और देवता चित्त न धरई। (Aur devata chitta na dharai)

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ४ फरवरी २०१६ के प्रवचन में ‘और देवता चित्त न धरई’ इस बारे में बताया।

 

हमें एक करोड़ जप करने के बाद ही भगवान कृपा करेंगे ऐसा नहीं हैं। हमने जन्म में कभी भी नाम नहीं लिया है, पहली बार लिया, फिर भी वह काम करने वाला है, यह जान लो। लेकिन थोड़ी सी सबूरी रखना आवश्यक है ना! भगवान ने कभी ऐसा किया है, आपने देखा हैं जब भी माँ के गर्भ में पहले दिन बच्चे का जन्म होता है, यानी बच्चा उत्पन्न होता है, पुंबीज और स्त्रीबीज एकत्रित आने के बाद, उसके बाद नऊ महिने, नऊ दिन के बाद ही जन्म होता है, जो सही होना चाहिये। लेकिन आपने देखा है कि एक महिने में बच्चा बड़ा हो गया, चलो बस, आज तो ये प्रेग्नसी टेस्ट पॉझिटिव आ गयी और एक महिने के बाद बच्चा नऊ महिने का पैदा हो गया। ऐसा कभी हुआ है? और होगा तो हम उसे राक्षस कहेंगे ना, राईट।

सो, ये सारे हमारे शोक हैं, दुख हैं, भय हैं, हमारे पापकर्म हैं, हमारी गलतियाँ हैं ये सारे हमारे मन को फाड़ते रहते हैं और हमारी भगवान कि कृपा कहाँ आती है? तो मन में ही उतरती है, ध्यान में रखिये, मन में ही उतरती है।

आप कहेंगे बापू, आप फिर से दोहरा रहा हैं, इसका मतलब कुछ प्रॉब्लेम है, हां, मन में ही उतरती है, नहीं चित्त में उतरती है। चित्त क्या है? मन का ही ऐसा भाग, चित्त यानी, मैंने बार-बार कहा है, चित्त यानी मन का ही ऐसा भाग जो भगवान के साथ जुड़ा हुआ है। हमारे मन का जो जितना छोटासा हिस्सा है समझिये, जो भगवान के साथ जुड़ा हुआ है, उसी में ही भगवान की कृपा आकर कार्य करने लगती है। यह कार्य बहेगा तो मन में ही बहेगा ना, मन फटा हुआ है तो सबकुछ निकल जायेगा।

सो, विश्वास के कारण ही चित्त बनता है, चित्त तैयार होता है। इसी लिये हनुमानचालिसा में हम लोग क्या सुनते हैं? ‘और देवता चित्त न धरई। हनुमत सेइ सर्ब सुख करई।’ इसका मतलब ये नहीं है कि बाकी भगवान की मूर्तियाँ जो हैं, रूप जो हैं, उनकी आराधना मत करना, ऐसा इसका मतलब नहीं है। ‘और देवता चित्त न धरई।’ यानी मन को चित्त बनाने का कार्य सिर्फ हनुमानजी करते हैं और वो कभी करते हैं? हम रामनाम लेते हैं तो करते हैं, राम की, किसी भी रूप की आराधना करते हैं, तब करते हैं, राईट! सो हमें क्या करना चाहिये? हमें भक्ति करनी चाहिये, विश्वास रखना चाहिये।

‘और देवता चित्त न धरई’ इस बारे में हमारे सद्गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने प्रवचन में बताया, जो आप इस व्हिडिओ में देख सकते हैं।

ll हरि: ॐ ll ll श्रीराम ll ll अंबज्ञ ll

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