is currently tied up in the preparations for the much eagerly awaited Shree-Shwasam. Diwali celebrations are already under way. Brightly lit homes, lot of sweets and goodies and last but not the least, bursting of crackers is typically how Diwali is celebrated. On this auspicious occasion, I

स्वार्थ (Swaarth)

विचारशृंखला की शुरुआत- भाग २ प्रसव के समय गर्भ की स्थिति-गति का परिणाम उस शिशु के यानी मानव के मन पर होता है। उस अवस्था में जिन परिवर्तनों से वह गुजरता है, उसके परिणामस्वरूप उस प्रकार के विचार दृढ होते हैं। गर्भस्थ शिशु अवस्था से शुरू होनेवाली इस विचार-शृंखला के बारे में परम पूज्य सद्गुरु श्री अनिरुद्ध बापू  ने अपने १८ सितंबर २०१४ के प्रवचन में मार्गदर्शन किया, जो आप

स्वार्थ (Swaarth)

विचारशृंखला की शुरुआत| कोई भी व्यक्ति यह नहीं कह सकता कि उसके मन में पहला विचार कब आया था। गर्भस्थ शिशु अवस्था से ही मानव के मन में विचार आते रहते हैं यानी माँ की कोख से जन्म लेने से पहले भी गर्भस्थ शिशु अवस्था में भी मानव सोचता रहता है। विचारों की इस शृंखला के बारे में परम पूज्य सद्गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने १८ सितंबर २०१४ के

‘ॐ श्री सुरभ्यै नम:।’ (Om Shree Surabhyai Namah) - Aniruddha Bapu Marathi Discourse 14 Nov 2013

‘ ॐ श्री सुरभ्यै नम:। ’ प्रत्येक श्रद्धावान गायीला माता मानतो, तिची पूजा करतो. गोमातेच्या पावलांचे चिह्न उंबरठ्यावर, घरासमोर, देवघरात दररोज काढले जाते. गोवत्सद्वादशीच्या दिवशी म्हणजेच वसुबारसच्या दिवशी गोपद्मं अवश्य काढावीत आणि त्या दिवशी ‘ॐ श्री सुरभ्यै नम:।’  हा मंत्र कमीतकमी ५ वेळा म्हणावा. ‘ॐ श्री सुरभ्यै नम:।’  हा कामधेनूचा श्रेष्ठ मंत्र आणि गोपद्मांचे महत्त्व याबद्दल परम पूज्य सद्गुरु श्रीअनिरुद्धांनी त्यांच्या १४ नोव्हेंबर रोजीच्या प्रवचनात सांगितले, जे आपण या व्हिडियोत

स्कंद चिन्हके बारें मे खुलासा (Clarification Of Skanda Chinha)

 स्कंद चिन्हके बारें मे खुलासा (Clarification Of Skanda Chinha)   बापु के अनेक श्रद्धावान मित्र दैनिक प्रत्यक्ष (Pratyaksha) के अग्रलेखों से संबंधित विषयों से जुडी वेबसाईट्स् का इंटरनेट पर अध्ययन कर रहे हैं । यह अध्ययन करते समय कुछ श्रद्धावानों के मन में कौन सा स्कन्दचिन्ह उचित और कौन सी स्कन्दचिन्हसदृश आकृति अनुचित, यह प्रश्न उठ रहा था। इसलिए सभी श्रद्धावान मित्रों की जानकारी के लिए उचित और अनुचित आकृति

अल्बर्ट श्वाइत्झर आणि त्यांचे अथक परिश्रम (Albert Schweitzer and His hard work)  - Aniruddha Bapu Marathi Discourse 09 Oct 2014

अल्बर्ट श्वाइत्झर आणि त्यांचे अथक परिश्रम अल्बर्ट श्वाइत्झर ( Albert Schweitzer ) या थोर भगवद्‍भक्त असणार्‍या अशा शास्त्रज्ञाची अफाट कामगिरी सुविख्यात आहे. आफ्रिकेतील निबिड अरण्यात अनेक प्रकारची रोगराई आणि अनेक प्रकारची संकटे यांना तोंड देत तेथील गरजू आदिवासींसाठी त्यांनी अहोरात्र निरपेक्ष प्रेमाने काम केले. त्यांच्या परिश्रमाबाबतचा एक किस्सा सद्गुरु श्रीअनिरुद्धांनी त्यांच्या ०९ ऑक्टोबर २०१४ रोजीच्या मराठी प्रवचनात सांगितला, जो आपण या व्हिडियोत पाहू शकता. ॥ हरि ॐ ॥ ॥ श्रीराम ॥

सक्रिय करमणुकीचे महत्त्व (Significance of Active Entertainment) - Aniruddha Bapu Marathi Discourse 09 Oct 2014

सक्रिय करमणुकीचे महत्त्व माणसाने करमणुकीसाठी उचित वेळ देणे गैर नाही. मनाला सक्रिय करमणुकीत, उदा. मैदानी खेळ वगैरेंमध्ये रमवण्याने मन अधिकाधिक समर्थ बनते आणि त्यात चुकीच्या गोष्टी शिरण्याची जागाच उरत नाही. माणूस जेव्हा निष्क्रिय करमणुकीत अडकतो तेव्हा त्याचे मन दुर्बल बनते. सक्रिय करमणुकीचे महत्त्व आणि आवश्यकता याबद्दल परम पूज्य सद्गुरु श्रीअनिरुद्धांनी त्यांच्या ०९ ऑक्टोबर २०१४ रोजीच्या मराठी प्रवचनात सांगितले, जे आपण या व्हिडियोत पाहू शकता. ॥ हरि ॐ ॥ ॥ श्रीराम

क्रोध ही भयाचीच अभिव्यक्ती आहे (Fear is expressed as Anger) - Aniruddha Bapu Marathi Discourse 09 Oct 2014

क्रोध ही भयाचीच अभिव्यक्ती आहे   माणूस जेवढा रागीट तेवढा अधिक भित्रा असतो. मानवाच्या बाह्यत: जेवढा क्रोध असतो, तेवढे भय ( Fear ) त्याच्या मनात असते. मानवी मन जेव्हा कुतर्काद्वारे पुढे काय होणार या कल्पनांमध्ये अडकते, तेव्हा त्यातून भय निर्माण होते आणि तेच क्रोधरूपात व्यक्त होते. प्रत्येक क्रोध हा भीतीतूनच उत्पन्न होतो, याबद्दल परम पूज्य सद्गुरु श्रीअनिरुद्धांनी त्यांच्या ०९ ऑक्टोबर २०१४ रोजीच्या मराठी प्रवचनात सांगितले, जे आपण या व्हिडियोत पाहू