Samirsinh Dattopadhye

discipline in life

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धजी ने ०७ अक्टूबर २०१० के पितृवचनम् में ‘जीवन में अनुशासन (discipline in life) का महत्त्व’ इस बारे में बताया। ये संयम जो है, बहुत आवश्यक होता है। जहाँ जितना बोलना चाहिए, उतना ही बोलना चाहिए। जहाँ जो करना चाहिए, उतना ही करना चाहिए। जहाँ शौर्य चाहिए, वहाँ शौर्य चाहिए। जहाँ शान्ति चाहिए, वहाँ शान्ति ही चाहिए। हर चीज़ की आवश्यकता होती है। लेकिन हम अपने मन पर

गुरुत्वाकर्षण

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धजी ने ०७ अक्टूबर २०१० के पितृवचनम् में ‘जीवन में अनुशासन का महत्त्व’ इस बारे में बताया। गुरु के साथ चलना यानी क्या? उसकी आज्ञा का पालन करना, राईट! और जो गुरु की आज्ञा का पालन करता है, छोटी से छोटे। तो उस गुरु के चरण हमेशा उसे डिसीप्लीन प्रदान करते हैं। क्योंकि गुरु के चरण, ‘गुरु’ शब्द में ही क्या है? हम लोग क्या कहते हैं, अर्थ

सद्‍गुरु महिमा-भाग १ , Sadguru Mahima-Part 1

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धने १५ अप्रैल २०१० के पितृवचनम् में ‘सद्‍गुरु महिमा’ इस बारे में बताया।   साईनाथजी की महिमा हेमाडपंत लिख रहे हैं, हम लोग देख रहे हैं। हेमाडपंतजी ने हमें सद्‍गुरु क्या था, क्या होता है, कैसे होता है यह खुद की आँखों से देखा था, महसूस किया था और पूरी तरह से जान लिया था और सिर्फ जाना नहीं बल्कि जानने के साथ-साथ खुद को निछावर कर दिया

अनिरुद्धांच्या ‘ईशा माँ’

॥ हरि ॐ ॥ कुन्दनिका कापडिया अर्थात अनिरुद्धांच्या ‘ईशा माँ’चा देह आज मूलतत्त्वात विलीन झाला. आज तारीख ३०/०४/२०२० रोजी पहाटे दोन वाजता त्यांनी देह सोडला आणि सकाळी अकरा वाजून चाळीस  मिनिटांनी त्यांचे अंत्यसंस्कार नंदिग्राम मध्ये झाले. अनिरुद्धांच्या दुःखात आम्ही सर्व श्रद्धावान सहभागी आहोत. । हरि ॐ । श्रीराम । अंबज्ञ । । नाथसंविध्‌ ।  समीरसिंह दत्तोपाध्ये गुरुवार, दि. ३० एप्रिल २०२०  ११ जानेवारी १९९३ – जगदंबेच्या मूर्तीची नंदिग्राममध्ये प्राणप्रतिष्ठा आधुनिक

Kolhapur Medical & Healthcare Camp 2020

      Camp Photos The Kolhapur Medical & Healthcare Camp, a brainchild of Dr. Aniruddha Dhairyadhar Joshi, M.D. (Medicine) is now in the 17th year. The camp for the year 2020 was held on 26th and 27th of January at Pendakhale village of Shahuwadi taluka in Kolhapur district of Maharashtra.  One may think of the camp to be just an annual two-day fanfare. Contrary to a general perception about medical camps, the Kolhapur Medical & Healthcare Camp

It was not His picture but Him!

– Anjali Sarpotdar, Dahisar  Once a devotee’s feet turn towards the Sadguru, one automatically begins to experience His presence. Then even if he/she has not physically seen the Sadguru, only a simple dialogue with His picture can help a devotee sail through troubled waters. And later on, one does not have to ask for the proof of His interventions. One continues to experience them as also His unconditional compassion.     I offer my respect

Aniruddha Bhaktibhav Chaitanya

डिसेंबर २०१९ संपादकीय हरि ॐ श्रद्धावान सिंह, वेळ हा चुटकी वाजवल्यासारखा क्षणात उडून जातो. आपण सर्वजण प्रत्यक्ष अनुभवणार असलेला अनिरुध्द भक्तिभाव चैतन्य हा महासत्संग सोहळा अगदी काही आठवड्यांवर येऊन ठेपला आहे. ह्या भव्य सोहळ्याची सर्व तयारी अत्यंत जोशात सुरु आहे. १८ नोव्हेंबर – म्हणजे आपल्या लाडक्या सदगुरु श्री अनिरुध्दांचा वाढदिवस! त्यामुळेच नोव्हेंबर महिना हा प्रत्येक श्रध्दावानासाठी अगदी विशेष महत्त्वाचा असतो. त्रिपुरारी पौर्णिमेच्या अत्यंत पवित्र दिवशी सद्गुरु श्री अनिरुध्दांचा जन्म झाला.

Aniruddha Bhaktibhav Chaitanya

December 2019 From the Editor’s Desk Hari Om Friend, Time flies in a snap! We are only a few weeks away from witnessing the mega satsang, ‘Aniruddha Bhaktibhav Chaitanya’. Preparations are ongoing for this grand event on a large scale. The month of November is peculiarly special for every Shraddhavan, as it is the month of the birthday of our dear Sadguru Shree Aniruddha, who was born on the pious

मणिपुर चक्र और प्राणाग्नि - भाग २

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २० अप्रैल २०१७ के प्रवचन में ‘मणिपुर चक्र और प्राणाग्नि (Manipur Chakra And Pranagni – Part 2)’ इस बारे में बताया।   रात जो है, नींद जो है, वह भी एक मृत्यु ही है। वैसे ही दूसरे एक मृत्यु की, मृत्यु का प्रकार रहता है यानी कि देखिये हम लोग कुछ काम कर रहे हैं, वह कार्य पूर्ण हो गया, ओ.के। आपने समझो एक घर

मणिपुर चक्र और प्राणाग्नि   (Manipur Chakra And Pranagni)

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २० अप्रैल २०१७ के प्रवचन में ‘मणिपुर चक्र और प्राणाग्नि (Manipur Chakra And Pranagni)’ इस बारे में बताया।   तो ये बात जान लीजिये और ये जो प्राणाग्नि हैं जो शांत हो जाता हैं यहां, वहीं प्राणाग्नि वहाँ चेतनामय हो जाता है। यानी एक आदमी श्रद्धावान यहां मृत हो गया तो उसके देह में जो प्राणाग्नि है वो शांत हो गया। जब ये लिंगदेह भर्गलोक